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दिल्ली पुलिस के पास है एक 'इंसानी CCTV’, जो चलता-फिरता है और बोलता भी है

बलजीत सिंह राणा रिटायरमेंट के बाद भी दिल्ली पुलिस की सेवा दे रहे हैं (बीच में बलजीत सिंह राणा-फाइल फोटो)

बलजीत सिंह राणा रिटायरमेंट के बाद भी दिल्ली पुलिस की सेवा दे रहे हैं (बीच में बलजीत सिंह राणा-फाइल फोटो)

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के रिकॉर्ड में बलजीत सिंह राणा (Baljit Singh Rana) सब इंसपेक्टर (Sub Inspector) के पद से 2012 में ही रिटायर (Retirement) हो चुके हैं, लेकिन हकीकत में वह अब भी दिल्ली पुलिस में तैनात हैं.

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नई दिल्ली. शांति, सेवा, न्याय का नारा देने वाली दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के पास एक जिंदा 'इंसानी सीसीटीवी' (CCTV) है, जो चलता है और बोलता भी है. चौंकिए मत, बीते 20 साल से यह 'इंसानी सीसीटीवी' न तो खराब हुआ है और न ही कभी ड्यूटी से नदारद रहा है. इससे भी बड़ा और चौंकाने वाला सच यह है कि नौकरी से रिटायर (Retirement) होने के बाद भी यह 'इंसानी सीसीटीवी' बीते कई वर्षों से बिना वेतन लिए दिल्ली पुलिस को ‘फ्री’ सेवा दे रहा है. लगभग 69 साल के इस 'इंसानी सीसीटीवी' का नाम बलजीत सिंह राणा (Baljit Singh Rana) है. दिल्ली पुलिस के रिकॉर्ड में राणा सब-इंसपेक्टर (Sub Inspector) के पद से 2012 में ही रिटायर हो चुके हैं, लेकिन हकीकत में वो अब भी दिल्ली पुलिस में तैनात हैं.

VIP और VVIP मूवमेंट में रुट पर रहती है नज़र 

बलजीत सिंह राणा का जन्म 14 अगस्त, 1952 को हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव कुंडल में हुआ था. बलजीत सिंह राणा के मुताबिक, ‘1970 के दशक में मैंने जब दिल्ली पुलिस जॉइन की, तब की पुलिस और आज की पुलिस बहुत बदल चुकी है. 1 सितंबर, 1976 को उन्हें राष्ट्रपति भवन से ट्रांसफर कर के नई दिल्ली जिले के पार्लियामेंट थाने में भेज दिया गया और उन्हें नई दिल्ली जिले की ‘डिप्लॉयमेंट-सेल’ में इंचार्ज के पद पर तैनात कर दिया गया. ड्यूटी के दौरान वीवीआईपी, वीआईपी मूवमेंट (विदेशी मेहमानों की सुरक्षा और रुट निर्धारण), जंतर-मंतर पर रोज होने वाले धरना-प्रदर्शन को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराना, फोर्स का इंतजाम, आदि-आदि डिप्लॉयमेंट-सेल इंचार्ज की प्रमुख जिम्मेदारी होती है.’

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दिल्ली के पूर्व पुलिस कमिश्नर भीम सेन बस्सी के साथ बलजीत सिंह राणा (फाइल फोटो)


रिटायरमेंट के बाद भी दिल्ली पुलिस की जरूरत

अमूमन देखने-सुनने में यही आता है कि रिटायरमेंट के बाद सरकारी कर्मचारी खुद को बूढ़ा और लाचार महूसस करने लगते हैं. लेकिन, बलजीत सिंह राणा इस मामले में बाकियों से अलग साबित हुए. 1 अगस्त, 2012 को दिल्ली पुलिस से रिटायर हो चुके राणा की विशेषता है कि वो नई दिल्ली एरिया के रुट्स और नक्शे के बारे में पूरी जानकारी रखते हैं. उनकी इस काबिलियत का अब तक दिल्ली पुलिस के पास कोई विकल्प नहीं है. राणा की इसी काबिलियत को देखते हुए उस वक्त के दिल्ली पुलिस कमिश्नर रहे वी.के गुप्ता दिल्ली के तत्कालीन उप-राज्यपाल (एलजी) के पास उनको लेकर पहुंचे थे. उप-राज्यपाल ने पुलिस कमिश्नर की सलाह पर और राणा के दिल्ली पुलिस सर्विस रिकॉर्ड के आधार पर उन्हें डिप्लॉयमेंट सेल प्रभारी (बतौर कंसलटेंट) पद पर बने रहने की अनुमति अस्थाई रुप से दे दी. इसका मेहनताना (कंसलटेंसी फीस) 10 हजार 570 रुपया प्रति माह तय हुआ.

पेंशन से ही दिल्ली पुलिस को सेवा दे रहे हैं

बकौल बलजीत सिंह राणा, कुछ समय बाद मुझे लगा कि, जिस दिल्ली पुलिस ने मुझे देश-दुनिया में बलजीत सिंह राणा बनाया, उससे रिटायरमेंट के बाद कंसलटेंसी फीस लेना ठीक नहीं है. लिहाजा मेरे अनुरोध पर पुलिस कमिश्नर नीरज कुमार के वक्त में मुझे इस बोझ (कंसलटेंसी फीस लेने से) से भी दिल्ली पुलिस महकमे ने मुक्त कर दिया. उसके बाद से (1 अगस्त, 2013) से अब तक मैं दिल्ली पुलिस में उसी कुर्सी और उसी पद पर (डिप्लॉयमेंट सेल इंचार्ज) बैठकर निशुल्क सेवा (ड्यूटी) दे रहा हूं, जहां मैंने वेतन लेकर हवलदार से दारोगा बनने तक (करीब 36 साल) ड्यूटी की थी.

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बलजीत सिंह राणा का जन्म 14 अगस्त, 1952 को हरियाणा के सोनीपत जिले के गांव कुंडल में हुआ था


बलजीत सिंह राणा के परिवार में उनकी पत्नी और तीन बच्चे हैं. बच्चों ने उच्च शिक्षा ग्रहण की. तीनों बच्चों की शादी हो चुकी है. खुद को बीमारियों से दूर रखने और फिट रहने के लिए बलजीत लंच में आज भी सिर्फ एक किलो छाछ या दही (मट्ठा) पीते हैं. जबकि रात के खाने (डिनर) में सिर्फ फल लेते हैं. हां, वो ब्रेकफास्ट (सुबह का नाश्ता) जरुर हैवी लेते हैं. इस वक्त बलजीत सिंह की उम्र 68 साल से ज्यादा हो चुकी है, लेकिन प्रतिदिन सुबह पांच बजे उठकर वो 5 से 6 किलोमीटर तेज दौड़ते हैं. साथ ही एक घंटे योग करना अपनी आदत में शुमार कर चुके हैं.

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