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मध्य प्रदेश का राजनीतिक संकट: ये है आयाराम-गयाराम की पूरी कहानी

क्या कमलनाथ बचा पाएंगे अपनी कुर्सी?

क्या कमलनाथ बचा पाएंगे अपनी कुर्सी?

हरियाणा की राजनीति से शुरू हुए दिल और दल बदलने वाले आयाराम-गयाराम वायरस की चपेट में अब मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार है

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नई दिल्ली. मध्य प्रदेश में कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ कई विधायकों ने अपनी ‘आस्था’ बदल ली है. वहां बहुत तेजी से पाला बदलने का काम जारी है. कमलनाथ सरकार पर आए आयाराम-गयाराम संकट की इस कहानी के कई पहलू हैं. लेकिन सियासत में नेताओं के दिल और दल बदलने की यह कोई पहला घटनाक्रम नहीं है. हम आपको बता रहे हैं कि आखिर राजनीति में भूचाल लाने वाले इस मुहावरे की उत्पत्ति कहां और कैसे हुई, जिसका वायरस तमाम कोशिश के बाद भी अब तक काबू नहीं हो पाया है.

पहली बार संसद में महाराष्ट्र के बड़े कांग्रेसी नेता और देश के गृह मंत्री यशवंतराव चव्हाण ने 1967 में ‘आयाराम-गयाराम’ शब्दबंध का जिक्र किया. उसके बाद दलबदलू नेताओं के लिए यह शब्द एक मुहावरे के रूप में स्थापित हो गया. दरअसल, भारतीय राजनीति में पहली बार यह कहावत हरियाणा की एक घटना को लेकर बनी.

हरियाणा के वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा के मुताबिक फरीदाबाद जिले में हसनपुर (सुरक्षित) नाम का एक विधानसभा क्षेत्र हुआ करता था. यहां के निर्दलीय विधायक थे गया लाल. उन्होंने 1967 में हुई राजनीतिक उठापटक के दौरान एक ही दिन में तीन बार दल बदला. यह अपने आप में रिकॉर्ड था. यह कहावत इसी घटनाक्रम से बनी.

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बीजेपी में शामिल हो गए सिंधिया


आखिर हरियाणा में तब हुआ क्या था

संयुक्त पंजाब से 1 नवंबर 1966 को अलग होकर हरियाणा बना. हरियाणा वाले हिस्से में ज्यादा विधायक कांग्रेसी थे. ऐसे में कांग्रेस नेता भगवत दयाल शर्मा को नए राज्य का पहला मुख्यमंत्री बनाया गया.

उस वक्त झज्जर जिले के रहने वाले चांदराम कैबिनेट मंत्री बनने का ख्वाब देख रहे थे. जब उनका नाम मंत्रिमंडल की सूची में नहीं आया तो वे नाराज हो गए. बताते हैं कि वे मुख्यमंत्री शर्मा के पास गए और बोले ‘यूं तो राम-लक्ष्मण की जोड़ी टूट जाएगी.’

उन्हें भगवतदयाल शर्मा की ओर से जवाब मिला कि यह सब ग्रह दशा व नक्षत्रों का खेल है. फिर क्या था हरियाणवीं चांदराम ने अपने ही अंदाज में उन्हें अपने ग्रह देख लेने की बात कह दी.

चांदराम पर एक ब्लॉग में राजेश कश्यप लिखते हैं, “इस बात के 12 दिन बाद जब स्पीकर के चुनाव करने का वक्त आया तो 17 कांग्रेसियों ने बगावत कर दी और कांग्रेस अपना स्पीकर नहीं चुन पाई. इसलिए शर्मा को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा.”

कांग्रेस सरकार गिरने के बाद दक्षिण हरियाणा के नेता और पटौदी के विधायक राव बीरेंद्र सिंह ने कांग्रेस के इन 17 बागी विधायकों के सहयोग से ‘हरियाणा विशाल पार्टी’ का गठन किया और 24 मार्च 1967 को नई सरकार बना ली. इसमें कांग्रेस की सरकार गिराने का इनाम चौधरी चांदराम को मिला. वो हरियाणा के पहले डिप्टी सीएम बन गए. राव बीरेंद्र सिंह के बेटे राव राव इंद्रजीत सिंह इस समय मोदी सरकार में मंत्री हैं.

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राजनीति विज्ञान की एक किताब में दलबदल संबंधी प्रश्नोत्तरी


गया लाल की भूमिका

वरिष्ठ पत्रकार नवीन धमीजा कहते हैं कि जब कांग्रेस की सरकार गिरी तो राव बीरेंद्र सिंह को अपना संख्याबल जुटाना चुनौती थी. एक-एक विधायक को अपने पाले में करने का काम हो रहा था. इस दौरान नजर निर्दलीय विधायकों पर भी थी. तब हसनपुर सीट के निर्दलीय विधायक गयालाल ने 24 घंटे के अंदर तीन पार्टियां बदलीं. पहले वे कांग्रेस से युनाइटेड फ्रंट में गए, फिर कांग्रेस में लौटे और फिर नौ घंटे के अंदर ही युनाइटेड फ्रंट में शामिल हो गए. यह अपने आप में पार्टी बदलने का रिकॉर्ड था. गयालाल के बेटे उदयभान, हरियाणा की होडल विधानसभा सीट से कांग्रेस के विधायक रह चुके हैं.

उस समय राव बीरेंद्र सिंह ने कहा था, 'गया राम, अब आया राम है.' इसके बाद हरियाणा में कई बार सियासी उठापटक हुई. जिस पर यहां के एक राज्यपाल जीडी तपासे ने कहा था- 'जिस तरह हम कपड़े बदलते हैं, वैसे ही यहां के विधायक दल बदलते हैं.'

इन किताबों में है आयाराम-गयाराम का जिक्र

वरिष्‍ठ पत्रकार हरिवंश ने अपनी पुस्‍तक 'झारखंड: सपने और यथार्थ' में इस घटना का जिक्र किया है. वह लिखते हैं कि ‘1967 के बाद हरियाणा से जिस आयाराम गयाराम की राजनीतिक संस्‍कृति शुरू हुई थी वह क्‍या थी? सुबह में जो एमएलए इधर होता था, दोपहर में दूसरे खेमे में. शाम में तीसरे, रात में चौथे खेमे में’.

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मध्य प्रदेश में जारी है नेताओं के आस्था बदलने का खेल (प्रतीकात्मक फोटो)


राजीव रंजन की पुस्‍तक '1000 राजनीतिक प्रश्‍नोत्‍तरी' नामक किताब में भी इसका जिक्र है. केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड की ओर से 11वीं कक्षा में पढ़ाई जाने वाली राजनीति विज्ञान की किताब में भी इस घटना का जिक्र करते हुए कहा गया है कि हरियाणा में आयाराम-गयाराम की राजनीति शुरू हुई.

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