हावड़ा लोकसभा सीट: TMC के ‘फुटबॉलर’ के मुकाबले में BJP ने उतारा है पत्रकार
Delhi-Ncr News in Hindi

हावड़ा लोकसभा सीट: TMC के ‘फुटबॉलर’ के मुकाबले में BJP ने उतारा है पत्रकार
कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने वाला हावड़ा ब्रिज.

अपनी स्थापना के बाद पहली बार चुनाव में उतरने के दौरान ये शुरुआती उन सीटों में है, जहां पर टीएमसी को कामयाबी मिली.

  • Share this:
हावड़ा लोकसभा सीट तृणमूल कांग्रेस के लिए बहुत खास है. अपनी स्थापना के बाद पहली बार चुनाव में उतरने के दौरान ये शुरुआती उन सीटों में है, जहां पर टीएमसी को कामयाबी मिली. टीएमसी ने 1998 के चुनाव में इस सीट से जीत हासिल की. ज्यादातर चुनावों में इस सीट से सीपीएम के उम्मीदवार जीतते रहे हैं. लेकिन 1998, 2009 और 2014 के चुनाव में यहां से टीएमसी के उम्मीदवार ने बाजी मारी. टीएमसी के मौजूदा सांसद और अंतर्राष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर प्रसून बनर्जी एक बार फिर यहां से चुनावी मैदान में हैं. बीजेपी ने इस सीट से मशहूर पत्रकार रंतिदेब सेन गुप्ता को टिकट दिया है. कांग्रेस की ओर से सूर्वा घोष, सीपीएम से सुमित्रो अधिकारी, पूर्वांचल जनता पार्टी (सेकुलर) से गौतम कुमार शॉ, शिवसेना से चंद्रशेखर झा, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर फॉर इंडिया (कम्यूनिस्ट) से मोहम्मद शाहनवाज और समाजतांत्रिक पार्टी से सुदर्शऩ मन्ना चुनाव लड़ रहे हैं. इसके साथ ही 11 निर्दलीय प्रत्याशी भी मैदान में हैं.

2014 के लोकसभा चुनाव का हाल

2014 के चुनाव में यहां से टीएमसी के प्रसून बनर्जी ने जीत हासिल की थी. प्रसून बनर्जी ने सीपीएम के श्रीदीप भट्टाचार्य को शिकस्त दी थी. बनर्जी को कुल 4 लाख 88 हजार 461 वोट हासिल हुए थे जबकि सीपीएम के श्रीदीप भट्टाचार्य को 2 लाख 91 हजार 505 वोट मिले थे. 2014 के चुनाव में बीजेपी के जॉर्ज बेकर तीसरे नंबर पर रहे थे. प्रसून बनर्जी 2013 से इस सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 2013 में हुए उपचुनाव में जीत हासिल करके वो सांसद बने थे. तब से लगातार वो इस सीट से जीतते रहे हैं.



टीएमसी के मौजूदा सांसद प्रसून बनर्जी

हावड़ा का राजनीतिक इतिहास

हावड़ा लोकसभा सीट पर 1952 में हुए पहले संसदीय चुनाव में कांग्रेस के संतोष कुमार दत्ता ने बाजी मारी. उन्होंने सीपीआई के अनिल कुमार सरकार को हराया था. इसके बाद 1957 के चुनाव में सीपीआई के मोहम्मद इलियास यहां से सांसद चुने गए. 1962 के चुनाव में मोहम्मद इलियास ने एक बार फिर जीत पाई. 1967 के चुनाव में इस सीट को कांग्रेस ने दोबारा हासिल किया और के के चटर्जी यहां से सांसद बने. इसके बाद के लगातार तीन चुनावों में सीपीएम ने इस सीट पर जीत हासिल की. सीपीएम के समर मुखर्जी 1971, 1977 और 1980 के चुनावों में लगातार जीत हासिल करके सांसद चुने जाते रहे.

1984 के चुनाव में यहां से कांग्रेस के दिग्गज नेता प्रियरंजन दासमुंशी ने जीत हासिल की. इसके बाद के अगले दो 1989 औऱ 1991 के चुनाव में सीपीएम के सुशांत चक्रवर्ती ने जीत हासिल की. 1996 के चुनाव में प्रियरंजन दासमुंशी एक बार फिर इस सीट से सांसद बने. 1998 में टीएमसी ने पहली बार सीट से खाता खोला और बिक्रम सरकार सांसद बने. 1999 और 2004 के चुनाव में यहां से सीपीएम के स्वदेश चकवर्ती ने जीत हासिल की. 2009 के चुनाव में टीएमसी ने दोबारा इस सीट को झटक लिया और अंबिका बनर्जी सांसद बनी. 2013 में अंबिका बनर्जी के निधन के बाद खाली हुए सीट पर उपचुनाव में टीएमसी के प्रसून बनर्जी जीते और फिर उन्होंने इस सीट का प्रतिनिधित्व किया.



हावड़ा सीट की खास बातें

हावड़ा को पूर्वी भारत का प्रवेश द्वार कहा जाता है. इस शहर का इतिहास 500 वर्ष पुराना है. कोलकाता और हावड़ा को जोड़ने वाला हावड़ा ब्रिज यहां की पहचान है. हावड़ा रेलवे स्टेशन देश के करीब हर रेलवे नेटवर्क से जुड़ा है. कभी ये इलाका अपने औद्योगिक विकास के लिए जाना जाता था.

2011 की जनगणना के मुताबिक हावड़ा संसदीय क्षेत्र की जनसंख्या 15 लाख 5 हजार 99 है. इनमें पुरुष वोटर्स 53.33 फीसदी और महिला वोटर्स 46.67 फीसदी हैं. इस लोकसभा सीट के अंतर्गत 7 विधानसभा सीटें आती हैं. सातों सीट पर टीएमसी का कब्जा है. इन सीटों में बैली, हावड़ा उत्तर, हावड़ा मध्य, शिबपुर, हावड़ा दक्षिण, संकरेल और पंछला सीटें शामिल हैं.

ये भी पढ़ें:

कांग्रेस के गढ़ मालदा दक्षिण में क्यों बीजेपी को है कमल खिलने की उम्मीद?

बनगांव लोकसभा सीट: इस सीट पर है त्रिकोणीय मुकाबला, बीजेपी भी है रेस में

रानाघाट लोकसभा सीट: इस सीट से हैं टीएमसी को काफी उम्मीदें
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज