कैब के बिना कोरोना वैक्‍सीन भी हो जाएगी बेअसर, आखिर क्‍यों कह रहे हैं विशेषज्ञ

क्‍या है कैब जिसके बिना कोरोना वैक्‍सीन भी हो जाएगी बेअसर. (सांकेतिक तस्वीर)

विशेषज्ञों का मानना है कि जिस तरह हम कोरोना को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं उसी तरह वायरस भी अपना अस्तित्व बचाए रखने का प्रयास कर रहा है, इसलिए हर बार नये वेरिएंट के साथ हमला कर रहा है. अगर उसे संक्रमण के लिए लोग मिलते जाएं तो निश्चित रूप से वायरस के और नये वेरिएंट के सामने आने से इंकार नहीं किया जा सकता.

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    नई दिल्‍ली. पिछले डेढ साल से देश कोरोना (Corona) को लेकर जंग लड़ रहा है. पिछले साल कोरोना की तबाही के बाद इस बार दूसरी लहर (Second Wave) ने लोगों को तोड़कर रख दिया. हालांकि कोरोना को हराने के लिए हथियार के रूप में वैक्‍सीन भी आ गई इसके साथ ही आयुष विभाग (Ayush Department) की दो दवाओं को भी कोविड संक्रमण (Covid-19 Infection) के इलाज में सफल पाया गया है लेकिन अभी भी संक्रमण की चेन को तोड़ने में कोई ठोस सफलता नहीं मिली है.

    दूसरी लहर को देखें तो एक तरीके से बीते साल की अपेक्षा इस साल हम कोविड के खिलाफ अधिक तैयारी के साथ मैदान में हैं लेकिन कोरोना के ग्राफ या कोविड मीटर के पैटर्न को देखे तो पाएगें कि अधिकतर मोर्चो पर विफल वायरस मौका पड़ते ही हमारी लापरवाही का फायदा उठाता है, जिससे हम सामूहिक रूप से संक्रमण की चेन तोड़ने में नाकाम हो जाते हैं. यही वजह है कि आज कैब यानि कोविड अप्रोप्रियेट बिहेवियर (Covid Appropriate Behaviour) पर विशेष फोकस किया जा रहा है. यह कहना है चेयरपर्सन, सेंटर ऑफ सोशल मेडिसिन एंड कम्यूनिटी हेल्थ, जेएनयू के डॉ. राजीबदास गुप्त का.

    गुप्‍त कहते हैं कि कोरोना वायरस सिर्फ हमारी एक लापरवाही का इंतजार कर रहा होता है. इसलिए कोविड एप्रोप्रियेट बिहेवियर ही है जो इस समय लोगों को इस बीमारी से बचा सकता है. न केवल लोग खुद की सुरक्षा कर सकते हैं बल्कि इसके माध्‍यम से वायरस को फैलने से रोक सकते हैं.

    वे कहते हैं कि अब जबकि समस्या की जड़ को पहचाना जा चुका है तब भी हम उस पर ध्यान न देकर अपनी गलतियों को न सुधारे तो यह एक बड़ा ही गैर जिम्मेदराना व्यवहार होगा. एक बड़े समुदाय द्वारा कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन न करना वायरस को अपनी पैंठ जमाने का मौका देता है. विशेषज्ञ भी इस बात को स्वीकार करते हैं कि वायरस बहरूपिया है और चालाक भी, ऐसे में हमें उससे लड़ने के लिए दोगुना सतर्क रहना होगा. इसी साल मार्च महीने के पहले हफ्ते में नये वेरिएंट के कुछ मामले महाराष्ट्र में देखे गए और एक दो महीने में इसने पूरे देश को चपेट में ले लिया.

    क्‍या है कैब (What Is CAB)

    डॉ. गुप्‍त कहते हैं कि कैब का अर्थ है कोविड अप्रोप्रिएट बिहेवियर. यानि कि कोरोना के अनुरूप व्‍यवहार का पालन. कोरोना की दो लहरें पहली और दूसरी आने के बाद स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों की समझ में इतना आया है कि इसे रोकने का सिर्फ एक ही सटीक उपाय है और वह है कोरोना के नियमों का पालन करना. कैब में मास्‍क पहनने से लेकर, सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन करना, हाथों के साथ-साथ शारीरिक स्‍वच्‍छता पर ध्‍यान देना, बार बार साबुन से हाथ धोना, थोड़े बहुत लक्षणों के पता चलते ही खुद को क्‍वेरेंटीन करना और दूसरों को बचाना, किसी भी लापरवाही से बचना, वायरस के अनुरूप खुद को सुरक्षित रखने की भरसक कोशिश करना.

    कैब के बिना कोरोना का टीका भी हो जाएगा बेअसर

    डॉ. गुप्‍त कहते हैं कि म्यूटेंट वैरिएंट इतना शातिर निकला कि आरटीपीसीआर की जगह सीटी की जरूरत पड़ने लगी डेढ़ साल के लंबे समय में हमें वायरस के व्यवहार को समझने का पूरा मौका दिया है, जिसका तोड़ वैक्सीन और कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करने के अतिरिक्त और कुछ नहीं. अगर एक बड़ी आबादी टीका लगवा लेगी और कोविड अनुरूप व्यवहार का पालन करेगी तो वायरस को संक्रमित करने के लिए लोग ही नहीं मिलेंगे ऐसे में हम वायरस का अस्तित्व खत्म करने के लिए अधिक सटीक वार कर सकते हैं लेकिन अगर ऐसा नहीं किया गया तो टीके के असर को भी खत्‍म कर दिया जाएगा.

    कोरोना भी बचा रहा है अपना अस्तित्‍व

    बड़े बुजुर्गो ने कहा कि बीमारी को अधूरा नहीं छोड़ना चाहिए, यह दोबारा हमला करती है तो अधिक ताकतवर होकर हमला करती है. ध्यान रहे जिस तरह हम कोरोना को खत्म करने की कोशिश कर रहे हैं उसी तरह वायरस भी अपना अस्तित्व बचाए रखने का प्रयास कर रहा है, इसलिए हर बार नये वेरिएंट के साथ हमला कर रहा है. अगर उसे संक्रमण के लिए लोग मिलते जाएं तो निश्चित रूप से वायरस के और नये वेरिएंट के सामने आने से इंकार नहीं किया जा सकता.

    मानव शरीर उसे अपनी संख्या को बदलने या डीएनए में परिवर्तन करने का अनुकूल वातावरण देता है, फिर ऐसे वायरस को बढ़ने के लिए अपना शरीर क्यों दे? स्वास्थ्य सेवाओं के संसाधन चार गुना भी बढ़ा दिए जाएं, तब भी हमें कोविड अनुरूप व्यवहार ही संक्रमण से बचाएगा. इधर कुछ दिनों से लोग जागरूक हुए है, सैनिटाइजर और मास्क का प्रयोग कर रहे हैं, लेकिन कोरोना के केस में कमी आते ही व्यवहार में लापरवाही आ जाती है. इसे रोकना होगा, वायरस हमारी इसी लापरवाही की ताक में बैठा है, और हमें उसके हर मंसूबे फेल करना हैं.

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