ट्रेनों में बनाए गए कोविड कोचों का नहीं हुआ इस्‍तेमाल, विशेषज्ञ बोले आगे भी नहीं होगा

भारतीय रेल के बनाए कोविड आइसोलशन कोच में से सिर्फ 20 फीसदी का ही हुआ कोरोना मरीजों के लिए इस्‍तेमाल.
भारतीय रेल के बनाए कोविड आइसोलशन कोच में से सिर्फ 20 फीसदी का ही हुआ कोरोना मरीजों के लिए इस्‍तेमाल.

ट्रेन के कोच को कोविड आइसोलेशन यूनिट (Covid isolation unit) बनाने में काफी पैसा खर्च हुआ है. एक कोच पर अनुमानित दो लाख रुपये खर्च हुए हैं. जिससे इन कोचों में शौचालय, आइसोलेशन बैड, मेडिकल स्‍टाफ और मेडिकल जरूरतों को पूरा करने वाले उपकरणों, सुरक्षा उपकरणों, मरीजों के लिए कपड़े और भोजन की सुविधा की गई थी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 26, 2020, 4:50 PM IST
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नई दिल्‍ली. भारत में कोरोना के बढ़ते प्रकोप को देखते हुए ट्रेनों में बनाए गए आइसोलशन कोच अभी तक सफेद हाथी साबित हो रहे हैं. इस प्रोजेक्‍ट पर केंद्रीय कोविड देखभाल कोष से भारी भरकम बजट आवंटित करके कोविड कोच तो बना दिए गए लेकिन उनका इस्‍तेमाल 20 फीसदी भी नहीं हुआ है. ट्रेन के 5231 सवारी डिब्‍बों को आइसोलेशन यूनिट में तब्‍दील किया गया था और इनमें सभी जरूरी सुविधाओं के होने के साथ ही आपात स्थिति में उपयोगी होने की भी बात कही गई थी.

रेल मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना के मामलों और देश में स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं को देखते हुए शुरुआत में ही ट्रेनों के कोचों में कोविड केयर यूनिट तैयार किए गए थे. ताकि किसी भी आपात स्थिति में इनका इस्‍तेमाल किया जा सके. हालांकि अभी तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में रोजाना करीब एक लाख मामले आने के बाद भी इन डिब्‍बों ढंग से इस्‍तेमाल नहीं हुआ है और न ही अब राज्‍य सरकारें इन कोचों की मांग कर रही हैं.

आंकड़ों के अनुसार केंद्र सरकार ने कुल 5231 गैर वातानुकूलित सवारी डिब्‍बों को अस्‍थाई रूप से कोविड 19 आइसोलेशन यूनिट के रूप में तैयार किया था. जिसका मकसद भारत में कोरोना के मामले बढ़ने के दौरान इनका इस्‍तेमाल आइसोलेशन के लिए करना था. हालांकि छह महीने बीतने के बाद राज्य सरकारों की ओर से मांगने पर इनमें से सिर्फ 813 डिब्‍बे ही मुहैया कराए गए हैं. बाकी बचे हुए 4418 डिब्‍बे अभी उसी अवस्‍था में आइसोलेशन यूनिट के रूप में तैयार रखे हुए हैं. इनका अभी तक कोई उपयोग नहीं हुआ है.



इस संबंध में सरकार की ओर से कहा गया है कि इन डिब्‍बों की जरूरत पूरी होने के बाद इन्‍हें वापस यात्री सेवा में लगाया जाएगा लेकिन अभी कोरोना के डर के चलते इन्‍हें ऐसे ही रखा गया है.

विशेषज्ञ बोले अब तक नहीं हुआ तो आगे भी नहीं होगा इन डिब्‍बों का इस्‍तेमाल

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