कभी थी गीता, लेकिन पैसे और पावर के लालच ने बना दिया सोनू पंजाबन, दिल्ली में चलता था सिक्का
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कभी थी गीता, लेकिन पैसे और पावर के लालच ने बना दिया सोनू पंजाबन, दिल्ली में चलता था सिक्का
हेमंत सोनू से गीता अरोड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित रही और उसने अपना नाम सोनू पंजाबन रख लिया.

12 साल की एक नाबालिग लड़की के ह्यूमन ट्रैफिकिंग, किडनैपिंग और रेप केस में द्वारका कोर्ट (Dwarka court) ने सोनू पंजाबन (Sonu Punjabban) को 24 साल की सजा सुनाई है. लेकिन 10वीं पास गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन की लेडी डॉन बनने की कहानी काफी दिलचस्‍प है.

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नई दिल्‍ली. दिल्‍ली के द्वारका कोर्ट (Dwarka court) ने 12 साल की एक नाबालिग लड़की के ह्यूमन ट्रैफिकिंग, किडनैपिंग और रेप केस में सोनू पंजाबन (Sonu Punjabban) को 24 साल की सजा सुनाई है. इस मामले में नाबालिग लड़की से दोस्‍ती और फिर शादी करने के बाद रेप करने वाले संदीप बेदवाल को भी 20 साल की सजा सुनाई गई है. हालांकि हम यहां पैसे और पावर के लाचल में लेडी डॉन बनने वाली सोनू पंजाबन की बात कर रहे हैं.

10वीं पास सोनू पंजाबन बनी डॉन...
आपको बता दें कि सोनू पंजाबन का असली नाम गीता अरोड़ा है और वह हरियाणा के रोहतक की मूल निवासी है. उसके पिता कुछ साल पहले रोजगार की तलाश में दिल्‍ली आए और यहां आकर रोजी रोटी के लिए ऑटो चलाने लगे. जबकि सोनू पंजाबन ने 10वीं तक पढ़ाई करने के बाद अपना ब्‍यूटी पार्लर खोल लिया और फिर फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली पंजाबन सेक्‍स रैकेट के धंधे में कूद गयी. यही नहीं, उसने पैसे के लालच में सेक्‍स रैकेट का कलेवर बदलकर उसे कंपनी में तब्दील कर दिया था.

सेक्स रैकेट से बनी करोड़पति
10वीं पास सोनू पंजाबन ने ब्‍यूटी पार्लर चलाते हुए एक सेक्स रैकेट तैयार किया और इसमें कई लोगों के काम बंटे हुए थे. किसी के जिम्‍मे लड़कियों को धंधे में उतारना था, तो कोई उन्हें हाई प्रोफाइल लोगों तक पहुंचाता था. यही नहीं, ग्राहक तलाशने और उन्‍हें सप्‍लाई करने के काम भी अलग अलग लोगों को सौंपा गया था. यकीनन, डिमांड और सप्लाई के खेल में सोनू पंजाबन ने बेशुमार दौलत बटोरी और खबरों के मुताबिक उसने इसी पैसे से दिल्ली-हरियाणा में कई जगहों पर संपत्तियां खरीद डालीं. हैरानी की बात ये है कि पंजाबन ने लड़कियों को देह व्‍यापार के धंधे में उतारने के लिए कुछ लोगों को काम पर रखा था, जिसके लिए वह 25000 से लेकर 75000 रुपये महीने वेतन देती थी.



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हाई प्रोफाइल लड़कियों से लेकर...
सोनू पंजाबन ने सेक्स रैकेट के धंधे में टीवी एक्ट्रेस से लेकर एयरहोस्टेस तक, मॉडल्स से लेकर स्कूल-कॉलेज जाने वाली लड़कियों तक को शामिल कर लिया था, लेकिन उसकी नजर उन लड़कियों पर ज्‍यादा रहती थी, जो अपनी तात्‍कालिक जरूरतों के लिए गिरोह के चुंगल में फंस जाती थीं. ऐसा नहीं था कि पुलिस सोनू पंजाबन की करतूतों से अनजान थी लेकिन उसे पुख्ता प्रमाण नहीं मिल रहे थे. जानकारों का कहना है कि सोनू बड़े नौकरशाह, नेताओं, उद्योग से जुड़े ऐसे-ऐसे लोगों को लड़कियां सप्लाई करती थी कि पुलिस उस पर हाथ डालने से कतराती थी.

रोहतक से दिल्ली का सफर
रोहतक की रहने वाली गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन ने 10वीं पास करने के बाद ना सिर्फ ब्यूटी पार्लर खोल लिया था बल्कि वह सेक्‍स रैकेट भी चलाने लगी थी. यही नहीं, उसकी 17 साल में विजय सिंह से शादी हुई, जो कि एक हिस्ट्रीशीटर था और उसके उत्‍तर प्रदेश के श्रीप्रकाश शुक्ला से उसके संबध बताए जाते थे. हालांकि 2003 में यूपी एसटीएफ ने उसे मार गिराया. इसके बाद वह 2003-04 के आसपास दीपक सोनू और हेमंत सोनू ( सोनू ब्रदर्स) के संपर्क में आई, जो कि जुर्म की दुनिया के बड़े नाम थे. इस दौरान उसने दीपक सोनू से शादी कर ली. लेकिन यह शादी बहुत दिन नहीं चल पाई, क्‍योंकि 2004 में दीपक पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. इसके बाद गीता ने उसके छोटे भाई हेमंत सोनू का दामन थाम लिया, लेकिन वह भी 2006 में एक एनकाउंटर में मारा गया.

हेमंत सोनू से गीता अरोड़ा सबसे ज्यादा प्रभावित रही और उसके एनकाउंटर के बाद अपना नाम सोनू पंजाबन रख लिया.


इस मामले में पाया गया दोषी
बहरहाल, दिल्‍ली के हरीश विहार थाने में दर्ज एफआईआर के मुताबिक 11 सितंबर 2009 को पीड़ित लड़की का अपहरण किया गया था. लड़की के पिता की तरफ से द्वारका कोर्ट में पेश बर्थ सर्टिफिकेट के अनुसार पीड़ित की जन्म तिथि 9 नवंबर 1996 में थी यानी घटना के वक्त उसकी उम्र महज 12 साल 10 महीने और 2 दिन थी. पीड़ित किसी तरह अपहरणकर्ता के चुंगल से छूटकर 9 फरवरी 2014 को नजफगढ़ पुलिस के पास पहुंची, जहां काउंसलिंग के बाद उसने पुलिस को बताया कि 2006 में जब वो छठी क्लास में पढ़ती थी. उस दौरान उसकी दोस्ती संदीप (आरोपी ) से हुई. उसने उसे प्यार और शादी के झांसे में फंसाया और एक दिन शादी करने के बहाने से दिल्ली के लक्ष्मीनगर इलाके में किसी सीमा आंटी के घर ले गया, जहां आरोपी ने पीड़ित के साथ रेप किया और उसके बाद सीमा नाम की महिला के हाथों बेच दिया. सीमा ने उसे जबरन ड्रग्स दिए और देह व्यापार करवाया और उसके बाद उसे अलग अलग देहव्यापार से जुड़े लोगों को बेचा गया. इस तरह पीड़ित को गीता अरोड़ा उर्फ सोनू पंजाबन के पास बेचा गया.

जुर्म कर पुलिस को चकमा देने में माहिर
ये पहली बार है जब किसी आपराधिक मामले में सोनू पंजाबन दोषी साबित हुई है इससे पहले भी उसके खिलाफ क‌ई मामले दर्ज किए गए, लेकिन वो हर बार बच निकलती थी. पंजाबन को 2007 में प्रीत विहार पुलिस ने और 2008 में साकेत पुलिस ने गिरफ्तार किया था,लेकिन वह जमानत पर बाहर आ गई. इसके बाद 2011 में उसे 4 लड़कियों और 4 लड़कों के साथ गिरफ्तार कर लिया गया था. इस बार उस पर मकोका (महाराष्ट्र कंट्रोल ऑफ ऑर्गेनाइज्ड क्राइम एक्ट 1999) लगाया गया था, क्‍योंकि वह पैसे कमाने के लिए संगठित तरीके से सेक्स रैकेट चला रही थी. हालांकि पुलिस कोर्ट में आरोप साबित नहीं कर सकी और वह फिर बरी हो गयी. दिसंबर 2017 में सोनू पंजाबन को एक बार गिरफ्तार किया गया था. इस बार उस आरोप था कि उसने एक केंद्रीय मंत्री को ब्लैकमेल करने की कोशिश की और एक लड़की को 20 लाख रुपये में बेचा था.
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