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Kisan Andolan: पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, गोली से नहीं ट्रैक्टर के पलटने से ही हुई थी किसान की मौत

Kisan Tractor Parade के दौरान सुरक्षाबलों और किसानों के बीच भारी संघर्ष देखने को मिला.
Kisan Tractor Parade के दौरान सुरक्षाबलों और किसानों के बीच भारी संघर्ष देखने को मिला.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद इस बात की पुष्टि हो गई है कि किसान की मौत गोली लगने से नहीं हुई थी. गौरतलब है कि किसान गुट मंगलवार से ही दावा कर रहे थे कि पुलिस की गोली लगने के कारण किसान की मौत हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 27, 2021, 7:31 PM IST
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नई दिल्ली/बरेली. दिल्ली में मंगलवार को हुए बवाल के दौरान एक किसान की मौत हो गई. आंदोलनरत किसानों ने आरोप लगाया कि किसान की मौत पुलिस की गोली लगने से हुई है. इसको लेकर काफी हंगामा भी हुआ. लेकिन अब किसान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद मामले का खुलासा हुआ है. किसान की मौत गोली लगने से नहीं बल्कि ट्रैक्टर के पलटने से आई चोटों के कारण हुई है.

एडीजी बरेली अविनाश चंद्रा ने बताया कि किसान की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आ गई और अब इस बात की पुष्टि हो गई है कि किसान की मौत गोली लगने से नहीं हुई है. उन्होंने कहा कि उसकी मौत ट्रैक्टर के पलट जाने के कारण आई चोटों के चलते हुई है.

आंदोलनकारी किसानों ने पूर्व घोषणा के तहत मंगलवार 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस पर ट्रैक्टर रैली निकाली. इस दौरान कई जगहों पर प्रदर्शनकारी किसानों और दिल्ली पुलिस के बीच झड़प हुई. किसान ऐतिहासिक लाल किला और आईटीओ भी पहुंचे और यहां उन्होंने जमकर उपद्रव मचाया. कई जगहों पर वो ट्रैक्टर परेड के लिए तय रास्तों को छोड़कर अन्य रास्तों से जाने लगे और उन्हें रोकने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा और आंसू गैस के गोले भी दागे गए. इस दौरान किसानों ने ट्रैक्टरों को दिल्ली की सड़कों पर दौड़ाया और तेजी से चलाते हुए कई जगह पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया. इसी दौरान एक ट्रैक्टर पलट गया और हादसे में एक किसान की मौत हो गई.





दिल्ली की सीमा पर 26 नवंबर से किसान दे रहे हैं धरना
बता दें कि किसान केंद्र द्वारा लागू किए गए कृषि कानूनों के खिलाफ हैं. वो इसका कड़ा विरोध कर रहे हैं. बीते 26 नवंबर से पंजाब-हरियाणा समेत कई अन्य राज्यों के किसान दिल्ली बॉर्डर पर धरना दे रहे हैं. तमाम मुश्किलों और दुश्वारियों के बावजूद वो यहां जमे हुए हैं. केंद्र सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच ग्यारह दौर की बातचीत हो चुकी है, लेकिन अभी तक इस मुद्दे का हल नहीं निकल सका है. किसान तीनों कानूनों को वापस लेने की लगातार मांग कर रहे हैं. वो इससे कम पर राजी नहीं हैं.
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