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चौपाल: मटिया महल में अधूरे काम AAP के लिए मुसीबत बन सकते हैं

Ravishankar Singh | News18Hindi
Updated: January 15, 2020, 6:19 PM IST
चौपाल: मटिया महल में अधूरे काम AAP के लिए मुसीबत बन सकते हैं
मटिया महल विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका अदा करते हैं.

मटिया महल विधानसभा क्षेत्र (Matia Mahal Assembly constituency) में टूटी हुई संकीर्ण गलियों, पाइपलाइन से पानी की कमी और सीवर कनेक्शन क्षेत्र के मुख्य मुद्दे हैं. संकरी सड़कों के साथ बिजली तारों के जंजाल भी लोगों की चिंता का मुख्य कारण है. इस क्षेत्र में अधूरे काम इस बार आप (AAP) के लिए मुसीबत बन सकते हैं.

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नई दिल्ली. दिल्‍ली के 70 विधानसभा क्षेत्रों में मटिया महल (Matia Mahal Assembly Constituency) भी एक विधानसभा क्षेत्र है, जहां पर मुस्लिम वोटर्स निर्णायक भूमिका अदा करते हैं. मटिया महल में मुस्लिम वोटर्स की अच्छी खासी तादाद है. मटिया महल चांदनी चौक लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र (Channdni Chowk Lok Sabha Seat) में आता है. इस सीट पर कांग्रेस की जीत कभी नसीब नहीं हुई. वर्तमान में यहां से आम आदमी पार्टी के आसिम अहमद खान विधायक हैं, जिन्हें इस बार टिकट नहीं दिया गया है. 2015 के विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार आसिम अहमद खान को 59.23 फीसदी वोट मिले थे. पिछली बार कांग्रेस पार्टी की टिकट पर लड़ने वाले शोएब इकबाल को इस बार आम आदमी पार्टी ने टिकट दिया है. शोएब इकबाल हाल ही में आप में शामिल हुए हैं. शोएब इकबाल इस सीट से पांच बार विधायक रह चुके हैं.

मटिया महल सीट कांग्रेस नहीं जीत सकी है

मुस्लिम आबादी की संख्या ज्यादा होने के कारण यहां पर धार्मिक कार्ड भी खूब खेला जाता है. खासकर चुनावों में इस सीट पर धार्मिक कार्ड का महत्वपूर्ण रोल होता है. जामा मस्जिद से सटे होने के कारण चुनाव के दौरान यहां पर शाही इमाम और गैरशाही इमाम ग्रुप में बंट जाते हैं. इसके बावजूद टूटी हुई संकीर्ण गलियों, पाइपलाइन से पानी की कमी और सीवर कनेक्शन क्षेत्र के मुख्य मुद्दे हैं. संकरी सड़कों के साथ बिजली तारों के जंजाल भी लोगों की चिंता का मुख्य कारण है. इस क्षेत्र में अधूरे काम इस बार आप के लिए मुसीबत बन सकते हैं.

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संकरी सड़कों के साथ बिजली तारों के जंजाल भी लोगों की चिंता का मुख्य कारण है


22 साल का इरफान बात करते-करते राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर बेहद संजीदा हो जाता है. इरफान कहता है, देखिए इस समय देश में कई मुद्दे हैं जिसको हिंदू भी स्वीकार नहीं कर रहे हैं. हमारे बगल में गुप्ता जी का दुकान है. उनके यहां से हमारा रोटी-पानी का संबंध है. हम उनके बिना नहीं रह सकते और वह मेरे अब्बू के बिना नहीं रह सकते. ये आज का संबंध नहीं है. यह संबंध कई सालों से चला आ रहा है. वह भी सरकार से नाराज हैं. जो हमारी बातें सुनेगा, हमारे दुख-सुख का सहभागी बनेगा हम उनके साथ जाना पसंद करेंगे. जो बांटने और तोड़ने की बात करेगा उससे हमारा या हमारे कौम का कोई संबंध नहीं होगा.'

जाम की समस्या से लोग परेशान हैं

मटिया महल पुलिस चौकी से सटे एक मिठाई दुकान में जब पहुंचे तो कई मुस्लिम भी मिठाई खरीद रहे थे. उन्हीं में से एक बुजुर्ग मुस्लिम ताज हसन कहते हैं, 'देखिए जनाब चुनाव में किसका लहर है और कौन जीतेगा ये तो मैं नहीं कह सकता है. लेकिन, मैं इतना जरूर कहूंगा कि केजरीवाल ने अच्छा काम किया है. इस इलाके में जाम की समस्या है. आपको पैदल चलने में भी कई जगहों पर 4 से 5 मिनट का इंतजार करना पड़ता है. ठेला, रिक्शा और दो पहिया वाहनों से जब ये हाल है तो चार चक्का गाड़ी आ जाए तो क्या हाल होगा. मुझे इस मिठाई को घर तक पहुंचाने के लिए शरीर ज्यादा मिठाई पर ध्यान देना पडे़गा. अब हम कहेंगे की केजरीवाल यह ठीक क्यों नहीं किया तो ये तो उसके साथ नाइंसाफी होगी.'
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इस सीट पर कांग्रेस और आप के बीच मुख्य मुकाबला देखने को मिल सकता है.


बता दें कि वैसे तो दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच सीधी टक्कर मानी जा रही है, लेकिन इस सीट पर कांग्रेस और आप के बीच मुख्य मुकाबला देखने को मिल सकता है. मटिया महल के लोगों से बात करने के मालुम चला कि आसिम अहमद खान भी टिकट के जुगाड़ में लगे हैं. दिल्ली सरकार में मंत्री रहते उनका एक महिला के साथ वीडियो वायरल हुआ था, जिसके बाद से उनको मंत्री पद और पार्टी दोनों से हाथ धोना पड़ा था.

संकरी गली में पैदल निकलना भी मुश्किल

इसके बावजूद लोग कहते हैं कि अगर कांग्रेस पार्टी अच्छा उम्मीदवार देती है तो इस सीट पर आप का खेल बिगड़ सकता है. बात अगर दिल्ली के मटिया महल विधानसभा क्षेत्र की करें तो लोगों का कहना है कि अरविंद केजरीवाल के पांच साल के कार्यकाल में बहुत सुधार हुए हैं. हालांकि कुछ लोगों को मलाल है कि विकास कार्य शुरू तो हुए हैं पर अभी तक पूरा नहीं हो सका है. वैसे बिजली, पानी को लेकर लोग केजरीवाल सरकार की तारीफ करने से नहीं थकते.

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शीला दीक्षित के नेतृत्व में लगातार 15 साल दिल्ली की सत्ता में रहने वाली कांग्रेस यहां से नहीं जीत सकी.


बता दें कि इस निर्वाचन क्षेत्र में ऐतिहासिक अजमेरी गेट, चांदनी महल, चट्टा लाल मियां, चावड़ी बाजार, लाल कुआं, सीताराम बाजार, सुईवालान, चितली कबार, चुरीवालन, दिल्ली गेट, हौज काजी जैसे एरिया शामिल हैं. यहां की सड़कें काफी संकरी हैं और आबादी काफी घनी. संकरी गलियों वाले इस क्षेत्र से कांग्रेस कभी भी जीतने में सफल नहीं हो सकी. शीला दीक्षित के नेतृत्व में लगातार 15 साल दिल्ली की सत्ता में रहने वाली कांग्रेस यहां से नहीं जीत सकी.

बिजली की तारों का जंजाल

इस सीट पर शोएब इकबाल 1993 और 1998 में जनता दल के टिकट पर चुने गए. 2003 में वह जनता दल (सेक्युलर) का हिस्सा रहे और एक बार फिर उन्होंने जीत दर्ज की. अगली बार 2008 में उन्होंने लोक जनशक्ति पार्टी और 2013 में जनता दल (युनाइटेड) से पांचवीं बार विधायक का चुनाव जीता.

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First published: January 15, 2020, 6:11 PM IST
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