तीस हजारी कोर्ट हिंसा मामला: ज्यूडिशियल कमीशन को जांच पूरी करने के लिए 31 दिसंबर तक मिली मोहलत
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तीस हजारी कोर्ट हिंसा मामला: ज्यूडिशियल कमीशन को जांच पूरी करने के लिए 31 दिसंबर तक मिली मोहलत
दिल्ली हाई कोर्ट ने डॉक्टरों की कमिटी बनाने को कहा. (फाइल फोटो)

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प (Lawyers Police Clash) मामले में जांच पैनल का वक्त बढ़ा दिया है.

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नई दिल्ली. दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने तीस हजारी कोर्ट में पुलिस और वकीलों के बीच हुई हिंसक झड़प (Lawyers Police Clash) मामले में जांच पैनल का वक्त बढ़ा दिया है. इस मामले में गठित ज्यूडिशियल कमीशन (Judicial Commission) की मांग पर कोर्ट ने जांच पूरी करने के लिए 31 दिसंबर तक का वक्त दिया है. इस मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट ने एक ज्यूडिशियल कमीशन को गठित किया था.

चीफ जस्टिस डीएन पटेल और जस्टिस प्रतीक जलान की बेंच ने सुनवाई करते हुए ज्यूडिशियल कमीशन को जांच करने के लिए और समय दिया है. ज्यूडिशियल कमीशन के रिटायर्ड जस्टिस एस पी गर्ग के तरफ से हाईकोर्ट में रिपोर्ट दायर की गई जिसमें कहा गया कि लॉकडाउन की वजह से जांच पूरी नहीं हो पाई. लिहाजा और समय दिया जाए. रिपोर्ट में ये भी कहा गया है कि अभी तक 124 गवाहों से पूछताछ हो चुकी है लेकिन आगे और भी करना है.

ये है पूरा मामला
गौरतलब है कि बीते 2 नवंबर 2019 को पुलिस और वकीलों के बीच तीस हजारी कोर्ट परिसर में पार्किंग को लेकर झड़प हुई थी, जिसमें पुलिस के 20 जवान समेत कई वकील घायल हुए थे. पुलिस और वकील दोनों तरफ से एफआईआर दर्ज हुई थी. हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में आरोपी वकील और आरोपी पुलिस के जवानों की गिरफ्तारी पर तब तक रोक लगा दी थी जब तक ज्यूडिशियल कमीशन मामले में जांच नहीं कर लेती.
तीस हजारी अदालत परिसर (Violence in Tis Hazari Court Premises) में वकीलों और दिल्ली पुलिस (Delhi Police) के बीच हुई झड़प में सबसे पहले एक पुलिस की बाइक को आग के हवाले करने वाली महिला वकील की पहचान पुलिस ने कर ली, लेकिन उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा सकती है. अधिकारियों ने बताया कि दिल्ली उच्च न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया था कि दो नवम्बर को हुई हिंसा के मामले में किसी भी वकील के खिलाफ कोई ‘दंडात्मक कार्रवाई’ नहीं की जा सकती. इस मामले में पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर सकती क्योंकि मामले की न्यायिक जांच लंबित है. अपराध शाखा ने कई सीसीटीवी फुटेज की जांच करने के बाद वकील की पहचान की है.



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