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झाड़ग्राम लोकसभा सीट: TMC के सामने है सीट बचाने की चुनौती, मुकाबले में BJP

file photo

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झाड़ग्राम, पश्चिमी मेदिनीपुर और पुरुलिया जिले के विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर झाड़ग्राम लोकसभा सीट बनी है. इस सीट पर दशकों तक सीपीएम ने राज किया.

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    पश्चिम बंगाल के झाड़ग्राम लोकसभा सीट में राज्य के तीन जिलों के इलाके आते हैं. झाड़ग्राम, पश्चिमी मेदिनीपुर और पुरुलिया जिले के विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर झाड़ग्राम लोकसभा सीट बनी है. इस सीट पर दशकों तक सीपीएम ने राज किया. 2014 में टीएमसी ने सीपीएम के वर्चस्व को तोड़ा. 2014 के चुनाव में इस सीट से टीएमसी की डॉ उमा सरीन ने जीत हासिल की. 2019 के चुनाव में टीएमसी ने इस सीट से बीरवाहा सोरेन को चुनावी मैदान में उतारा है. इनका मुकाबला सीपीएम के देबलीना हेमब्रम से है. बीजेपी ने इस सीट से कुंवर हेमब्रम को टिकट दिया है. मुकाबले में कुंवर हेमब्रम भी हैं. कांग्रेस की तरफ से जोग्गेश्वर हेमब्रम इस सीट से चुनौती दे रहे हैं. इस बार का चुनाव त्रिकोणीय हो चुका है.

    2014 का चुनाव

    इस इलाके में सीपीएम के वर्चस्व को पहली बार 2014 के चुनाव में टीएमसी ने तोड़ा. इस सीट से डॉ उमा सरीन ने जीत हासिल की. टीएमसी की उमा सरीन को 6 लाख 74 हजार 504 वोट हासिल हुए. वहीं माकपा के अनुभवी और जिला परिषद के पूर्व अध्यक्ष डॉ पुलिन बिहारी बास्के को 3 लाख 26 हजार 621 वोट ही हासिल हुए. उन्हें 26.50 फीसदी वोट ही मिले. जबकि उमा सरीन ने 54.60 फीसदी वोट हासिल किए. उमा सरीन पेशे से डॉक्टर हैं. सरीन ने लोकसभा पहुंचने के बाद अच्छा प्रदर्शन नहीं किया. उन्‍होंने मई 2014 से दिसंबर 2018 एक भी सवाल नहीं पूछा और न ही किसी बहस में हिस्सा लिया. सदन में पूरा कार्यकाल उन्होंने खामोशी में गुजार दिया. लेकिन उन्‍होंने सांसद निधि में मिले 25 करोड़ रुपए का भरपूर इस्‍तेमाल किया. फरवरी 2019 तक उनकी सांसद निधि में मात्र 1 लाख रुपए बचे थे.

    टीएमसी की प्रत्याशी बीरवाहा सोरेन चुनाव प्रचार के दौरान


    झाड़ग्राम का राजनीतिक इतिहास

    1962 में पहली बार इस सीट पर चुनाव हुए. पहले चुनाव में कांग्रेस के सुबोध चंद्र हंसदा ने बाजी मारी और सांसद बने. इसके बाद 1967 में हुए चुनाव में बांग्ला कांग्रेस के ए के किस्कू ने जीत हासिल की. 1971 के चुनाव में इस सीट से कांग्रेस के अमिय कुमार किस्कू जीतकर संसद पहुंचे. इसके बाद का दौर सीपीएम के नाम रहा. 1977 से लेकर 2014 तक लगातार इस सीट पर सीपीएम का कब्जा रहा. 1977 के चुनाव में सीपीएम के टिकट पर जादूनाथ किस्कू चुनाव जीते. 1980 लेकिन 1991 तक इस सीट से मतिलाल हंसदा चुनकर संसद पहुंचते रहे. उनके बाद 1991 से लेकर 2009 तक लगातार इस सीट का प्रतिनिधित्व रुपचंद्र मुर्मु ने किया. 2009 के चुनाव में यहां से सीपीएम के टिकट पर डॉ पुलिन बिहारी बास्के जीते. 2014 के चुनाव में डॉ पुलिन को डॉ सरीन के हाथों शिकस्त मिली.



    झाड़ग्राम सीट का समीकरण

    झाड़ग्राम सीट अनुसूचित जाति सुरक्षित सीट है. झाड़ग्राम संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत 7 विधानसभा सीटें आती हैं. जिनमें- नयाग्राम, बंदवान, बिनपुर, गोपीबल्लवपुर, झाड़ग्राम, गरबेटा और सालबोनी शामिल हैं. नयाग्राम, बंदवान और बिनपुर अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित सीटें हैं. इस सीट पर 7 लाख 53 हजार 840 पुरुष और 7 लाख 21 हजार 272 महिला वोटर्स हैं. झाड़ग्राम अपने जंगलों, प्राचीन मंदिर और शाही किलों के लिए जाना जाता है.

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