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निर्भया के गुनहगार: त्वरित टिप्पणी; कोरोना के चार वायरस खत्म
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News18India
Updated: March 20, 2020, 8:02 AM IST
निर्भया के गुनहगार: त्वरित टिप्पणी; कोरोना के चार वायरस खत्म
निर्भया के दोषियों को तिहाड़ जेल में एक साथ दी गई फांसी.

20 मार्च की यह सुबह कुछ अलग थी. तिहाड़ के बाहर आसपास और दूर-दूर के कई सारे लोग मौजूद थे. मेले जैसी भीड़. सबका कहना था कि हम निर्भया की मां को सपोर्ट करने आए हैं. सब कह रहे थे आज हमें इंसाफ मिला. स्त्रियों के खिलाफ खड़े चार कोरोना वायरस मारे गए.

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  • Last Updated: March 20, 2020, 8:02 AM IST
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आजादी के बाद के भारत के इतिहास में 20 मार्च 2020 शायद इकलौता ऐसा दिन है, जब तिहाड़ जेल में एक साथ चार गुनहगारों को फांसी पर लटका दिया गया. इससे पहले चार मुजरिमों को एक साथ फांसी दिए जाने की कोई तारीख मेरे जानते में नहीं. तिहाड़ की जेल नंबर 3 की फांसी कोठी में सुबह 5:30 बजे निर्भया (Nirbhaya gangrape case) के चारों मुजरिमों को फंदे पर लटकाया गया.

फिलहाल देश में कोरोना वायरस (coronavirus) का संकट चल रहा है. लोग घरों में कैद हैं. प्रधानमंत्री जनता कर्फ्यू की अपील कर चुके हैं. लेकिन 20 मार्च की यह सुबह कुछ अलग थी. तिहाड़ के बाहर आसपास और दूर-दूर के कई सारे लोग मौजूद थे. मेले जैसी भीड़. सबका कहना था कि हम निर्भया की मां को सपोर्ट करने आए हैं. यहां मौजूद लड़कियों और महिलाओं के चेहरे पर न रात का खौफ दिख रहा था, न कोरोना का भय. उनके चेहरे पर बस संतोष की झलक थी. खुशी इठला रही थी. सब कह रहे थे आज हमें इंसाफ मिला. स्त्रियों के खिलाफ खड़े चार कोरोना वायरस मारे गए.

सच है कि 7 साल पहले पवन, अक्षय, मुकेश और विनय ने जिस अमानवीय और घृणित तरीके से निर्भया की हत्या की थी, उनके अपराध को किसी भी रूप में माफ नहीं किया जा सकता. उनके लिए सिर्फ एक ही सजा हो सकती थी, जो उन्हें मिली- मौत.




पर इस मौत के बाद कुछ सवाल बचे रह जाते हैं. पहला सवाल अपने समाज से और अपने घर से हमें करना होगा. अब तक हम अपने घरों में मर्दों से बचाव की जो गुपचुप शिक्षा बच्चियों को देते हैं, उससे ज्यादा जरूरी है कि हम अपने घरों में बच्चों, मर्दों और बूढ़ों पर ध्यान रखें और उन्हें ट्रेंड करें कि कैसे स्त्रियों का सम्मान किया जाता है और कैसे उन्हें बराबरी पर रखा जाता है, कमतर नहीं आंका जाता है. जाहिर है इससे स्त्रियों के साथ होने वाले अपराध में कमी तो आएगी.



यह बात अजीब लग सकती है पर यह तय है कि कोई भी समाज अपराधमुक्त नहीं हो सकता. अपराध में कमी लाई जा सकती है. अपराध होने पर न्यायालय से उन्हें सजा तुरंत दिलवाई जा सकती है, पर इसके लिए पुलिस प्रशासन को भी सजग और ईमानदार होना होगा. न्यायालयों में जजों की कमियां दूर करनी होगी, ताकि केसों का निबटारा जल्द हो सके.

निर्भया मामले में फैसला आने में लगातार हो रही देरी का ही साइड इफेक्ट था हैदराबाद एनकाउंटर. अगर न्याय व्यवस्था से लोगों की आस्था दरकने लगती है तो पुलिस प्रशासन का भी धैर्य चूक जाता है. अब जरा सोचिए कि आम आदमी अपना धैर्य कैसे बनाए रख सकेगा.


यह बहुत गंभीर वक्त है यह सोचने के लिए कि कैसे हम अपनी व्यवस्थाएं इतनी मजबूत करें कि न्याय मिलने में देर न हो. कोई निर्भया की मां इंसाफ के लिए 7 साल तक अदालतों का चक्कर न काटती फिरे. अव्वल हम अपने समाज में इतनी जागृति तो लाने की कोशिश करें कि एक-दूसरे का सम्मान कैसे किया जाता है. इसकी शुरुआत हमें अपने घरों से ही करनी होगी. अपनी बच्चियों को ट्रेंड करने की बजाये, बच्चों को ट्रेंड करने की जरूरत है.

डिस्क्लेमरः ये लेखक के निजी विचार हैं.

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First published: March 20, 2020, 8:00 AM IST
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