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दमदम लोकसभा सीट: टीएमसी के दिग्गज सौगत रॉय के लिए मुकाबला आसान नहीं

दमदम लोकसभा सीट: टीएमसी के दिग्गज सौगत रॉय के लिए मुकाबला आसान नहीं

सौगत रॉय

सौगत रॉय

2014 के चुनाव में इस सीट से सौगत रॉय ने डेढ़ लाख से ज्यादा के वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी.

    दमदम लोकसभा सीट उत्तरी चौबीस परगना जिले में आती है. यहां से टीएमसी के सौगत रॉय सांसद हैं. सौगत रॉय ने पहली बार 2009 में दमदम सीट से जीत हासिल की थी. उन्होंने सीपीएम के अमिताव नंदी को शिकस्त दी थी. 2014 के चुनाव में सौगत रॉय ने दोबारा जीत हासिल की. इस बार उन्होंने सीपीएम के असिम कुमार दासगुप्ता को हराया. सौगत रॉय एक बार फिर चुनावी मैदान में हैं. टीएमसी ने उन्हें फिर इस सीट से उतारा है. उनके मुकाबले सीपीएम ने नेपालदेब भट्टाचार्य को उतारा है. बीजेपी उम्मीदवार सामिक भट्टाचार्य भी मुकाबले में हैं. वहीं कांग्रेस ने इस सीट पर सौरव साहा को अपना उम्मीदवार बनाया है. शिवसेना ने इस सीट से इंद्रनील बनर्जी को टिकट दिया है.

    2014 के चुनाव का हाल

    2014 के चुनाव में इस सीट से सौगत रॉय ने डेढ़ लाख से ज्यादा के वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी. सौगत रॉय को 4 लाख 83 हजार 244 वोट हासिल हुए थे. सीपीएम उम्मीदवार असिम दासगुप्ता को 3 लाख 28 हजार 310 वोट मिले थे. बीजेपी के तपन सिकदर तीसरे नंबर पर रहे थे. उन्हें 2 लाख 54 हजार 819 वोट मिले थे.

    सामिक भट्टाचार्य


    दमदम लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

    इस सीट पर कभी किसी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा. नब्बे के आखिर के दशक में ये सीट बीजेपी के खाते में रही. इस सीट पर कभी सीपीएम तो कभी टीएमसी का कब्जा रहा. सबसे पहले 1977 में इस सीट पर चुनाव हुए. उस चुनाव में भारतीय लोकदल के टिकट पर अशोक कृष्ण दत्त जीतकर संसद पहुंचे. 1980 के चुनाव में सीपीएम ने बाजी मारी. निरेन घोष सांसद चुने गए. इसके बाद 1984 के चुनाव में कांग्रेस ने जीत हासिल की. कांग्रेस के आशुतोष लाहा संसद पहुंचे. 1989 से लेकर 1998 तक इस सीट पर सीपीएम का कब्जा रहा. 1989 से लेकर 1996 के चुनाव में लगातार निर्मल कांति चटर्जी चुनाव जीते. इसके बाद के दो चुनाव में बीजेपी को जीत मिली. 1998 और 1999 के चुनाव में बीजेपी के तपन सिकदर जीतकर सांसद बने. 2004 के चुनाव में सीपीएम ने वापसी की और अमिताव नंदी यहां से चुनकर संसद पहुंचे. इसके बाद से इस सीट पर टीएमसी के सौगत रॉय जीतते आ रहे हैं.

    तपन सिकदर


    दमदम सीट का समीकरण

    दमदम के इलाके को अंग्रेजों के शासन के दौरान सेना के इलाके के रूप में विकसित किया गया था. 1757 में बंगाल के नवाब ने ये इलाका अंग्रेजों को दे दिया था. 1783 में यहां सेना की छावनी तैयार हुई. बाद ये शहर अंग्रेजों के लिए सेना और शस्त्रागार का अड्डा बन गया. यहां बंदूकों के कारखाने लगाए गए. 1884 में यहां आर्डिनेंस फैक्ट्री बनी.

    दमदम संसदीय क्षेत्र में 7 विधानसभा सीटें आती हैं. जिनमें- खड़दह, दमदम उत्तर, पानीहाटी, कमरहट्टी, बरानगर, दमदम और राजारहाट-गोपालपुर शामिल हैं. यहां की जनसंख्या मिलीजुली है. हिंदीभाषियों की अच्छी खासी तादाद है. यहां की 98 फीसद आबादी शहरी इलाकों में रहती है. रोजगार के लिए कई कल-कारखाने हैं. तकरीबन 10 फीसद आबादी अनुसूचित जनजातियों की है. महानगर से सटे होने और शहरी इलाका होने की वजह से अधिकतर लोगों की आजीविका का जरिया रोजगार ही है.

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    Tags: BJP, Cpm, Dum Dum S25p16, Lok Sabha Election 2019, TMC, West Bengal Lok Sabha Constituencies Profile, West Bengal Lok Sabha Elections 2019

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