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दिल्ली आबकारी नीति मामले में BJP का आरोप- अपने ऊपर FIR होने पर मनीष सिसोदिया ने 1 दिन में बदले 4 मोबाइल

भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया दिल्ली आबकारी नीति मामले में कथित अनियमितताओं में 'पूरी तरह से शामिल' हैं. (File Photos)

भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया दिल्ली आबकारी नीति मामले में कथित अनियमितताओं में 'पूरी तरह से शामिल' हैं. (File Photos)

भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया दिल्ली आबकारी नीति मामले में कथित अनियमितताओं में 'पूरी तरह ...अधिक पढ़ें

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया दिल्ली आबकारी नीति मामले में कथित अनियमितताओं में ‘पूरी तरह से शामिल’ हैं. भाजपा ने कहा कि इस मामले की जांच के सिलसिले में जब सिसोदिया के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई, तो दिल्ली के उपमुख्यमंत्री ने एक दिन में 4 मोबाइल हैंडसेट और दो-तीन महीने में 14 हैंडसेट बदले. बीजेपी ने आरोप लगाया कि मनीष सिसोदिया ने अपने खिलाफ डिजिटल एविडेंस को नष्ट करने के मकसद से ऐसा किया. भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने दिल्ली के पार्टी मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, ‘कुछ दिन पहले अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि दिल्ली आबकारी नीति में कोई घोटाला नहीं हुआ है. क्योंकि सीबीआई और ईडी ने मनीष सिसोदिया को क्लीन चिट दे दी है. चार्जशीट में उनका नहीं है.’

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पात्रा ने आरोप लगाया कि दिल्ली आबकारी नीति केस में मनीष सिसोदिया की बड़ी भूमिका है. भाजपा नेता ने कहा, ‘वह सिर्फ गले तक नहीं बल्कि दिल्ली में शराब घोटाले में पूरी तरह डूबे हुए हैं.’ प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान संबित पात्रा ने एक रिमांड नोट पेश किया. उन्होंने दावा किया कि यह रिमांड नोट प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दिल्ली की एक अदालत में जमा किया गया था, जिसमें कहा गया है, ‘सीबीआई द्वारा 17 अगस्त, 2022 को मनीष सिसोदिया के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की गई. अमित अरोड़ा नाम के एक व्यक्ति ने मामले में पैसे लिए और दिए थे. अमित अरोड़ा को ईडी ने गिरफ्तार किया था और हिरासत में लेते हुए ये दस्तावेज कोर्ट में पेश किए थे. 32 पेज के रिमांड नोट से पता चलता है कि आबकारी पुलिस घोटाला मामले में मनीष सिसोदिया के खिलाफ जांच चल रही है. उन पर लगे आरोप गंभीर हैं. ईडी और सीबीआई ने गिरफ्तार लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है. इन सभी का कनेक्शन मनीष सिसोदिया से है. दोनों एजेंसियां मनीष सिसोदिया के खिलाफ पुख्ता दस्तावेज तैयार कर रही हैं.’

भाजपा नेता ने कहा, ‘दस्तावेज के अनुसार, मनीष सिसोदिया के खिलाफ सीबीआई द्वारा 17 अगस्त, 2022 को एक प्राथमिकी दर्ज की गई थी. ऑफिस मेमो ने खुलासा किया कि उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, तत्कालीन आबकारी आयुक्त अरवा गोपी कृष्णा और अन्य ने आबकारी नीति में कुछ लोगों को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए आदेश देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी.’ संबित पात्रा ने आगे आरोप लगाया, ‘मनीष सिसोदिया ने मामले में डिजिटल सबूत नष्ट करने के लिए लोगों से सलाह ली होगी. क्योंकि उन्होंने अपने खिलाफ सीबीआई की प्राथमिकी के बाद एक दिन में 4 मोबाइल हैंडसेट और दो-तीन महीने में 14 हैंडसेट बदले. उन्होंने डिजिटल सबूत नष्ट करने के लिए दिल्ली के सीएम केजरीवाल, आप नेता विजय नायर, शराब घोटाले के आरोपी अमित अरोड़ा और सनी मारवाह से सलाह ली होगी.’

क्या है दिल्ली आबकारी नीति मामला?
पात्रा ने आरोप लगाया कि दिल्ली के पूर्व आबकारी मंत्री सिसोदिया सहित आरोपियों द्वारा ‘डिजिटल सबूतों को बड़े पैमाने पर नष्ट’ किया गया. कथित दिल्ली शराब घोटाले में 36 आरोपियों ने 170 मोबाइल फोन नष्ट किए. दिल्ली एलजी ने जुलाई में दिल्ली के मुख्य सचिव की ओर से दायर रिपोर्ट के निष्कर्षों के आधार पर नई आबकारी नीति में क​थित अनियमितताओं के खिलाफ सीबीआई जांच की सिफारिश की थी. उपराज्यपाल को भेजी गई रिपोर्ट में दिल्ली के मुख्य सचिव ने कहा था कि नई आबाकरी नीति में राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) अधिनियम 1991, व्यापार नियम (टीओबीआर) -1993, दिल्ली सरकार का आबकारी अधिनियम -2009, और दिल्ली आबकारी नियम -2010, का प्रथम दृष्टया उल्लंघन किया गया.

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अक्टूबर में, ईडी ने मामले में दिल्ली के जोर बाग स्थित शराब वितरक इंडोस्पिरिट ग्रुप के प्रबंध निदेशक समीर महेंद्रू की गिरफ्तारी के बाद दिल्ली और पंजाब में लगभग तीन दर्जन स्थानों पर छापेमारी की थी. आबकारी विभाग ने निर्धारित नियमों के विरुद्ध एक सफल निविदाकर्ता को लगभग 30 करोड़ रुपये की अर्नेस्ट मनी डिपोजिट वापस करने का निर्णय लिया था. भले ही कोई सक्षम प्रावधान नहीं था, COVID-19 के कारण 28 दिसंबर, 2021 से 27 जनवरी, 2022 तक निविदा लाइसेंस शुल्क पर छूट की अनुमति दी गई थी. इससे सरकारी खजाने को कथित तौर पर 144.36 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. दिल्ली के लेफ्टिनेंट-गवर्नर विनय कुमार सक्सेना की सिफारिश के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में सीबीआई जांच की अनुमति दी.

Tags: Excise Policy, Manish sisodia, New excise policy

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