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IGI Airport पर लड़की के बैग में मिला जिंदा कारतूस, दिल्‍ली हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

IGI Airport पर लड़की के बैग में मिला जिंदा कारतूस, दिल्‍ली हाईकोर्ट ने रद्द की FIR

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कोंं से सहमत होते हुए दर्ज एफआईआर रद्द करने के आदेश दिए. (फाइल फोटो)

दिल्‍ली हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता के तर्कोंं से सहमत होते हुए दर्ज एफआईआर रद्द करने के आदेश दिए. (फाइल फोटो)

दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) पुलिस थाने में 5 फरवरी 2012 को आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25 के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बताया गया कि आरोपी लड़की के सामान से एक जीवित कारतूस मिला. आरोपी लड़की दिल्ली से गोवा की यात्रा कर रही थी और IGI हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 के चौथे स्तर के चेकिंग पॉइंट पर जांच में यह जिंदा कारतूस पाया गया.

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    नई दिल्‍ली : आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) पर बैग सामान के साथ जिंदा कारतूस के साथ पकड़ी गई एक लड़की के खिलाफ दर्ज एफआईआर को दिल्‍ली हाईकोर्ट (Delhi High Court) ने रद्द करने के आदेश दिए हैं. आरोपी लड़की की तरफ से तर्क दिया गया कि उसके पास जो जिंदा कारतूस था, वह गलती और अनजाने में उस बैग के अंदर छोड़ दिया गया था, जो उसके पिता का है, जिनके पास लाइसेंसी रिवॉल्वर है. वहीं, उस दौरान उसके पास कोई बंदूक भी नहीं थी, इसलिए उसका कोई आपराधिक इरादा नहीं था. अदालत ने तर्क पर सहमति जताते हुए इस बाबत दर्ज एफआईआर रद्द करने के आदेश दिए.

    दरअसल, दिल्ली पुलिस (Delhi Police) ने आईजीआई एयरपोर्ट (IGI Airport) पुलिस थाने में 5 फरवरी 2012 को आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25 के तहत एक एफआईआर दर्ज की थी, जिसमें बताया गया कि आरोपी लड़की के सामान से एक जीवित कारतूस मिला. आरोपी लड़की दिल्ली से गोवा की यात्रा कर रही थी और IGI हवाई अड्डे के टर्मिनल 3 के चौथे स्तर के चेकिंग पॉइंट पर जांच में यह जिंदा कारतूस पाया गया.

    चैकिंग के वक्‍त लड़की उसे कारतूस ले जाने की अनुमति देने वाले कोई दस्तावेज पेश करने को कहा गया तो वह विफल रही, जिसके बाद उसके खिलाफ उसी दिन आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन में आर्म्स एक्ट, 1959 की धारा 25 के तहत एफआईआर दर्ज की गई.

    इस बाबत लड़की ने प्राथमिकी को रद्द करने के लिए दिल्‍ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए रिट याचिका दायर की. वकील अमित साहनी के मार्फत दाखिल अर्जी में कहा गया कि याचिकाकर्ता के पिता के पास 32 बोर की रिवॉल्वर संख्या FG 9010 है, जिसकी लाइसेंस संख्या है 684/12/एसएसए है. इसे उन्होंने 2001 में खरीदा था. अमित साहनी ने बताया कि याचिकाकर्ता अपने पिता कुलदीप सिंह के बैग को यात्रा के उद्देश्य से ले जा रही थी, जिसके अंदर याचिकाकर्ता के पिता की बंदू का एक जिंदा कारतूस अनजाने में छूट गया था और इसकी जानकारी उसे नहीं थी.

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    याचिकाकर्ता के पिता ने बाद में आईजीआई एयरपोर्ट पुलिस स्टेशन के समक्ष लाइसेंसी गोला-बारूद के सभी प्रासंगिक दस्तावेज पेश किए और एफआईआर संख्या 0038 को रद्द करने का अनुरोध किया, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.

    याचिकाकर्ता के वकील अमित साहनी ने अर्जी में कहा कि उनकी मुवक्किल के पास वह जिंदा कारतूस गलती से बैग में चला गया. इसके अलावा कारतूस को प्रोजेक्ट करने के लिए उसके पास कोई भी बन्दूक नहीं थी, जिससे पता चलता है कि उसका कारतूस रखने का कोई आपराधिक इरादा नहीं था और इस प्रकार उक्‍त शस्त्र अधिनियम की धारा 25 के दायरे में नहीं आता और इस तरह उस पर मुकदमा नहीं चलाया जा सकता.

    न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने वकील अमित साहनी के तर्कों से सहमति व्यक्त की कि इस न्यायालय के कई अन्य आदेश हैं, जिसमें इस न्यायालय ने प्राथमिकी को इस आधार पर रद्द कर दिया था कि आरोपी को अपने पास गोला-बारुद होने की जानकारी नहीं थी, इसलिए उस पर आर्म्स एक्ट की धारा 25 के तहत अपराध के लिए मुकदमा नहीं चलाया जा सकता है.

    Tags: Delhi police, IGI airport

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