क्‍या डायबिटिक और हर्ट पेशेंट कोविड मरीजों को प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकते हैं?

कोरोना से ठीक हो चुका एक इंसान अगर प्लाज्मा डोनेट करता है तो उससे दो लोगो का इलाज किया जा सकता है. (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना से ठीक हो चुका एक इंसान अगर प्लाज्मा डोनेट करता है तो उससे दो लोगो का इलाज किया जा सकता है. (सांकेतिक तस्वीर)

कोरोना संक्रमण के बाद ठीक होने वाला कोई भी स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकता है. इसके लिए जरूरी है कि उसे संक्रमण से ठीक हुए कम से कम 15 दिन या संक्रमित हुए 28 दिन हो गए हों. यह व्‍यक्ति पूरे 90 दिन के अंदर किसी को भी प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकता है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 25, 2021, 3:25 PM IST
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नई दिल्‍ली. देशभर में कोरोना के बढ़ते मामलों के साथ ही कोविड मरीजों को ठीक करने के लिए प्‍लाज्‍मा थेरेपी का चलन भी एकाएक बढ़ा है. कोरोना की दूसरी लहर में जबकि मरीजों में संक्रमण की रफ्तार काफी तेज है, मरीजों के गंभीर होने और ऑक्‍सीजन की कमी की समस्‍या भी सामने आ रही है.

इस दौरान ज्‍यादातर गंभीर मरीजों को इस बीमारी से बचाने के लिए प्‍लाज्‍मा थेरेपी काफी कारगर साबित हो रही है. कोरोना से ठीक हो चुके व्‍यक्ति का प्‍लाज्‍मा संक्रमित व्‍यक्ति को चढ़ाया जाता है ताकि उसके शरीर में भी बीमारी से लड़ने की क्षमता आ जाए. यही वजह है कि भारत में प्‍लाज्‍मा की मांग भी काफी बढ़ गई है.

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हालांकि प्‍लाज्‍मा को लेकर लोगों के मन में काफी सवाल उठ रहे हैं जिनका समय से जवाब मिलना भी जरूरी है. मसलन किस उम्र का व्‍यक्ति प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकता है. प्‍लाज्‍मा डोनेशन से शरीर पर क्‍या असर पड़ता है. या डायबिटिक और हर्ट पेशेंट भी प्‍लाज्मा डोनेट कर सकते हैं या नहीं. इन सवालों के जवाब न्‍यूज 18 हिंदी यहां दे रहा है.
क्‍या है प्‍लाज्मा  थेरेपी  (What is Plasma therapy) 

प्‍लाज्‍मा थेरेपी काफी लंबे समय से चल रही है. इस थेरेपी में किसी भी संक्रमण का शिकार होकर ठीक होने वाले व्‍यक्ति के खून में ही बनने वाले प्‍लाज्‍मा को दूसरे संक्रमित व्‍यक्ति को चढ़ाया जाता है. चूंकि प्‍लाज्‍मा में बीमारी से लड़ने की क्षमता रखने वाली एंटीबॉडीज होती हैं जो दूसरे के शरीर में पहुंचकर बीमारी से लड़ने में मदद करती हैं. यह हल्‍के पीले रंग का पदार्थ होता है. अपने शरीर से प्‍लाज्‍मा निकालकर दान करना ही प्‍लाज्‍मा डोनेशन कहलाता है.

कौन कर सकता है प्‍लाज्‍मा डोनेट (Who can donate Plasma)



फिलहाल कोरोना संक्रमण के बाद ठीक होने वाला कोई भी स्‍वस्‍थ व्‍यक्ति प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकता है. इसके लिए जरूरी है कि उसे संक्रमण से ठीक हुए कम से कम 15 दिन या संक्रमित हुए 28 दिन हो गए हों. यह व्‍यक्ति पूरे 90 दिन के अंदर किसी को भी प्‍लाज्‍मा डोनेट कर सकता है. प्‍लाज्‍मा डोनेट करने वालों की उम्र 18 से 60 साल होनी चाहिए. साथ ही उसका हीमोग्‍लोबिन 8 से ऊपर होना चाहिए. ब्‍लड ग्रुप के हिसाब से ही प्‍लाज्‍मा चढ़ाया जाता है.

क्‍या हर्ट और डायबिटिक पेशेंट कर सकते हैं (Can diabetic and heart patient donate plasma)

स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं और बच्‍चों को फीड कराने वाली महिलाओं सहित डायबिटिक और हर्ट संबंधी मरीज प्‍लाज्‍मा डोनेट नहीं कर सकते. इनके साथ ही कैंसर, लीवर, किडनी या ब्‍लड प्रेशर के मरीज भी प्‍लाज्‍मा डोनेट नहीं कर सकते हैं.
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