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यहां श्मशान घाटों पर अंतिम संस्कार के लिए लंबी वेटिंग तो कब्रिस्तान के पास दफनाने की जमीन नहीं

घाटगेट कब्रिस्तान में अब तक 150 और शास्त्रीनगर में 50 जनाजे दफनाए जा चुके हैं.
घाटगेट कब्रिस्तान में अब तक 150 और शास्त्रीनगर में 50 जनाजे दफनाए जा चुके हैं.

दिल्ली (Delhi) का सबसे बड़ा कब्रिस्तान (Cemetery) आईटीओ (ITO) के पास स्थित है. जानकारी के अनुसार यह 20 एकड़ से भी ज्यादा जमीन पर फैला है. कोरोना काल (Coronavirus) में यहां पर अब तक हजारों मृतकों को सुपुर्द-ए-खाक किया जा चुका है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 26, 2020, 12:20 AM IST
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नई दिल्ली. दिल्ली-एनसीआर में एक बार फिर से कोविड-19 (COVID-19) से मरने वालों की संख्या में तेजी आनी शुरू हो गई है. दिल्ली के कई श्मशान घाटों की स्थिति तो और भयावह हो गई है. इन श्मशान घाटों पर शवों का अंतिम संस्कार कोविड-19 गाइडलाइंस के मुताबिक नहीं हो रहा है. वहीं, कब्रिस्तानों (Cemetery) में भी दफनाने की जगह कम पड़ने लगी है. दिल्ली के श्मशान घाटों पर अब अंतिम संस्कार के लिए वेटिंग लिस्ट लंबी होती जा रही है. निगमबोध घाट सहित कई श्मशान घाटों और आईटीओ कब्रिस्तान में तो लंबे इंतजार के बाद मृतकों का अंतिम संस्कार किया जा रहा है. बता दें कि देश में कोरोना वायरस (Coronavirus) के मामले एक बार फिर से तेजी से बढ़ने लगे हैं. देश में कोविड-19 महामारी से मरने वालों का आंकड़ा अब एक लाख 35 हजार को पार करने वाला है. वहीं, देश में कोरोना से मृत्यु दर (Death Rate) 1.47 प्रतिशत के करीब बनी हुई है. दिल्ली में ​बीते 20 दिनों में ही तकरीबन 2 हजार लोगों की कोरोना से मौत हो गई है.

कब्रिस्तान में जमीन नहीं तो श्मशान घाटों पर लंबा इंतजार
गौरतलब है कि दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान में अब सुपुर्द-ए-खाक के लिए जमीन नहीं बची है. सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा है कि लेकिन कोरोना काल में यह एक हकीकत है. राजधानी दिल्ली में एक बार फिर से कोरोना से लगातार हो रही मौतों के बाद कब्रिस्तानों में भी जगह कम पड़ने लगी है. आईटीओ स्थित दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान का भी यही हाल है. कोविड-19 की शुरुआत में इस कब्रिस्तान के 5 बीघा जमीन को कोरोना महामारी से मरने वाले लोगों के लिए आरक्षित किया गया था, लेकिन यहां पर पिछले 7-8 महीनों में इतने लोगों को दफनाया गया है कि 5 बीघा जमीन भी कम पड़ गई है.

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देश में कोरोना से संक्रमित मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है.

दायरा बढ़ाने के बाद भी जगह कम


दो महीने पहले कब्रिस्तान प्रबंधन ने इसका दायरा 9 बीघा तक कर दिया. अब कब्रिस्तान प्रबंधन का कहना है कि 9 बीघा जमीन भी भरने वाली है. प्रबंधन के मुताबिक कब्रिस्तान का पूरा हिस्सा तकरीबन भर गया है. मात्र कुछ ही मीटर जमीन अब सिर्फ बची है. प्रबंधन का कहना है कि अगर यही हाल रहा तो जल्द ही पूरा हिस्सा भर जाएगा. इसके बारे में कब्रिस्तान प्रबंधन ने एक बार फिर से दिल्ली सरकार को पत्र लिखा है.



दिल्ली के सबसे बड़े कब्रिस्तान में शव दफनाने के लिए जगह नहीं
बता दें कि दिल्ली का सबसे बड़ा कब्रिस्तान आईटीओ में है. एक अनुमान के मुताबिक यह कब्रिस्तान 20 से भी ज्यादा एकड़ जमीन में फैला हुआ है. कोरोना काल में यहां पर अब तक हजारों मृतकों को सुपुर्द-ए-खाक किया जा चुका है. कोरोना महामारी शुरू होने के बाद प्रबंधन ने यहां की 5 बीघा जमीन को सिर्फ कोरोना संक्रमितों के लिए आरक्षित किया था. बाद में इसको बढ़ा कर 9 बीघा कर दिया था.अब कब्रिस्तान का 95 फीसदी से भी ज्यादा हिस्सा भर चुका है. कब्रिस्तान प्रबंधन अब इसको लेकर चिंतित नजर आ रहा है.

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प्रबंधन ने दिल्ली सरकार से कहा है कि अब ज्यादा शव न भेजे जाएं.


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आईटीओ कब्रिस्तान में आमतौर पूरे दिल्ली के लोग आते हैं. सेंट्र्ल दिल्ली, साउथ दिल्ली, ईस्ट दिल्ली के साथ-साथ दिल्ली के बड़े-बड़े अस्पतालों से सुपुर्दे-ए-खाक के लिए लाए जाते हैं. कब्रिस्तान के सुपरवाइजर मोहम्मद शमीम कहते हैं, 'पहले एक दिन में 4 से 5 बॉडी आती थींं, लेकिन अब शवों की कोई गिनती नहीं है. रोज 15 से ज्यादा शव फिर आने लगे हैं. यहां पर ज्यादातर शव दिल्ली के बड़े-बड़े अस्पतालों एलएनजेपी, राम मनोहर लोहिया, सफदरजंग और एम्स से आते हैं. अगर दिल्ली सरकार जल्द ही इस पर ध्यान नहीं देती है तो हमें दफनाने की प्रक्रिया कुछ दिनों के लिए रोकनी पड़ेगी.'
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