मनीष सिसोदिया का केंद्र पर आरोप- हमारे वैज्ञानिकों ने बनाई वैक्सीन, देश के लोगों को ही नहीं मिल रही

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. (twitter)

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है. (twitter)

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने वैक्सीन की कमी के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये लिखा, "हमारे ही वैज्ञानिकों की बनाई वैक्सीन हमारे ही लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है.

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नई दिल्ली. दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने वैक्सीन की कमी के लिए केंद्र सरकार को ज़िम्मेदार ठहराया है. उन्होंने सोशल मीडिया के जरिये लिखा, "हमारे ही वैज्ञानिकों की बनाई वैक्सीन हमारे ही लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है." उन्होंने एक के बाद एक कई ट्वीट किए और लिखा कि बीते तीन महीनों में केंद्र सरकार ने 93 देशों को कोरोना वैक्सीन की 6.5 करोड़ डोज निर्यात की है.

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा 'कोरोना महामारी की दूसरी लहर ने भारत में करीब एक लाख लोगों की जान ली है, अगर वैक्सीन का निर्यात नहीं किया जाता तो लोगों की जान बचाई जा सकती थी. अंतरराष्ट्रीय जगत की चिंता करना अच्छी बात है, लेकिन अमेरिका, कनाडा, यूरोप के देश, पहले दुनिया भर से, अपने लोगों के लिए वैक्सीन का इंतज़ाम करने में लगे हैं. केवल फ्रांस ने पिछले महीने 1 लाख वैक्सीन एक्सपोर्ट की हैं.'

Manish Sisodia has made a big charge on the Center - Vaccine made by our scientists, not available for the country
दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने केंद्र सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है.

उन्होंने लिखा, 'जब इतनी वैक्सीन बन गई थी तो इसे अपने लोगों को देकर बेहतर कोरोना मैनेजमेंट हो सकता था, लेकिन केंद्र सरकार इंटर्नेशनल इमेज मेनेजमेंट में लगी रही.' वहीं मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखकर राज्य को 60 लाख डोज दिलाने की अपील की है. उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय से अपील की है कि वो सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया और भारत बायोटेक को मई से जुलाई के दौरान दिल्ली को कोरोना के टीके की 60 लाख डोज देने का आदेश दें.
दूसरी लहर में एक लाख लोग मरे, जिसमें युवा सबसे ज्यादा 

सिसोदिया ने कहा कि दूसरे लहर में हमारे परिवार, सगे-संबधियों और वॉल्टिंयरों की मौत हो गई. 1 लाख लोग जो मरे है उसमें बड़ी तादाद में युवा है. हमें सिर्फ 5.5 लाख वैक्सीन दिए जाते है। और दुनियां के 93 देशों को 6.5 करोड़ वैक्सीन दिए जाते है. विदेशों को वैक्सीन देने के पीछे केंद्र सरकार की मंशा सिर्फ छवि प्रबंधन करना था. खैर जो हुआ वो हुआ भारत सरकार दूसरे देशों से सीखे पहले देशवासियों को वैक्सीन उपलब्ध कराये. दिल्ली में तीन महीनों में सभी को वैक्सीन दे देंगे बस सरकार हमें वैक्सीन उपलब्ध कराये. 

केंद्र सरकार को वैक्सीन निर्माताओं पर सक्रियता से नजर रखनी चाहिए



साथ ही राज्यों को टीकाकरण के लिए अलग से ऐप या मैकेनिज़्म बनाने की इजाजत दी जाए. उन्होंने पत्र में लिखा है कि सभी नागरिकों के टीकाकरण के लिए केंद्र सरकार को राज्य सरकारों को ज़रूरी मात्रा में टीके उपलब्ध कराने चाहिए. केंद्र सरकार को निजी वैक्सीन निर्माताओं पर सक्रियता से निगरानी रखनी चाहिए ताकि सभी राज्य सरकारों को पर्याप्त मात्रा में टीके की आपूर्ति हो सके और इस महत्वपूर्ण पहलू को निजी निर्माताओं के विवेक पर नहीं छोड़ना चाहिए. पत्र में ये भी लिखा है कि सरकारों (केंद्र और राज्य दोनों) और निजी अस्पतालों के लिए टीके का एक-एक समान मूल्य तय किया जाना चाहिए. अलग-अलग कीमतों के कारण वैक्सीन निर्माताओं को सरकार के बजाय निजी अस्पतालों को प्राथमिकता देने में फायदा मिलेगा.

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