करीमगंज लोकसभा सीट: त्रिकोणीय मुकाबले को तैयार सियासी दल

करीमगंज लोकसभा सीट पर कांग्रेस-बीजेपी के अलावा एआईयूडीएफ और टीएमसी के बीच मुकाबला है.
करीमगंज लोकसभा सीट पर कांग्रेस-बीजेपी के अलावा एआईयूडीएफ और टीएमसी के बीच मुकाबला है.

आम चुनाव 2019 के लिए इस बार कांग्रेस ने स्‍वरूप दास पर दांव लगाया है. जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने चंदन दास को अपना प्रत्‍याशी घोषित किया है. बीजेपी ने कृपानाथ मल्‍ला को चुनाव मैदान में उतारा है. इसके साथ ही एआईयूडीएफ ने अपने मौजूदा सांसद राधेश्‍याम विश्‍वास को टिकट दी है.

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असम का करीमगंज जिला बांग्‍लादेश का नजदीकी इलाका है. बांग्‍लादेश और करीमगंज के बीच में एक नदी का बहती है जिसका नाम कुशियारा है. वहीं करीमगंज लोकसभा सीट महत्‍वपूर्ण सीटों में से एक है. शुरू से यह सीट कांग्रेस पार्टी का गढ़ रही है. यहां हुए चुनावों में अधिकांशत: कांग्रेस को ही जीत मिली है. हालांकि दो बार यहां से बीजेपी को भी जनादेश मिला है. इतना ही नहीं पिछले लोकसभा चुनावों में यहां की जनता ने कांग्रेस-बीजेपी के बजाय ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) को अपना मत दिया और सांसद बनाया.

2019 लोकसभा चुनावों में यहां इन तीनों ही पार्टियों में कड़ा मुकाबला है. इसकी वजह यह भी है कि 2016 में हुए विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने असम की 60 सीटों पर जीत हासिल की थी और कांग्रेस को सिर्फ 26 सीटों पर ही समेट दिया था. हालांकि पिछले चुनाव में मिली जीत के बाद एआईयूडीएफ भी यहां से सीट निकालने के लिए पूरी कोशिश कर रही है.

करीमगंज लोकसभा सीट की बात करें तो  सबसे पहले यहां 1962 में लोकसभा चुनाव हुए. जिसमें कांग्रेस उम्‍मीदवार निहार रंजन लस्कर को जीत मिली. लश्‍कर 1980 तक लगातार इसी सीट से जीतते हुए सांसद रहे. 1984 में इंडियन कांग्रेस सोशलिस्‍ट के सुदर्शन दास ने विजय पताका फहराई और कांग्रेस के जीत के अभियान को रोक दिया. 1991 और 1996 में भी कांग्रेस इस सीट पर वापसी नहीं कर पाई और यह सीट बीजेपी के खाते में चली गई. द्वारका नाथ दास इस सीट से सांसद चुने गए. हालांकि यह यह हाल ज्‍यादा दिन नहीं रहा और एक बार फिर कांग्रेस ने वापसी की.



करीमगंज लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी ने भी उम्‍मीदवार उतारा है.
करीमगंज लोकसभा सीट पर आम आदमी पार्टी ने भी उम्‍मीदवार उतारा है.

1998 में कांग्रेस ने करीमगंज सीट को जीता और यह जीत का सिलसिला लगातार चार लोकसभा चुनावों तक चलता रहा. 2009 तक कांग्रेस की जीत के बाद 2014 में इस सीट पर ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट ने जीत हासिल की.

कौन-कौन हैं प्रत्‍याशी?
आम चुनाव 2019 के लिए इस बार कांग्रेस ने स्‍वरूप दास पर दांव लगाया है. जबकि ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने चंदन दास को अपना प्रत्‍याशी घोषित किया है. बीजेपी ने कृपानाथ मल्‍ला को चुनाव मैदान में उतारा है. इसके साथ ही एआईयूडीएफ ने अपने मौजूदा सांसद राधेश्‍याम विश्‍वास पर ही भरोसा जताते हुए इस संसदीय सीट का उम्‍मीदवार बनाया है. इस बार यहां से आम आदमी पार्टी ने भी अनवर अहमद लश्‍कर को अपना उम्‍मीदवार घोषित किया है.

यहां के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन अच्‍छा रहा है. इस बार लोकसभा चुनाव की चुनौती है.
यहां के विधानसभा चुनाव में बीजेपी का प्रदर्शन अच्‍छा रहा है. इस बार लोकसभा चुनाव की चुनौती है.


2014 लोकसभा चुनाव का जनादेश
पिछले लोकसभा चुनाव में आल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (AIUDF) के प्रत्याशी राधेश्याम बिस्वास ने जीत हासिल की. बिस्‍वास को 362,866 वोट मिले. जबकि बीजेपी प्रत्याशी कृष्णा दास को 260,772 वोटों से संतोष करना पड़ा. इस दौरान तीसरे नंबर पर कांग्रेस प्रत्‍याशी ललित मोहन रहे जिन्‍हें 226,562 वोट मिले.

सामाजिक ताना-बाना
करीमगंज संसदीय क्षेत्र में कुल 8 विधानसभा सीटें हैं. इनमें राताबारी और पथरकंडी विधानसभा सीटें BJP के पास हैं. जबकि करीमगंज नॉर्थ और बदरपुर कांग्रेस के पास हैं. करीमगंज साउथ, हैलाकांडी कतलीचेरा एआईयूडीएफ और अल्गापुर सीटों पर एआईयूडीएफ के विधायक हैं. 2014 के आंकड़ाें के अनुसार करीमगंज लोकसभा सीट पर कुल मतदाताओं की संख्या 11,65,997 है. जिसमें पुरुष मतदाताओं की संख्या 6,15,198 और महिला मतदाताओं की संख्या 5,50,799 है.
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