अपना शहर चुनें

States

भारत में गधों की आबादी में 62% गिरावट, NGO ने जाहिर की चिंता

पशुधन जनगणना 2019 के आंकड़ों के मुताबिक गधों की संख्या में तो 62 फीसदी की गिरावट आई है
पशुधन जनगणना 2019 के आंकड़ों के मुताबिक गधों की संख्या में तो 62 फीसदी की गिरावट आई है

पशुधन जनगणना 2019 (livestock Census 2019) के आंकड़ों के मुताबिक अश्वों (Horses) की प्रजाति के आंकड़ों में काफी गिरावट आई है. खासकर गधों (Donkeys) की प्रजाति में तो 62% गिरावट दर्ज की गई है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 18, 2019, 10:12 PM IST
  • Share this:
गाजियाबाद. देश में गधों, घोड़ों और खच्चरों की संख्या में भारी कमी दर्ज की गई है. पशुधन जनगणना 2019 के आंकड़ों के मुताबिक, गधों की संख्या में तो 62 फीसदी की गिरावट आई है. घोड़ों, गधों और खच्चरों पर काम करने वाली संस्था ब्रूक इंडिया का कहना है कि इन आंकड़ों को अब गंभीरता से लेने का समय आ गया है. दिल्ली से सटे उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद में मीडिया संवेदीकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया. इस कार्यशाला में समाज के वंचित गरीब स्तर के अश्व, गधा और खच्चर पालकों के विकास और कल्याण से संबंधित समस्यायों से मीडिया को अवगत कराया गया.

देश में गधों की संख्या में 62 प्रतिशत की कमी
एनजीओ ने मीडिया का ध्यान हाल ही में जारी किए गए पशुधन जनगणना 2019 के आंकड़ों की ओर आकर्षित किया. इस जनगणना में अश्वों की प्रजाति के आंकड़ों में काफी गिरावट आई है. खासकर गधों की प्रजाति में तो और गिरावट दर्ज की गई है. सेमिनार में आए वक्ताओं ने गधों की आबादी में 62% की गिरावट को एक गंभीर चिंता का विषय माना. वक्ताओं ने चीन में परमपरागत औषधि ‘एजियाओ’ उत्पादन में इस्तेमाल हो रहे गधों की खाल की बड़ी मांग पर ध्यान दिलाया. इस भयावह मांग ने विश्व के गधों का एक बड़ा हिस्सा समाप्त कर दिया है. वक्ताओं ने भारतीय संदर्भ मे यह महसूस किया कि इस स्थिति में जांच की आवशकता है.

इस सेमिनार को संबोधित करते हुए कंट्री डायरेक्टर ब्रिगेडियर ज्योतिकुमार धर्माधीरण ने कहा, "कामकाजी अश्वों का अर्थव्यवस्था में योगदान को आमतौर पर समान्य समझा जाता है और वो खबरों का हिस्सा भी नहीं बनते. हालांकि, देश की 90% अश्व प्रजाति की आबादी इन्हीं कामकाजी अश्वों की है और यह अश्व समाज के एक निचले स्तर की आजीविका का मुख्य एवं महत्त्वपूर्ण स्त्रोत है. पशुपालन नीतियां आम तौर पर उत्पादन पशुधन के पक्ष में तैयार की जाती हैं. अक्सर कामकाजी अश्व, पशुधन नीतिगत चर्चाओं में पीछे रह जाते हैं."
अर्थव्यवस्था में योगदान को कमतर आंका जाता है


इस सेमिनार में प्रतिभागियों को पशु कल्याण की पांच मुक्तियों वाले ढांचे (Five Freedom Framework) के बारे में जानकारी दी, और पशु चिकित्सा सेवा प्रावधान प्रक्रिया जैसे स्वीकार्य, सुलभ, उपलब्ध, सस्ती, गुणवत्ता (AAAQ Framework) और स्थानीय पशु स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की क्षमता निर्माण करवाने के बारे में जानकारी दी. सेमिनार में ग्ल्ण्डेर्स जैसी घातक (zoonotic) बीमारी के बारे में भी बताया गया.

ये भी पढ़ें: 

निर्भया के दोषियों के खिलाफ अभी जारी नहीं होगा डेथ वारंट, 7 जनवरी तक टाली सुनवाई
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज