हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान रो पड़ा वकील, जज बोले- अस्पताल में बेड ही नहीं तो हम भी क्या करें

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार को कोरोना संकट के दौरान सेना की मदद लेने पर विचार करना चाहिए. (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि दिल्ली सरकार को कोरोना संकट के दौरान सेना की मदद लेने पर विचार करना चाहिए. (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट में बहस के दौरान एक वकील के आंख में आंसू आ गए. उन्होंने कहा कि मेरे रिश्तेदार और भतीजी रोज कहती हैं कि उनके पापा को अस्पताल में बेड चाहिए, लेकिन हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं. इस कोर्ट ने उन्हें आश्वस्त करते हुए कहा कि इसी दिशा में काम हो रहा है.

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  • Last Updated: April 28, 2021, 10:28 PM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली हाई कोर्ट में बहस के दौरान एक वकील के आंख में आंसू आ गए और वह कहने लगे कि मेरे रिश्तेदार और मेरी भतीजी रोज मुझसे कहती है कि उनके पापा को अस्पताल में बिस्तर चाहिए, लेकिन हम कुछ नहीं कर पा रहे हैं. इस पर दिल्ली हाईकोर्ट ने वकील से कहा कि हम उसी दिशा में काम कर रहे हैं और उम्मीद है कि आपके रिश्तेदार को बेड मिल जाए. हालांकि कोरोना मामले पर सुनवाई के दौरान HC ने भी अपनी बेबसी जाहिर की.

एक वकील ने अपने रिश्तेदार की हालत के बारे में जब कोर्ट बताया और जल्द से जल्द आईसीयू बेड की मांग की तो कोर्ट ने कहा कि हम भी फिलहाल सांत्वना ही दे सकते हैं. अगर अस्पताल में आईसीयू बेड ही नहीं है तो हम भी क्या करें?

वहीं, एक अन्य मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा कि क्या बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने जिन दवाओं को बांटने की बात कर रहे हैं, उसके लिए डॉक्टरों की सलाह ली गई है. यह कैसे संभव है कि एक व्यक्ति पहले इतनी बड़ी मात्रा में कोरोना की दवा खरीदे और उसका वितरण करे. जजों की बेंच ने हैरानी जताते हुए कहा कि अदालत को उम्मीद थी कि यह बंद हो गया होगा, लेकिन ऐसा हो रहा है.

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आपको बता दें कि बीजेपी सांसद गौतम गंभीर ने ऐलान किया था कि वह अपने संसदीय क्षेत्र के लोगों को कोरोना की दवाएं और ऑक्सीजन सिलेंडर मुफ्त में बांटेंगे. उन्होंने कहा था कि कोई भी जरूरतमंद उनके दफ्तर 22 पूसा रोड और सांसद कार्यालय जागृति एन्क्लेव पर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच ये दवाएं ले सकता है. इसके लिए डॉक्टर की पर्ची और आधार कार्ड दिखाना होगा.

दरअसल, दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा ने हाईकोर्ट में कहा कि भाजपा नेता गौतम गंभीर ईस्ट दिल्ली में फैबीफ्लू मुफ्त में बांट रहे हैं. सवाल उठाया गया कि जब ये दवाइयां रेगुलेटिड नहीं हैं तो कैसे कोई ऐसा कर सकता है. किसी को तो जरूरी दवाएं नहीं मिल रही है, कोई मुफ्त में बांट रहा है. भले ही उसने सही काम किया लेकिन क्या यह तरीका सही है.
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