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कांग्रेस के गढ़ मालदा दक्षिण में क्यों बीजेपी को है कमल खिलने की उम्मीद?

file photo

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मालदा कभी कांग्रेस के दिवंगत दिग्गज नेता गनी खान चौधरी का मजबूत इलाका माना जाता था. इस सीट पर ममता बनर्जी और वामदल अपने शासन के बावजूद कांग्रेस के कई दशकों के प्रभाव पर असर नहीं डाल सके.

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    मालदा कभी कांग्रेस के दिवंगत दिग्गज नेता गनी खान चौधरी का मजबूत इलाका माना जाता था. इस सीट पर ममता बनर्जी और वामदल अपने शासन के बावजूद कांग्रेस के कई दशकों के प्रभाव पर असर नहीं डाल सके.

    इसके बावजूद इस सीट पर बीजेपी की नजर है क्योंकि बीजेपी को लगता है कि वोटों को ध्रुवीकरण से यहां कमल खिलाया जा सकता है. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ लगातार पश्चिम बंगाल में हिंदुत्व की जड़ों को मजबूत करने, बीजेपी के बूथ को मजबूत करने और शाखाओं को बढ़ाने में जुटा हुआ है. माना जाता है कि मालदा में पश्चिम बंगाल के दूसरे इलाकों के मुकाबले बीजेपी के प्रति लोगों का ज्यादा झुकाव है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी यहां से दूसरे नंबर पर रही थी. बीजेपी को 17 फीसदी वोट मिले थे.

    राजनीतिक इतिहास

    मालदा में पहले लोकसभा चुनाव से ही कांग्रेस ने जीत के साथ आगाज किया था और कांग्रेस के टिकट पर सुरेंद्र मोहन घोष चुनाव जीते थे. इसके बाद 1967 तक कांग्रेस का कब्जा रहा लेकिन 1971 और 1977 में कांग्रेस यहां जीत नहीं सकी. लेकिन इसके बाद कांग्रेस के अब्दुल गनी खान चौधरी साल 1980 से 2005 तक मालदा के मालिक रहे हैं और लगातार जीत कर लोकसभा पहुंचते रहे हैं. उनके निधन के बाद उनका परिवार को ये इलाका सियासत की विरासत के तौर पर मिला और उनका कब्जा बरकरार है. उत्तर मालदा से गनी खान चौधरी की भतीजी मौसम नूर कांग्रेस से सांसद हैं जबकि दक्षिण मालदा सीट से उनके भाई अबु हासेमखान चौधरी कांग्रेस से सांसद हैं.

    गनी खान चौधरी


    कौन हैं प्रत्याशी

    मालदा दक्षिण से कांग्रेस ने मौजूदा सांसद अबू हसम खान चौधरी को टिकट दिया है. ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट से मोइज्जम हुसैन को टिकट दिया है जबकि बीजेपी ने श्रीरुपा मित्र चौधरी को मैदान में उतारा है.

    समाजिक समीकरण

    बांग्लादेश से सटा इलाका मालदा को मुस्लिम बहुल सीट माना जाता है जहां कि आबादी का 60 फीसदी मुस्लिम है. साल 2014 के लोकसभा चुनाव में जब देश भर से कम संख्या में मुस्लिम उम्मीदवार जीते तब मालदा दक्षिण और मालदा उत्तर से मुस्लिम उम्मीदवार जीतकर संसद पहुंचे. साल 2009 के बाद हुए परिसीमन में मालदा लोकसभा सीट उत्तर और दक्षिण हिस्से में बंट गई.



    मालदा लोकसभा सीट के तहत विधानसभा की 12 सीटें आती हैं जिसमें 9 सीटों पर कांग्रेस, 2 सीटों पर सीपीएम और एक सीट पर बीजेपी का कब्जा है.

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