कोविड से अनाथ हुए बच्चों का पुनः सर्वे कराये केजरीवाल सरकार, BJP ने एलजी को लिखा पत्र

दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रखे गए तथ्य काफी हैरान और परेशान करने वाले हैं.

दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार की ओर से जानकारी दी गई है कि 28 मई तक दिल्ली में कोविड से 17 साल तक के केवल 2 बच्चे अनाथ हुए हैं और 3 बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया है. कोर्ट में रखे गए इन तथ्यों पर भाजपा‌ने काफी हैरानी जताई है.

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    नई दिल्ली. दिल्ली सरकार (Delhi Government) ने गत 28 मई को सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) को सूचित किया है दिल्ली में भयंकर कोविडकाल में कोविड के कारण के कारण 17 साल तक के केवल 2 बच्चे अनाथ (Orphaned Children) हुऐ और केवल 3 बच्चों ने अपना एक अभिभावक खोया हैै.

    दिल्ली में कोरोना (Corona) संक्रमण से अब तक 24,447 लोगों की जान जा चुकी है. वहीं, कोरोना की दूसरी लहर में बड़ी संख्या में कम उम्र के लोगों ने अपनी जान गंवाई है. इसकी वजह से परिवारों में कभी पूरी नहीं होने वाली बहुत बड़ी क्षति हुई है. लेकिन दिल्ली सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट में रखे गए तथ्य काफी हैरान और परेशान करने वाले हैं. भाजपा ने केजरीवाल सरकार के इन आंकड़ों पर सवाल खड़े किए हैं.

    दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर के मुताबिक 28 मई तक दिल्ली में कोविड से 17 साल तक के केवल 2 बच्चे अनाथ हुए हैं और 3 बच्चों ने अपने अभिभावकों को खोया है. इस तरह की जानकारी सुप्रीम कोर्ट में केजरीवाल सरकार (Kejriwal Government) की ओर से दी गई है.

    कपूर ने इस संदर्भ में उप-राज्यपाल अनिल बैजल (Anil Baijal) को पत्र लिखकर उनका ध्यान इस ओर आकृष्ट किया है. और पुन: सर्वे करवाकर न्यायालय में सही आंकड़ा भिजवाने की मांग की है.
    उन्होंने कहा कि इतने संवेदनशील मामले में यह लापरवाही अरविंद केजरीवाल सरकार की संवेदनहीनता का प्रमाण है.

    पत्र में कहा गया है कि हम सब ने समाज में देखा सुना है, समाचार पत्रों में पढ़ा है कि हजारों कम उम्र के पुरूष एवं महिलाओं की कोविड के कारण जान गई है. स्वाभाविक है कि अगर हजारों जवान लोगों की मौत हुई है तो उनके बच्चे भी नाबालिग होंगे. ऐसे में न्यायालय में और रिकार्ड में गलत आंकड़ें रखे जाने से अनेक बच्चे उचित मुआवज़ा पाने से भी वंचित रह जायेंगे.

    दिल्ली भाजपा प्रवक्ता ने उप-राज्यपाल (LG) से मांग की है कि वह दिल्ली सरकार के सम्बंधित विभाग को कोविड से अनाथ हुऐ या एक अभिभावक खोने वाले बच्चों का सही आंकड़ा जुटाने के लिये पुनः सर्वे एवं सत्यापन कर सर्वोच्च न्यायालय में अगली तिथि पर सही आंकड़ा रखने का आदेश दें.