Lockdown: देश में चौंकाने वाले हैं मॉब लिंचिंग के ये आंकड़े

 (प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)
(प्रतीकात्‍मक तस्‍वीर)

आंकड़े बताते हैं कि भीड़ ने न हिंदू को छोड़ा और न मुस्लिम को. लिंचिंग (Mob Lynchig) की बढ़ती घटनाओं पर जून 2019 में पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) को भी राज्यसभा में बोलना पड़ा था.

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  • Last Updated: April 21, 2020, 11:26 AM IST
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नई दिल्ली. लॉकडाउन (Lockdown) के दौरान महाराष्ट्र के पालघर (Palghar) की घटना सबके सामने है. सितम्बर 2015 से शुरु हुई लिंचिंग से मौत का आंकड़ा 145 पर पहुंच गया है. लेकिन यह आंकड़ा भी खासा चौंकाने वाला है. लिंचिंग के शिकार हुए लोगों में 71 मुस्लिम हैं. बाकी हिंदू. लिंचिंग पीड़ित परिवार के बच्चों को शिक्षा देने वाले स्टेप्स फाउंडेशन ने यह आंकड़े जारी किए हैं. आंकड़े बताते हैं कि भीड़ ने न हिंदू को छोड़ा और न मुस्लिम को. मॉब लिंचिंग (Mob Lynchig) की बढ़ती घटनाओं पर जून 2019 में पीएम नरेन्द्र मोदी (PM Narendra Modi) को भी राज्यसभा में बोलना पड़ा था.

सबसे ज़्यादा लिंचिंग की घटनाएं झारखंड में  

-17 मार्च 2016: मोहम्मद मजलूम, इनायतउल्ला खान की हत्या



-18 मई 2017: शेख शिराज को भीड़ ने मारा
-27 जून 2017: उस्मान अंसारी मारे गए

-29 जून 2017: असगर अली की हत्या

-9 सितम्बर 2018: भीड़ ने मोहन राय को मारा

-17 जून 2019: भीड़ ने तबरेज़ अंसारी को मारा

नोट- झारखण्ड में जून 2019 तक 19 घटनाएं हो चुकी हैं. 12 मुस्लिम थे.

गुजरात-राजस्थान में बराबरी पर लिंचिंग का आंकड़ा  

भीड़ द्वारा पीटकर हत्या करने की घटनाओं में गुजरात और राजस्थान बहुत आगे हैं. बेशक इसकी शुरुआत यूपी के दादरी से हुई थी. लेकिन भीड़ के हाथों अब तक सबसे ज्यादा 15-15 मौतें गुजरात और राजस्थान में हुई हैं. गुजरात के ऊना में तो 30 जून, 2016 को भीड़ ने एक साथ 5 गैरमुस्लिमों की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. इसके बाद 25 सितम्बर 2016 में बनासकांठा में संगीता और नीलेश की भीड़ ने हत्या कर दी थी.

राजस्थान की बात करें तो एक अप्रैल 2017 को अलवर में पहलू खान और इरशाद खान को भीड़ ने घेर कर मार डाला था. उसके बाद 12 जून, 2017 को बाड़मेर में दो गैरमुस्लिमों की भीड़ ने हत्या कर दी थी. भीड़ यूपी में 13, असम में 11 और महाराष्ट्र में 10 हत्याएं कर चुकी है.

मॉब लिंचिंग से हुई मौत की कुछ चर्चित घटनाएं

-28 सितम्बर 2015 को यूपी के दादरी में मोहम्मद अखलाक की मौत से मॉब लिंचिंग शुरु हुई थी.

-सात जून 2019 को जमना टाटी और अजय टाटी नामक दो हिंदुओं की असम में भीड़ ने हत्या कर दी.

-नवंबर 2017 को दिल्ली-शामली के बीच ट्रेन में भी भीड़ ने की थीं चार हत्याएं.

-जम्मू-कश्मीर में भी भीड़ ने 8 हत्याएं की हैं.

-राजधानी दिल्ली में भी ऐसी 2 हत्याएं हुई हैं.

क्या कहते हैं एक्सपर्ट

यूपी के पूर्व डीजीपी विक्रम सिंह कहते हैं “अगर इस तरह की हत्याओं को रोकना है तो कड़ा संदेश देने के साथ ही कड़ी कार्रवाई भी करनी होगी. सबसे पहले तो इस तरह की घटनाओं पर हिंदू-मुस्लिम करने वाले को भी सजा दीजिए. इसके बाद सभी मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ले जाइए. 30 दिन में इसके खिलाफ फैसला दे दीजिए. जब आरोपी कातिल ठहराए जाएंगे और एक के बाद एक उन्हें सजा होने लगेगी तो फिर किसी की हिम्मत नहीं होगी कि वो इस तरह की हत्याएं करे.”

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