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Explainer: जानिए क्यों इस बार दिल्ली को ज्यादा नहीं झेलना पड़ेगा वायु प्रदूषण?

Explainer: जानिए क्यों इस बार दिल्ली को ज्यादा नहीं झेलना पड़ेगा वायु प्रदूषण?

दिल्‍ली पर इस बार प्रदूषण की मार कम पड़ेगी.

दिल्‍ली पर इस बार प्रदूषण की मार कम पड़ेगी.

Delhi-NCR Air Quality : राजधानी दिल्‍ली के लोगों को इस बार वायु प्रदूषण की मार ज्‍यादा नहीं झेलनी पड़ेगी, क्‍योंकि पंजाब, हरियाणा और उत्‍तर प्रदेश समेत पड़ोसी राज्‍यों में पराली जलाने की घटनाओं में काफी कमी देखने को मिल रही है. वहीं, इस साल दिल्ली की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में भी काफी सुधार हुआ है, जो कि बारिश की वजह से और बेहतर स्थिति में पहुंच सकती है.

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    चंडीगढ़/ नई दिल्ली. देश की राजधानी दिल्ली को इस बार वायु प्रदूषण के लिए पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश (Punjab, Haryana and Uttar Pradesh) को ज्यादा नहीं कोसना पड़ेगा, क्‍योंकि इस बार इन राज्यों में पराली जलने (Stubble Burning) की घटनाओं में काफी कमी दर्ज की गई है. वहीं, दिल्ली की वायु गुणवत्ता (Air Quality) में भी काफी सुधार हुआ है. हालांकि पिछले कई साल के मुकाबले आजकल के दिनों में दिल्ली में आसमान काला ही रहता था, लेकिन अब अच्छी वायु गुणवत्ता के चलते आसमान भी अपना रंग दिखाने लगा है.

    वहीं, फिलहाल जारी बारिश के बाद हवा के और भी स्वच्छ होने की संभावना है. मिंट न्यूज पेपर में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 8 एनसीआर जिलों में पराली जलाने की घटनाओं में इस साल काफी कमी आई है. पिछले एक महीने में केवल 1795 आग की घटनाओं की सूचना मिली है. जबकि 2020 के दौरान इसी अवधि में 4854 मामले दर्ज किए गए थे. हाल ही में इस बारे में संबंधित विभागों ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को सूचित किया है.

    इसके अलावा मंत्रालय ने कहा कि 14 अक्टूबर 2021 तक पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के 8 एनसीआर जिलों में पराली जलाने की इन 1795 घटनाओं में से 663 क्षेत्रों का निरीक्षण प्रवर्तन एजेंसियों और संबंधित राज्यों के संबंधित अधिकारियों द्वारा किया गया है. 252 मामलों में पर्यावरण मुआवजा (ईसी) लगाया गया है. एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) इन क्षेत्रों में 15 सितंबर 2021 से धान के अवशेष जलाने की घटनाओं की सक्रिय रूप से निगरानी कर रहा है.

    पंजाब में पराली जलाने के मामलों में 69.49 प्रतिशत गिरावट
    केंद्रीय वायु गुणवत्ता आयोग के लिए इसरो द्वारा तैयार किए गए प्रोटोकॉल के आधार पर बनी रिपोर्ट के अनुसार, धान के अवशेष जलाने की घटनाओं में पिछले वर्ष की इसी अवधि की तुलना में एक महीने की अवधि के दौरान पंजाब में 69.49 प्रतिशत, हरियाणा में 18.28 प्रतिशत और उत्तर प्रदेश के आठ एनसीआर जिलों में 47.61 प्रतिशत की गिरावट आई है. वहीं, मंत्रालय ने कहा कि चालू वर्ष की एक महीने की अवधि के दौरान पंजाब में कुल अवशेष जलाने की घटनाएं पिछले वर्ष की समान अवधि के 4216 के मुकाबले 1286 हैं. इसी तरह हरियाणा के संबंध में पिछले वर्ष 596 की तुलना में 487 आग की घटनाएं दर्ज की गई हैं. उत्तर प्रदेश के 8 एनसीआर जिलों में इस अवधि के दौरान दर्ज की गई कुल पराली की घटनाओं की संख्या पिछले वर्ष की इसी अवधि के 42 के मुकाबले 22 हैं. वहीं, रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली और राजस्थान के दो एनसीआर जिलों से पराली जलाने की कोई घटना नहीं हुई है.

    पंजाब और हरियाणा में हैं ये हॉटस्‍पॉट
    मंत्रालय के बयान के अनुसार पहली बार धान के अवशेष जलाने की सूचना 16 सितंबर को पंजाब से, 28 सितंबर को हरियाणा से और 18 सितंबर को उत्तर प्रदेश के एनसीआर क्षेत्र से प्राप्त हुई थी. पंजाब में धान के अवशेष जलाने के प्रमुख हॉटस्पॉट अमृतसर, तरनतारण, पटियाला और लुधियाना हैं. मंत्रालय ने कहा कि इन चार जिलों में 72 फीसदी पराली जलाने की घटनाएं होती हैं. इसी तरह हरियाणा में, करनाल, कैथल और कुरुक्षेत्र प्रमुख पराली जलाने वाले हॉटस्पॉट हैं. इन 3 जिलों में पराली जलाने की 80 प्रतिशत घटनाएं होती हैं.

    सीएक्यूएम ने एक बयान में कहा कि अगले कुछ हफ्तों में फसल कटाई अपने चरम पर होगी और राज्य सरकारें पराली जलाने की समस्या से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए प्रवर्तन और कार्यान्वयन की प्रभावशीलता में सुधार के लिए कार्य योजना के अनुसार कदम उठा रही हैं. सीएक्यूएम पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश की राज्य सरकारों के साथ दैनिक आधार पर बातचीत कर रहा है, ताकि पराली जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए कार्य योजना और रूपरेखा के सख्त कार्यान्वयन को सुनिश्चित किया जा सके. पैनल ने इन राज्यों में जिला कलेक्टरों और जिलाधिकारियों सहित राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ कई बैठकें की हैं.

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