दिल्ली के 2.2 लाख कर्मचारियों की सैलरी पर संकट, जानें डिप्टी CM ने कौन सा उपाय सुझाया
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दिल्ली के 2.2 लाख कर्मचारियों की सैलरी पर संकट, जानें डिप्टी CM ने कौन सा उपाय सुझाया
डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया. (फाइल फोटो)

मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) के मुताबिक दिल्ली को न्यूनतम 5000 करोड़ रुपये की जरूरत है. आपदा राहत कोष से अन्य राज्यों को केंद्र सरकार (Central Government) की मदद मिली है, लेकिन दिल्ली को नहीं.

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नई दिल्ली. दिल्‍ली के डिप्‍टी सीएम और वित्‍त मंत्री मनीष सिसोदिया (Manish Sisodia) ने केंद्र सरकार (Central Government) से 5000 करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता मांगी है. रविवार को सिसोदिया ने बताया कि दिल्‍ली सरकार (Delhi Government) के सामने कर्मचारियों को सैलरी देने का संकट पैदा हो गया है. सिसोदिया ने केंद्रीय वित्तमंत्री को पत्र लिखकर सहायता मांगी है, ताकि इससे शिक्षकों, डॉक्टर, इंजीनियर, सिविल डिफेंस के लोग तथा कोरोना राहत में जुटे अन्य कर्मियों को सैलरी का भुगतान हो सके. बता दें कि दिल्ली में तकरीबन 2.2 लाख कर्मचारी और पेंशनभोगी हैं. साथ ही दिल्ली के तीनों नगर निगम को भी दिल्ली सरकार ही पैसे देती है.

दिल्ली सरकार के राजस्व में आई कमी

रविवार को सिसोदिया ने कहा है कि आपदा राहत कोष से अन्य राज्यों को सहायता मिली है. इसलिए दिल्ली को सहायता मिले. दिल्ली में राजस्व संग्रह गत वर्ष की तुलना में 78% कम गया है. इस बारे में दिल्ली सरकार ने 26 मई को ही केंद्रीय वित्तमंत्री को पत्र लिखा. रविवार को ऑनलाइन प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए सिसोदिया ने यह जानकारी दी.



3500 करोड़ का मासिक खर्च



बता दें कि लॉकडाउन के कारण पूरे देश की अर्थव्यवस्था पर बुरा असर पड़ा है. दिल्ली पर भी इसका काफी असर हुआ है. दिल्ली सरकार ने अपने न्यूनतम खर्च की समीक्षा की है. इसके अनुसार केवल सैलरी तथा ऑफिस खर्च पर न्यूनतम 3500 करोड़ का मासिक खर्च है. विगत दो माह में जीएसटी (GST) से मात्र 500 करोड़ मासिक का संग्रह हुआ है. जीएसटी तथा अन्य स्रोत मिलाकर प्रथम तिमाही में कुल 1735 करोड़ रुपये मात्र का संग्रह हुआ है.

किस-किस को देने हैं पैसे

मनीष सिसोदिया के मुताबिक, पिछले साल इस अवधि में 7799 करोड़ का राजस्व संग्रह हुआ था. इस साल राजस्व में 78 फीसदी की गिरावट आई है. वर्तमान में दिल्ली को न्यूनतम 5000 करोड़ की आवश्यकता है. आपदा राहत कोष से अन्य राज्यों को केंद्र सरकार से मदद मिली है, लेकिन दिल्ली सरकार को कोई मदद नहीं मिली. सामान्य तौर पर भी केंद्र द्वारा दिल्ली सरकार को कोई आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है. लेकिन अभी जब दिल्ली में राजस्व संग्रह नहीं हो रहा, तब केंद्र से मदद मिलना जरूरी है. इससे हम कर्मचारियों, शिक्षकों, डॉक्टर, इंजीनियर, सिविल डिफेंस के लोग तथा कोरोना राहत में जुटे अन्य कर्मियों को सैलरी का भुगतान कर पाएंगे.

दिल्ली अपने संसाधनों से खर्च उठाने में सक्षम?

बता दें कि दिल्ली सरकार ने वित्त वर्ष 2020-21 में दिल्ली विधानसभा ने 65000 करोड़ का बजट पास किया है. इसमें 35500 करोड़ का खर्च स्थापना, लोकल बॉडीज को योगदान तथा ब्याज इत्यादि में होता है. सामान्य स्थिति में दिल्ली अपने संसाधनों से अपना खर्च उठाने में सक्षम है, लेकिन मौजूदा संकट में केंद्र की मदद आवश्यक है. केंद्र से 5000 करोड़ अनुदान मिलने पर दिल्ली नगर निगम को वेतन तथा स्थापना व्यय देने में भी सुविधा होगी.

सिसोदिया के मुताबिक, दिल्ली सरकार ने कोरोना से लड़ने के लिए अस्पतालों को अपग्रेड किया है. पीपीई, वेंटीलेटर, टेस्टिंग किट, सैनिटाइजर, एन-95 मास्क इत्यादि का समुचित प्रबंध किया है. जरूरतमंद लोगों के लिए भोजन तथा राशन वितरण के अलावा प्रवासी मजदूरों को उनके घर भेजने संबंधी रेलवे का किराया भी दिल्ली सरकार भुगतान कर रही है.

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