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सियासी संकट का एपिसेंटर क्यों बनता है गुरुग्राम?

मध्य प्रदेश में सियासी संकट जारी

मध्य प्रदेश में सियासी संकट जारी

मध्य प्रदेश से पहले उत्तराखंड और कर्नाटक के सियासी संकट का गवाह रहा है गुरुग्राम, राजनीतिक उठापटक के लिए क्या इन वजहों से चुना जाता है गुरुग्राम?

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नई दिल्ली. गुरु द्रोण का नगर गुरुग्राम एक बार फिर सियासी उठापटक का एपिसेंटर बन गया है. यह इससे पहले दो बार ऐसे घटनाक्रमों का गवाह रहा है. जब यहां से दूसरे प्रदेशों के सियासी तीर चलाए गए. फिलहाल, दिल्ली से सटा यह शहर मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के सियासी नाटक का मंच बना है. मंगलवार देर रात गुरुग्राम में एमपी के विधायकों को लेकर हाईवोल्टेज ड्रामा हुआ. कांग्रेस ने बीजेपी पर 11 विधायकों को पाला बदलने के लिए गुरुग्राम के एक होटल में रखने का आरोप लगाया. आरोप है कि बीजेपी कमलनाथ सरकार को अस्थिर करना चाहती है.

उत्तराखंड का सियासी संकट 

19 मार्च 2016 को उत्तराखंड में कांग्रेस के नौ विधायकों ने तत्कालीन सीएम हरीश रावत से बगावत कर दी. वहां राजनीतिक संकट पैदा हो गया. तब वहां के राज्यपाल केके पॉल ने रावत को 28 मार्च तक सदन में बहुमत साबित करने का समय दिया. बीजेपी ने नौ कांग्रेसियों समेत 35 विधायकों की राज्यपाल के सामने परेड करवाई. फिर शुरू हुआ था विधायकों को छिपाने व बागी होने से बचाने का खेल. तब बीजेपी के कुछ नेता 27 अपने और नौ कांग्रेसी विधायकों को लेकर गुरुग्राम के होटल लीला पहुंचे. यहां से ही उत्तराखंड में सरकार बनाने-बिगाड़ने का खेल हुआ था.

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गुरुग्राम के इसी होटल में विधायकों के ठहराने का आरोप है (File Photo)


कर्नाटक  के नाटक का केंद्र बना था 

जनवरी 2019 में कर्नाटक का सियासी नाटक शुरु हुआ था. जब कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन ने बीजेपी पर विधायकों की खरीद-फरोख्त का आरोप लगाया. आरोप था कि बीजेपी ने तीन दिन तक अपने 104 विधायकों को गुरुग्राम के मानेसर स्थित एक रिसॉर्ट में रखा. यहीं पर जोड़तोड़ की रणनीति बनाई गई. तब तत्कालीन सीएम कुमारस्वामी बीजेपी पर आरोप लगाया था कि वो 'ऑपरेशन लोटस' के तहत कांग्रेस-जेडीएस विधायकों की खरीद-फरोख्त करके सरकार गिराने की साजिश कर रही है.

आखिर गुरुग्राम ही क्यों?



वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं, "गुरुग्राम में ऐसे विधायकों को इसलिए भी ठहराया जाता है क्योंकि एयरपोर्ट नजदीक है, दिल्ली से सटा हुआ है. पार्टी ऑफिस जाना हो तो विधायक एक घंटे में पहुंच जाएंगे. सियासी उठापटक वाली जिन घटनाओं का गुरुग्राम गवाह बना है उन सभी में दूसरी पार्टियों के विधायकों को यहां लाने का आरोप बीजेपी पर लगा है. इसलिए यहां लाने के पीछे एक और वजह ये भी है कि हरियाणा में बीजेपी की सरकार है. यहां विधायकों के भागने का डर नहीं. विधायकों को दूसरे पक्ष से बचाने के लिए ऐसी ही जगह चुनी जाती है, जहां कोई दूसरा न पहुंच सके. क्योंकि प्रलोभनों से निष्ठा बदलने का खतरा बरकरार रहता है. माननीयों के निष्ठा बदलने का मतलब ये है कि सरकार गई."



मध्य प्रदेश का संकट

एमपी के पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने दावा किया है कि 11 में से 7 विधायकों को बीजेपी के 'कब्‍जे' से मुक्‍त कराया गया है. अब सिर्फ 4 विधायक ही कब्जे में हैं. 230 विधायकों वाली मध्य प्रदेश विधानसभा में इस समय 228 विधायक हैं. इनमें से कांग्रेस के 114 जबकि बीजेपी के 107 विधायक हैं. दो विधायक बहुजन समाज पार्टी से भी हैं, जबकि सपा से एक और चार निर्दलीय हैं. दो सीट विधायकों के निधन के चलते खाली हैं. ऐसे में बहुमत का आंकड़ा 113 है.


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