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दिल्ली में आयोजित हुआ माहवारी महाभोज, मनीष सिसोदिया ने भी खाना खाया
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Updated: February 24, 2020, 6:52 PM IST
दिल्ली में आयोजित हुआ माहवारी महाभोज, मनीष सिसोदिया ने भी खाना खाया
माहवारी महाभोज में खाना खाते मनीष सिसौदिया

मासिक धर्म वाली 28 महिलाओं ने खाना बनाया और परोसा, दिल्ली के डिप्टी सीएम सहित करीब तीन सौ लोगों ने भोज का लिया आनंद, कहा- ये शर्म नहीं, गर्व की बात

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  • Last Updated: February 24, 2020, 6:52 PM IST
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दिल्ली. माहवारी में खाना बनाने को लेकर एक संत की नकारात्मक टिप्पणी दिल्ली की महिलाओं को नागवार गुजरी. उन्होंने रूढ़िवादी नियमों और विचारों के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए सोमवार को दिल्ली के मयूर विहार सेंट्रल पार्क में ‘माहवारी महाभोज’ का आयोजन किया. ऐसी 28 महिलाओं ने खाना तैयार किया और परोसा. ये मासिक धर्म वाली महिलाएं वास्तव में पूरे आयोजन का मुख्य आकर्षण थीं. इस कार्यक्रम में महिलाओं का हौसला बढ़ाने पहुंचे दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसौदिया. महिलाओं ने कहा-मासिक धर्म, शर्म की नहीं, गर्व की बात है.

इसका आयोजन ‘सच्ची सहेली’ सहेली नामक एक संस्था ने किया. महाभोज के दौरान जुटीं महिलाओं ने भुज-गुजरात की उस घटना का पुरजोर विरोध किया जिसमें स्वामी सहजानंद नामक एक गर्ल्स इंस्टीट्यूट में छात्रावास की 68 लड़कियों के अंदरूनी कपड़ों की जांच की गई थी. महिलाओं ने कहा, यह घटना ट्रस्ट के रूढ़िवादी नियमों और प्रतिबंधों के कारण हुई, जो रसोई और अन्य पवित्र स्थानों के अंदर सभी मासिक धर्म वाली महिलाओं के प्रवेश पर रोक लगाते हैं. इतना ही नहीं, एक पुजारी द्वारा एक विवादास्पद बयान भी दिया गया जिसमें दावा किया गया था कि माहवारी के दौरान खाना पकाने वाली महिलाएं अगले जन्म में कुतिया के रूप में पैदा होती हैं.

‘सच्ची सहेली’ सहेली नामक संस्था ने आयोजित किया माहवारी महाभोज


दावत की मेजबानी डॉ. सुरभि सिंह और उनकी टीम ने की. मासिक धर्म वाली 28 महिलाओं से खाना बनवा और परोसकर इस विवादास्पद बयान का विरोध किया गया. ताकि ऐसी प्रेक्टिस को रोका जा सके.



इन्हीं माहवारी वाली महिलाओं में से एक रहीं तरन्नुम. उन्होंने समाज में ऐसी सोच रखने वालों से सवाल पूछा कि-“जब हम हर दिन खाना बनाते हैं तो हम गंदे नहीं होते लेकिन माहवारी में जब हम खाना बनाते हैं तो हम गंदे कैसे हो जाते हैं? अगर हम अपने परिवार के लिए खाना नहीं बनाएंगे तो पांच दिन और कौन हमारे बच्चों के लिए खाना बनाएगा? माहवारी में खाना बनाने से कुछ भी ख़राब नहीं होता. असल चीज है साफ-सफाई. बस उसका ध्यान रखना जरुरी है”

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रूढ़िवादी विचारों के खिलाफ बुलंद की गई आवाज


दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, प्रमुख रंगमंच निदेशक अरविंद गौड़ और कवि सुश्री कमला भसीन, मेट्रोपोलिटन जज सुश्री विधि गुप्ता, रेडियो सिटी से दिव्या वासुदेव सहित 300 से ज्यादा लोग इस महाभोज में शामिल हुए.



मनीष सिसोदिया ने यहां पर खाना खाते हुए कहा कि “आज के युग में पवित्र और अपवित्र कहना गलत है. वैज्ञानिक समय में यह बात सभी को मालूम है कि माहवारी का होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है.”

महिलाओं ने कहा-माहवारी किसी धर्म की नहीं बल्कि कुदरत की देन है


कमला भसीन ने कहा कि “माहवारी किसी धर्म की नहीं बल्कि कुदरत की देन है और ये माहवारी ही हमारी असली ताकत है. उन्होंने महिलाओं का अपमान करने वालों के लिए कहा कि “जिस तरह लोग नमक खाकर नमक हरामी करते हैं उसी तरह कुछ लोग हम महिलाओं के ही खून से जन्म लेकर जब हमें गंदा कहते हैं तो वो खून-हरामी करते हैं.

आयोजक डॉ. सुरभि ने कहा कि “इतनी बड़ी तादाद में पुरुषों और महिलाओं का इकट्ठा होना इस बात का सबूत है कि लोग जानवरों के रूप में पुनर्जन्म होने से डरते नहीं हैं, और इस तरह की घटनाओं को और महिलाओं की गरिमा और सम्मान के खिलाफ बयान देना अब और बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.”

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First published: February 24, 2020, 3:31 PM IST
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