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बशीरहाट लोकसभा सीट: TMC बरकरार रख पाएगी मुस्लिम बहुल सीट पर कब्जा

बशीरहाट लोकसभा सीट: TMC बरकरार रख पाएगी मुस्लिम बहुल सीट पर कब्जा

तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार नुसरत जहां

तृणमूल कांग्रेस की उम्मीदवार नुसरत जहां

बशीरहाट लोकसभा सीट बांग्लादेश की सीमा से लगता हुआ इलाका है. यहां की 2,217 किलोमीटर की सीमा पड़ोसी देश से लगती हुई है. पूरा इलाका मुस्लिम बहुल है.

    उत्तरी चौबीस परगना जिले में आने वाले बशीरहाट लोकसभा सीट पर सीपीएम और कांग्रेस के बीच लड़ाई रही है. लेकिन 2009 के बाद स्थितियां बदल गईं. 2009 में इस सीट से टीएमसी ने जीत हासिल की और तब से लेकर अब तक इस सीट को अपने कब्जे में बनाए हुए है. टीएमसी के मौजूदा सांसद इदरीस अली इस बार का चुनाव नहीं लड़ रहे हैं. टीएमसी ने बशीरहाट सीट से नुसरत जहां को उतारा है. नुसरत का मुकाबला सीपीआई के पल्लव सेनगुप्ता से है. बीजेपी की तरफ से सायंतन बसु भी मुकाबले में हैं. कांग्रेस ने इस सीट से काजी अब्दुर रहीम को टिकट दिया है.

    2014 के चुनाव का हाल

    बशीरहाट लोकसभा सीट पर सीपीएम और कांग्रेस के बीच मुकाबला रहा है. 2009 के चुनाव में टीएमसी ने इस सीट पर कब्जा कर लिया. 2009 में टीएमसी के नुरुल इस्लाम ने जीत हासिल की. उन्होंने सीपीआई के अजय चक्रवर्ती को शिकस्त दी थी. 2014 के चुनाव में जहां पूरे देश में मोदी की लहर थी. बंगाल में ममता बनर्जी का जादू बोल रहा था. इस चुनाव में बंगाल में टीएमसी ने 42 में से 34 सीटों पर कब्जा जमाया था. इसमें बशीरहाट की सीट भी शामिल है. इस सीट से टीएमसी के इदरीस अली सांसद चुने गए. इदरीस अली को 4 लाख 92 हजार 326 वोट हासिल हुए. जबकि उनके नजदीकी प्रतिद्वंद्वी सीपीआई के नुरुल हूडा को 3 लाख 82 हजार 667 वोट मिले. इस सीट से बीजेपी उम्मीदवार समीक भट्टाचार्य तीसरे स्थान पर रहे थे. उन्हें कुल 2 लाख 33 हजार 887 वोट हासिल हुए थे.

    बीजेपी उम्मीदवार सायंतन बसु


    बशीरहाट सीट का राजनीतिक इतिहास

    1952 में जब देश में पहला आमचुनाव हुआ तो बशीरहाट लोकसभा सीट दो सदस्यीय सीट हुआ करती थी. 1952 में पहली बार सीपीएम के टिकट पर रेणु चक्रवर्ती ने जीत हासिल की. उसके बाद कांग्रेस की प्रतिमा रॉय इस सीट से सांसद चुनी गईं. 1957 के चुनाव में सीपीएम की रेणु चक्रवर्ती ने दोबारा जीत हासिल की. उनके बाद कांग्रेस के परेशनाथ कायल सांसद बने. 1962 और 1967 के चुनाव में यहां से हुमायूं कबीर सांसद चुने गए.

    पहले वो कांग्रेस के टिकट पर जीते फिर बांग्ला कांग्रेस के टिकट पर. 1970 में हुए चुनाव में बांग्ला कांग्रेस के टिकट पर सरदार अमजद अली ने जीत हासिल की और सांसद बने. 1971 से लेकर 1977 तक इस सीट से कांग्रेस के ए के एम इश्क ने सांसद के तौर पर प्रतिनिधित्व किया. इमरजेंसी के बाद 1977 में हुए चुनाव में भारतीय लोकदल के अल्हाज एम ए हन्नान ने जीत हासिल की. इसके बाद 1980 से लेकर 2009 तक इस सीट पर सीपीएम का कब्जा रहा.

    1980 से लेकर 1989 तक इंद्रजीत गुप्त ने सांसद रहे. इसके बाद 1989 से लेकर 1996 तक मनोरंजन सुर ने इस सीट से जीत हासिल की. 1996 से लेकर 2009 तक लगातार इस सीट से अजय चक्रवर्ती जीतकर संसद पहुंचे. 2009 में अजय चक्रवर्ती को टीएमसी के नुरुल इस्लाम ने शिकस्त दी. तब से लेकर ये सीट टीएमसी के पास है.

    2014 में टीएमसी के इदरीस अली सांसद बने थे.


    बशीरहाट लोकसभा सीट का समीकरण

    बशीरहाट लोकसभा सीट बांग्लादेश की सीमा से लगता हुआ इलाका है. यहां की 2,217 किलोमीटर की सीमा पड़ोसी देश से लगती हुई है. पूरा इलाका मुस्लिम बहुल है. यहां की आबादी का करीब 65 फीसदी खेती और मछली पालन पर आश्रित है. साक्षरता दर औसत तौर पर कम है. बांग्लादेश की सीमा से सटा होने के कारण अवैध तस्करी एक अहम मसला है. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत सात विधानसभा सीटें आती हैं. जिनमें- बादुडिय़ा, हारोआ, मीनाखन, संदेशखाली, बशीरहाट दक्षिण, बशीरहाट उत्तर हिंगलगंज शामिल हैं. 2004 के चुनाव में स्वरूपनगर विधानसभा सीट को भी इसमें मिला लिया गया.

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    Tags: Basirhat S25p18, BJP, Cpm, Lok Sabha Election 2019, TMC, West Bengal Lok Sabha Constituencies Profile, West Bengal Lok Sabha Elections 2019

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