Corona Third Wave: छोटे बच्‍चों को मास्‍क पहनाना होगा आसान, अपनाएं ये तरीके

देश में कोविड की तीसरी लहर की आशंका जताई जा रही है ऐसे में बच्‍चों पर खास ध्‍यान देना होगा. फोटो सौ. (Money Control)

यूट्यूब पर ऐसी कई राइम्‍स आई हैं जिनमें बच्‍चों को मास्‍क, सोशल डिस्‍टेंसिंग और सेनिटाइजर आदि के इस्‍तेमाल के लिए प्रेरित करते हुए कविताएं बनाई गई हैं. इनमें जंगल के जानवर मास्‍क लगाते हैं और बंदर मामा पुलिस बनकर जानवरों को मास्‍क पहनाते हैं.

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    नई दिल्‍ली. देश में कोरोना की तीसरी लहर के खतरे की संभावना जाहिर की जा रही है. ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने भी तीसरी लहर के डेढ़ से दो महीने में आने की आंशका जताई है. ऐसे में अगली लहर में बच्‍चों को लेकर भी विशेषज्ञ सतर्क होने की बात कह रहे हैं. साथ ही बच्‍चों को कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर सिखाने की भी बात कह रहे हैं.

    कोरोना की पहली और दूसरी लहर में भी देखा गया है कि कोरोना को लेकर बरती गई सावधानी ही इससे बचाने में मदद करेगी. विशेषज्ञों का कहना है कि बच्‍चों की बात करें तो आंकड़ों से ऐसा नहीं लगा है कि दोनों लहरों में बच्‍चों पर कोई खतरनाक प्रभाव देखने को मिला है लेकिन कोरोना के नए-नए वेरिएंट आने और बच्‍चों का वैक्‍सीनेशन न होने के कारण इनके चपेट में आने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.

    ऐसे में जरूरी है कि छोटे-छोटे बच्‍चों को भी कोरोना के नियमों का पालन करना सिखाया जाएा. हालांकि इस दौरान सबसे बड़ी समस्‍या छोटे बच्‍चों को लेकर है. खासतौर पर दो साल तक के बच्‍चों को लेकर जो न तो मास्‍क पहनते हैं और न ही सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करते हैं. इनकी साफ-सफाई रखना भी मुश्किल भरा काम है. हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ तरीकों से अभिभावक बच्‍चों को सुरक्षित रख सकते हैं.

    बच्‍चों के स्‍पेशलिस्‍ट डॉ. एसएस जायसवाल कहते हैं कि दो साल तक के बच्‍चों को भी अगर अभिभावक चाहें तो जागरुक कर सकते हैं. इसके लिए कई तरीके अपना सकते हैं. यहां तक कि खेल-खेल में बच्‍चों को मास्‍क सहित सोशल डिस्‍टेंसिंग और हाथ साफ करने का तरीका समझा सकते हैं.

    यू ट्यूब पर मौजूद हैं मास्‍क वाली राइम्‍स

    डॉ. जायसवाल कहते हैं कि यूट्यूब पर ऐसी कई राइम्‍स आई हैं जिनमें बच्‍चों को मास्‍क, सोशल डिस्‍टेंसिंग और सेनिटाइजर आदि के इस्‍तेमाल के लिए प्रेरित करते हुए कविताएं बनाई गई हैं. इनमें जंगल के जानवर मास्‍क लगाते हैं और बंदर मामा पुलिस बनकर जानवरों को मास्‍क पहनाते हैं. पुलिस को देखकर जानवर दूर दूर खड़े होते हैं और दूर-दूर खड़े होकर ही खेलते हैं. वहीं बच्‍चों के बनाए हुए ही कुछ और वीडियोज भी हैं जिन्‍हें आप बच्‍चों को दिखा सकते हैं.

    चूंकि आजकल गैजेट्स और घर में बंद रहने के कारण एक साल का भी बच्‍चा फोन में राइम्‍स देखना शुरू कर देता है ऐसे में जरूरी है कि अभिभावक खोज-खोजकर कोरोना या इससे संबंधित राइम्‍स बच्‍चों को दिखाएं. इससे बच्‍चे खुद ही जागरुक होंगे.

    बच्‍चों के साथ मास्‍क और सेनिटाइजर वाले कुछ गेम बनाकर खेलें

    डॉ. जायसवाल कहते हैं कि आप घर पर अपने बच्‍चों को किसी न किसी एक्टिविटी में उलझाते हैं या खिलाते ही हैं. ऐसे में कोशिश करें कि पारंपरिक खेलों के बजाय कुछ ऐसे खेल बनाएं जिनमें मास्‍क, सोशल डिस्‍टेंसिंग, सेनिटाइजर आदि चीजों का इस्‍तेमाल हो और इनका उपयोग करना सिखाया जाए. ऐसा अगर कुछ दिन करेंगे तो बच्‍चा खेल-खेल में इनका इस्‍तेमाल सीख जाएगा.

    बाहर न भी जाएं तो कभी कभी पहनें मास्‍क

    जब आप छोटे बच्‍चे के साथ हैं और बाहर कहीं नहीं जा रहे तब भी बच्‍चे को सिखाने के लिए मास्‍क पहन सकते हैं. इसके लिए बच्‍चे को ये दिखाएं कि आप बाहर जा रहे हैं इसलिए सबसे पहले मास्‍क पहनना है. इसके बाद बच्‍चे को भी ऐसा ही करने के लिए कहें. इससे यह होगा कि बच्‍चे की मेमोरी में ये मास्‍क रहेगा और जब कभी बाहर जाएगा तो मास्‍क का इस्‍तेमाल आसानी से कर लेगा.

    डॉ. एसएस कहते हैं कि कोरोना की तीसरी लहर में बच्‍चों पर प्रभाव होगा या नहीं ये तो नहीं कह सकते लेकिन सावधानी बरतना सबसे बड़ी चीज है. ऐसे में छोटे बच्‍चों का विशेष ध्‍यान रखा जाए साथ ही उन्‍हें कोरोना अनुरूप व्‍यवहार करना भी सिखाया जाए.

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