दिल्ली: अपोलो हॉस्पिटल में दिया गया 'कॉकटेल ड्रग' का पहला डोज, जानिए इसकी कीमत

'एंटीबॉडी कॉकटेल' दो दवाइयों Casirivimab और Imdevimab का मिश्रण  है... (प्रतीकात्मक फोटो)

'एंटीबॉडी कॉकटेल' दो दवाइयों Casirivimab और Imdevimab का मिश्रण है... (प्रतीकात्मक फोटो)

Cocktail Drug: आसान शब्दों में समझें तो जब कोई संक्रमित होता है, तो शरीर एंटीबॉडी बनाने में औसतन दो हफ्ते का समय लेता है लेकिन यह दवा बनी बनाई इम्यूनिटी है. 'कॉकटेल ड्रग' बॉडी में जाते ही काम करना शुरू कर देती है और संक्रमित मरीज की बीमारी और लक्षण को बाहर आने से रोकती है.

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नई दिल्ली. दिल्ली के अपोलो हॉस्पिटल में मोनोक्लोनल एंटीबॉडी का पहला डोज दिया गया है. अस्पताल की ओर से सही मरीजों का चयन कर यह दवा उनको दी जा रही है. अस्पताल की ओर से जानकारी दी गई कि एक 65 वर्षीय मरीज जिसको कोरोना के शुरुआत में ही एंटीबॉडी कॉकटेल दिया गया.

आगे उसका संक्रमण गंभीर हो सकता था, इसी को ध्यान में रखते हुए उसे यह एंटीबॉडी दी गई और एक घंटे तक उस पर निगरानी रखी गई. इसके बाद देखा गया कि इस एंटीबॉडी का उस मरीज में अच्छा प्रभाव हुआ है. अब गंगाराम अस्पताल में भी इसकी तैयारियां हो रही है.

क्या है कॉकटेल ड्रग

'एंटीबॉडी कॉकटेल' दो दवाइयों Casirivimab और Imdevimab का मिश्रण है जो कोरोना से लड़ने में किसी मरीज की शक्ति को बढ़ाती है. इसमें वायरस पर दो तरफ से हमला किया जाता है. इन दोनों दवाओं के 600-600 MG मिलाने पर 'एंटीबॉडी कॉकटेल' दवा तैयार की जाती है. जानकारों के मुताबिक, ये दवा कोरोना वायरस को मानवीय कोशिकाओं में जाने से रोकती है जिससे वाइरस को न्यूट्रिशन नहीं मिलता. इस तरह ये दवा वायरस को रेप्लिकेट करने से रोकती है यानि अधिक संख्या में नही बनने देता. फ़िलहाल इसके एक डोज की कीमत 59,000 रुपये के तक़रीबन तय की गई है.
आसान शब्दों में समझें तो जब कोई संक्रमित होता है, तो शरीर एंटीबॉडी बनाने में औसतन दो हफ्ते का समय लेता है लेकिन यह दवा बनी बनाई इम्यूनिटी है. 'कॉकटेल ड्रग' बॉडी में जाते ही काम करना शुरू कर देती है और संक्रमित मरीज की बीमारी और लक्षण को बाहर आने से रोकती है. यह एंटीबॉडी 3 से 4 हफ्ते तक चल जाती है. तब तक मरीज ठीक हो जाता है. इस दवा के सेवन से मरीज को इलाज के लिए एडमिट होने की नौबत कम आती है. इससे मौत को भी कम करने में मदद मिलती है.

किसको मिलेगी ये कॉक्टेल ड्रग

65 साल से ऊपर के मरीजों में इस दवा का इस्तेमाल किया जाएगा. बुजुर्ग जो पहले से बीमार हैं, डायबिटीज है. लिवर या किडनी की बीमारी है. कैंसर के मरीज हैं. स्टेरॉयड पर हैं. ऐसे लोगों को यह दवा दी जा सकती है. इसके अलावा 55 साल तक के बीमार लोग जो हार्ट या सांस के मरीज हैं, उन्हें भी यह दवा दी जा सकती है. इस दवा से माइल्ड और मॉडरेट लक्षण वालों के साथ हाई रिस्क वाले मरीजों का इलाज हो सकेगा. दवा का इस्तेमाल बच्चों पर भी किया जा सकता है. यह दवा 12 साल या इससे अधिक उम्र और 40 किलो से अधिक वजन वाले कोरोना संक्रमित बच्चों के इलाज में इस्तेमाल हो सकेगी.



कोविड के नए मरीजों पर ज्यादा कारगर

बीमार होने पर जितनी जल्दी कॉकटेल ड्रग का इस्तेमाल किया जाता है, उतना अच्छा रिजल्ट आता है. स्टडी में यह 70 फीसदी तक कारगर पाई गई है. जानकारों का कहना है कि सिर्फ एक डोज में इससे इलाज संभव है. ओपीडी बेसिस पर मरीज को यह दवा दी जाती है. इस दवा को देने में 30 मिनट लगता है. उसके बाद मरीज को घर भेज दिया जाता है. मरीज का फॉलोअप किया जाता है. फ़िलहाल इसके एक डोज की कीमत 59,000 रुपये के तक़रीबन तय की गई है.

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