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Kisan Aandolan: किसानों का साथ देने बिहार से साइकिल पर निकले सत्यदेव, 11 दिन बाद पहुंचे दिल्ली

साइकिल से दिल्ली पहुंचा एक बिहार का एक शख्स.

साइकिल से दिल्ली पहुंचा एक बिहार का एक शख्स.

किसानों के विरोध में शामिल होने के लिए  60 साल का एक शख्स बिहार से दिल्ली-हरियाणा सीमा (Delhi-Haryana border) पर स्थित टिकरी साइकिल से पहुंचा. साथ ही सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने की मांग की.

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    दिल्ली: केंद्र सरकार के तीन कृषि कानूनों (New Agriculture Laws 2020) के विरोध में किसानों का प्रदर्शन (Farmers Protest) लगातार जारी है. च किसान संगठनों और केंद्र सरकार के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं निकल सका है. इस बीच किसानों के विरोध में शामिल होने के लिए  60 साल का एक शख्स बिहार से दिल्ली-हरियाणा सीमा (Delhi-Haryana border) पर स्थित टिकरी पहुंचा. सत्यदेव मांझी कहते हैं, "मुझे अपने गृह जिले सिवान से यहां पहुंचने में 11 दिन लग गए. मैं सरकार से तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का आग्रह करता हूं'.

    इस बीच, दिल्‍ली के टिकरी बॉर्डर (हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर) पर विरोध कर रहे किसानों का कहना है कि वे सरकार के साथ बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन विरोध नहीं छोड़ेंगे. टिकरी बॉर्डर (हरियाणा-दिल्ली बॉर्डर) पर विरोध कर रहे एक किसान ने कहा कि हम बातचीत के और दौर के लिए तैयार हैं. केंद्र सरकार अब सुप्रीम कोर्ट की मदद ले रही है, ताकि उनके अहंकार को चोट न पहुंचे. साथ ही कहा कि टेबल की बातचीत को लाइव टेलीकास्‍ट किया जाए.



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    सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई

    आपको बता दें कि तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसानों के प्रदर्शन को हटाने संबंधी याचिका पर गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया एस. ए. बोबड़े, जस्टिस ए. एस. बोपन्ना और जस्टिस रामासुब्रमणियन की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि हम आज कानूनों की वैधता पर कोई निर्णय नहीं लेंगे, हम केवल विरोध के अधिकार और देश में कहीं भी मुक्त आवाजाही के अधिकार पर निर्णय लेंगे. इसके साथ पीठ ने कहा कि अगर किसान और सरकार वार्ता करें तो विरोध-प्रदर्शन का उद्देश्य पूरा हो सकता है और हम इसकी व्यवस्था कराना चाहते हैं. कोर्ट ने कहा कि हम किसानों के विरोध-प्रदर्शन के अधिकार को सही ठहराते हैं, लेकिन विरोध अहिंसक होना चाहिए. अदालत ने कहा कि हम कृषि कानूनों पर बने गतिरोध का समाधान करने के लिए कृषि विशेषज्ञों और किसान संघों के निष्पक्ष और स्वतंत्र पैनल के गठन पर विचार कर रहे हैं.

    हालांकि सुप्रीम कोर्ट में किसान आंदोलन को लेकर सुनवाई अभी टल गई है. अदालत में किसी किसान संगठन के ना होने के कारण कमेटी पर फैसला नहीं हो पाया. सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि वो किसानों से बात करके ही अपना फैसला सुनाएंगे. आगे इस मामले की सुनवाई दूसरी बेंच करेगी. सुप्रीम कोर्ट में सर्दियों की छुट्टी है, ऐसे में वैकेशन बेंच ही इसकी सुनवाई करेगी.

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