लाइव टीवी

Nirbhaya Case: दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज होने के बाद भी फांसी में हो रही देरी, जानें वजह

एहतेशाम खान | News18Hindi
Updated: January 20, 2020, 12:04 PM IST
Nirbhaya Case: दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज होने के बाद भी फांसी में हो रही देरी, जानें वजह
इस मामले में फांसी के सजा के ऐलान के बाद देश में हर्ष का माहौल था.

निर्भया रेप मामले (Nirbhaya Rape Case) के दोषियों को फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है. लेकिन कई कारणों से इसमें देरी की आशंका बनी हुई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 20, 2020, 12:04 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. निर्भया रेप मामले (Nirbhaya Rape Case) में  दोषियों को फांसी की सजा के ऐलान के बाद पूरे देश में यह संदेश गया था कि देर से सही लेकिन न्याय हुआ. लेकिन कई कारणों से फांसी की सजा पर अमल में देरी की आशंका बनी हुई है. निर्भया की मां आशा देवी दोषियों को फांसी से बचाने के प्रयास पर अपना गुस्सा भी निकाल चुकी हैं. आइए जानते हैं आखिर पूरे देश को झकझोरने वाली इस घटना में दोषियों की फांसी में क्यों देरी हो रही है.

सारे कानूनी विकल्प कर सकते हैं इस्तेमाल
इस मामले ने चार दोषी हैं. बताया जा रहा है कि जब तक सभी दोषी अपना पूरा कानूनी विकल्प इस्तेमाल ना कर लें तब तक फांसी नहीं होगी. यानी सभी की दया याचिका राष्ट्रपति से खारिज होने के बाद ही फांसी होगी.

दया याचिका खारिज होने के बाद भी है विकल्प

दया याचिका खारिज होने के बाद भी कई बार दोषी सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सकते हैं. जैसा कि याकूब मेमन के मामले में हुआ था. हालाकि उसकी परिस्थिति अलग थी और वैसा कुछ निर्भया मामले में नहीं दिख रहा है. फिलहाल सिर्फ मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज की है. अन्य तीन दोषियों ने अभी दया याचिका दाखिल ही नहीं की है.

निर्भया रेप केस, दिल्ली गैंग रेप केस, फांसी, दिल्ली, कानून, Nirbhaya Gang Rape Case, Delhi Gang Rape Case, Hanging, Delhi, Law
आरोपी अपना पूरा कानूनी विकल्प इस्तेमाल ना कर लें तब तक फांसी नहीं होगी.


SC ने 2 दोषियों की क्यूरेटिव पीटिशन की है खारिजइसके अलावा सुप्रीम कोर्ट ने क्यूरेटिव पीटिशन सिर्फ मुकेश और विनय की खारिज की है. दो अन्य दोषियों के पास अभी ये विकल्प बाकी है.

क्या चारों दोषियों को एक साथ ही होगी फांसी?
कानून के जानकार बताते हैं कि इस पर कोई कानून नहीं है. लेकिन इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का 1982 का एक फैसला है जो ये बताता है कि किसी भी मामले में अगर सभी दोषियों को एक ही जुर्म के लिए सजा दी गई है तो सभी को फांसी एक साथ होनी चाहिए. इस तरह के मामले में हरबंस सिंह बनाम उत्तर प्रदेश का फैसला बड़ा दिलचस्प है. तीन दोषियों को 1977 में चार लोगों की हत्या का दोषी पाया गया. ये मामला निचली अदालत से सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा. सभी दोषियों ने अलग अलग समय पर अपील दाखिल की. एक दोषी की फांसी की सजा बरकरार रही और उसे फांसी दे दी गई. दूसरा दोषी जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो अलग बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए उसके मौत की सजा को उम्र कैद में बदल दिया. तीसरा दोषी जब सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उसकी याचिका खारिज हो गई. बाद में राष्ट्रपति ने उसकी दया याचिका भी खारिज कर दी. ये दोषी फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो उसने कहा कि एक ही जुर्म के लिए तीन लोगों को अलग अलग सजा कैसे हो सकती है. एक दोषी को फांसी और एक को उम्र कैद.

निर्भया रेप केस, दिल्ली गैंग रेप केस, फांसी, दिल्ली, कानून, Nirbhaya Gang Rape Case, Delhi Gang Rape Case, Hanging, Delhi, Law
निर्भया की मां आशा देवी फांसी में देरी पर साफी नाराज हैं.


इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने मानी थी गलती
सुप्रीम कोर्ट ने माना की कहीं ना कहीं गलती हुई है. जिसको फांसी दे दी गई वह वापस नहीं आ सकता है. इसलिए फांसी के मामले में फूंक फूंक पर कदम रखने की जरूरत है. हरबंस सिंह के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कोई फैसला नहीं दिया लेकिन राष्ट्रपति से आग्रह किया कि हरबंस की दया याचिका पर फिर से विचार किया जाए. इसलिए तब से एक ही जुर्म में सजा पाए सभी व्यक्तियों को तब तक फांसी नहीं दी जाती जब तक सभी का कानूनी विकल्प ख़त्म ना हो गया हो और सबको एक साथ फांसी दी जाती है.

ये भी पढ़ें: 

निर्भया के दोषी पवन की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज, बताया घटना के वक्त था नाबालिग

LIVE: कुछ देर में अध्यक्ष के लिए नामांकन भरेंगे नड्डा, BJP ऑफिस पहुंचे शाह

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: January 20, 2020, 11:29 AM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर