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डायमंड हार्बर : जानिए CM ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की सीट का समीकरण

डायमंड हार्बर : जानिए CM ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी की सीट का समीकरण

अभिषेक इस सीट से दूसरी बार चुनावी लड़ाई जीतने के लिए मैदान में हैं.

अभिषेक इस सीट से दूसरी बार चुनावी लड़ाई जीतने के लिए मैदान में हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर टीएमसी ने सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को उतारा था. अभिषेक बनर्जी ने 70 हजार के ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी.

    डायमंड हार्बर लोकसभा सीट दक्षिणी चौबीस परगना जिले के अंतर्गत आती है. ये लोकसभा सीट सीपीएम का गढ़ रही है. यहां से ज्योतिर्मय बसु और अमल दत्ता जैसे दिग्गज लेफ्ट नेता जीतते आए हैं. लेकिन 2009 में यहां के राजनीति हालात बदल गए. 2009 में इस सीट से पहली बार टीएमसी ने जीत हासिल की. 2009 से लेकर अब तक इस सीट पर टीएमसी का कब्जा है. 2014 में इस सीट से ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने जीत हासिल की. टीएमसी के मौजूदा सांसद अभिषेक बनर्जी एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. यहां सीपीएम ने डॉ. फुआद हलीम को टिकट दिया है. बीजेपी की तरफ से नीलांजन रॉय चुनाव मैदान में हैं. कांग्रेस ने यहां से सौम्या रॉय को टिकट दिया है.

    2014 का चुनाव

    2014 के लोकसभा चुनाव में इस सीट पर टीएमसी ने सीएम ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी को उतारा था. अभिषेक बनर्जी ने 70 हजार के ज्यादा वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. अभिषेक बनर्जी को 5 लाख, 8 हजार, 481 वोट मिले थे. जबकि दूसरे स्थान पर रहे सीपीएम के डॉ. अबुल हसनत को 4 लाख, 37 हजार, 187 वोट मिले थे. इस सीट पर बीजेपी उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहा था. बीजेपी के अभिजीत दास ने 2 लाख, 858 वोट हासिल किए थे.

    इस बार बीजेपी ने यहां से नीलांजन रॉय को उम्मीदवार बनाया है.


    डायमंड हार्बर का राजनीतिक इतिहास

    इस सीट पर सीपीएम ने दशकों तक राज किया है. 1952 में हुए पहले चुनाव में यहां से सीपीएम उम्मीदवार कमल बसु चुनाव जीते. दो सदस्यीय लोकसभा सीट होने की वजह से कांग्रेस के टिकट पर पूर्णेंदु शेखर नस्कर सांसद चुने गए. 1957 के चुनाव में फिर से कांग्रेस के पूर्णेंदु शेखर नस्कर चुनाव जीते फिर सीपीएम के कंसारी हल्दर सांसद बने. 1962 के चुनाव में कांग्रेस के सुधांशु भूषण दास सांसद चुने गए. इसके बाद 1967 से लेकर 2004 तक लगातार इस सीट पर सीपीएम का कब्जा रहा. इस दौरान सीपीएम के तीन सांसदों ने अपना-अपना लंबा कार्यकाल पूरा किया. 1967 से लेकर 1982 तक ज्योतिर्मय बसु सांसद रहे. इसके बाद 1982 से लेकर 1996 तक अमल दत्ता जीतकर संसद पहुंचे. 1996 से लेकर 2004 तक इस सीट से सामिक लाहिड़ी ने सांसद के तौर पर प्रतिनिधित्व किया. 2009 में इस सीट से टीएमसी के सोमेन्द्र नाथ मित्रा की जीत हुई. इसके बाद 2014 के चुनाव में ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी ने जीत हासिल की.

    डायमंड हार्बर सीट का समीकरण



    डायमंड हार्बर का पुराना नाम हाजीपुर था. अंग्रेजों के काल में इसका नाम बदलकर डायमंड हार्बर हुआ.
    अंग्रेजी शासन में डायमंड हार्बर कच्चे माल को यूरोप भेजे जाने का केंद्र हुआ करता था. अंग्रेजों ने यहां बंदरगाह का निर्माण कराया था. आज यहां कोई बंदरगाह नहीं है. कोलकता पोर्ट ट्रस्ट बंदरगाह बनाने पर विचार कर रहा है. डायमंड हार्बर संसदीय क्षेत्र की आबादी 22 लाख, 21 हजार, 470 है. जिनमें 49.07 फीसदी लोग गांवों में रहते हैं. 50.93 फीसदी जनता शहरी है. 2017 की मतगणना सूची के मुताबिक 16 लाख, 54 हजार, 351 वोटर्स हैं. 2014 के चुनाव में यहां 81.07% मतदान हुआ था. जबकि 2009 के चुनावों में यह आंकड़ा 80.94% था. डायमंड हार्बर के अंतर्गत 7 विधानसभा सीटें आती हैं. जिनमें- फालटा, सतगछिया, बिष्णुपुर, महेशतला, बज बज, मेटियाब्रुज और डायमंड हार्बर शामिल हैं.

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    Tags: BJP, Cpm, Diamond Harbour S25p21, Lok Sabha Election 2019, TMC, West Bengal Lok Sabha Constituencies Profile, West Bengal Lok Sabha Elections 2019

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