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घटाल लोकसभा सीट: सुपरस्टार देव के सामने कितना कमाल करेंगी भाजपाई भारती घोष

बंगाली फिल्मों के सुपरस्टार देव यहां से सांसद हैं.

बंगाली फिल्मों के सुपरस्टार देव यहां से सांसद हैं.

2014 के चुनाव में टीएमसी ने इस सीट से मशहूर बंगाली एक्टर देव को टिकट दिया. देव ने सीपीआई के संतोष राणा को वोटों के बड़े अंतर से हराया था.

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    पश्चिम बंगाल की घटाल लोकसभा सीट 2006 में परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई. इसे पनसकुरा लोकसभा सीट को खत्म करके बनाया गया. इसके पहले घटाल लोकसभा सीट 1951 से लेकर 1977 तक मौजूद थी. 1977 के बाद पनसकुरा संसदीय क्षेत्र के नाम से चुनाव हुए और यहां से सांसद चुने गए. इस सीट पर सीपीएम का जबरदस्त दबदबा रहा है. सीपीएम के बड़े नेता गीता मुखर्जी और गुरुदास दासगुप्ता ने दशकों तक इस इलाके का सांसद के तौर प्रतिनिधित्व किया है. 2014 में इस सीट से मशहूर बंगाली एक्टर देव ( दीपक अधिकारी ) ने टीएमसी के टिकट पर चुनाव लड़ा और जीतकर संसद पहुंचे.

    2019 के चुनाव में टीएमसी ने एक बार फिर उनपर भरोसा दिखाया है. टीएमसी के देव के मुकाबले में बीजेपी ने इस सीट से भारती घोष को उतारा है. भारती घोष आईपीएस अधिकारी रह चुकी हैं. पहले उन्हें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था. लेकिन बाद में उन्होंने नौकरी छोड़कर बीजेपी ज्वाइन कर ली. उन्होंने राज्य सरकार की ओर से दिए अपने सारे मेडल लौटा दिए. पिछले दिनों बंगाल में उनके कुछ विवादित बयानों ने खूब तूल पकड़ा.

    चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं को धमकी दी कि अगर उन्होंने ज्यादा होशियारी दिखाई तो वह उत्तर प्रदेश से लोगों को बुलाएंगी और उन्हें कुत्ते की मौत मारेंगी. उनके इस बयान से पहले सीएम ममता बनर्जी ने उन्हें शालीनता की हदें पार नहीं करने की चेतावनी दी थी. घटाल लोकसभा सीट से सीपीआई ने तपन कुमार गांगुली को टिकट दिया है. इसके साथ ही कांग्रेस की तरफ से खांडकर मोहम्मद सैफुल्लाह चुनाव मैदान में हैं.

    पूर्व आईपीएस अधिकारी भारती घोष ने कुछ ही महीने पहले बीजेपी ज्वाइन की है.


    घटाल लोकसभा सीट का राजनीतिक इतिहास

    इस सीट से 1952 में सबसे पहले सीपीएम के निकुंज बेहरी चौधरी को जीत मिली. 1957 के चुनावों में ये सीट कांग्रेस के खाते में चली गई. 1967 तक इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार जीतते रहे. 1971 के चुनाव में सीपीएम के जगदीश भट्टाचार्य इस सीट से सांसद चुने गए. 1977 के चुनाव में पनसकुरा लोकसभा सीट के नाम से चुनाव हुए. इसमें भारतीय लोकदल के आभा मैती सांसद जीते. 1980 से लेकर 1999 के चुनाव में लगातार इस सीट से सीपीएम की गीता मुखर्जी ने जीत हासिल की. 2000 के उपचुनाव में पहली बार टीएमसी के बिक्रम सरकार को सफलता मिली और वो सांसद बने. 2004 के चुनाव में सीपीआई ने बाजी पलट दी. इस बार सीपीआई के दिग्गज गुरुदास दासगुप्ता ने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया. 2009 के चुनावों में भी गुरुदास दासगुप्ता यहां से जीतकर संसद पहुंचे. 2014 तक गुरुदास दासगुप्ता इस सीट से सांसद रहे.

    2014 लोकसभा चुनाव के नतीजे

    देव पर टीएमसी ने दूसरी बार भरोसा जताया है.


    2014 के चुनाव में टीएमसी ने इस सीट से मशहूर बंगाली एक्टर देव को टिकट दिया. देव ने सीपीआई के संतोष राणा को वोटों के बड़े अंतर से हराया था. टीएमसी के देव ने इस चुनाव में कुल 6 लाख 85 हजार 696 वोट हासिल किए. जबकि सीपीआई के संतोष राणा को 4 लाख 24 हजार 805 वोट ही मिले. टीएमसी को कुल 50.70 फीसदी वोट हासिल हुए. वहीं सीपीआई को 31.40 फीसदी वोट मिले. कांग्रेस प्रत्याशी मानस भुइंया तीसरे स्थान पर रहे.

    घटाल लोकसभा सीट में 7 विधानसभा सीटे आती हैं. जिनमें पनसकुरा पश्चिम, सबंग, पिंगला, डेबरा, दासपुर, घटाल और केशपुर शामिल हैं. घटाल और केशपुर अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सीटें हैं.

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