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AAP या BJP, MCD में किसका होगा मेयर? अभी भी फंसा है पेंच, जानें पूरा गणित

दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलने के बाद भी बीजेपी अपना मेयर बनाने का दावा कर रही है.

दिल्ली नगर निगम में आम आदमी पार्टी को बहुमत मिलने के बाद भी बीजेपी अपना मेयर बनाने का दावा कर रही है.

केंद्र सरकार ने तीन हिस्सों में बंटे दिल्ली नगर निगम को नए परिसमन के साथ एक कर दिया है. दिल्ली में 272 वार्ड को कम करके ...अधिक पढ़ें

Delhi MCD Election 2022: दिल्ली नगर निगम चुनाव के नतीजे लगभग आ चुके हैं. आम आदमी पार्टी 122 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी के रूप में सामने आई है. भारतीय जनता पार्टी 107 सीटों पर आगे चल रही है. कांग्रेस दहाई का आंकड़ा भी नहीं छू पाई है. कांग्रेस 7 सीटों पर आगे है. 3 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की है.

अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी एमसीडी का 15 सालों का इतिहास बदलते हुए सत्ता पर काबिज होने जा रही है. एक तरफ जहां आम आदमी पार्टी लगभग जीत का आंकड़ा हासिल कर चुकी है, वहीं बीजेपी नेता अभी भी नगर निगम में बीजेपी का मेयर होने का दावा कर रहे हैं. बीजेपी नेताओं के इस दावे और विश्वास के पीछे आखिर वजह क्या है. इसकी हमने गहनता से पड़ताल की है.

दरअसल, इस बार एमसीडी चुनाव में मेयर यानी महापौर की कुर्सी सबसे अहम मानी जा रही है. क्योंकि इन चुनावों में मेयर बीते 15 सालों के मुकाबले अधिक पावरफुल होकर उभरेगा. अभीतक एमसीडी तीन हिस्सों में बंटी हुई थी और तीन मेयर चुने जाते थे. इसलिए मेयर की ताकत भी तीन हिस्सों में बंटी हुई थी. लेकिन इस बार एक मेयर होगा और तीन मेयर की पॉवर एक मेयर के पास होगी. इसलिए जिस पार्टी का मेयर होगा, उसी का सिक्का चलेगा.

मेयर का चुनाव केंद्र सरकार के हाथ
एमसीडी नियमानुसार, मेयर का चुनाव वित्त वर्ष के शुरूआत में हो जाना चाहिए. दिल्ली नगर निगम में मेयर एक साल के लिए चुना जाता है. इसलिए महापौर का चुनाव हर हाल में अप्रैल महीने में हो जाना चाहिए. नगर निगम की पहली बैठक में मेयर के चुनाव के लिए सभी दल अपना प्रत्याशी खड़ा करते हैं और सभी पार्षद वोट करते हैं. लेकिन इस बार चुनाव दिसंबर में हुए हैं. इसलिए मेयर चुनने का अधिकार स्वत: ही केंद्र सरकार के पास चला जाता है. ऐसे में मेयर के चुनाव में केंद्र सरकार की अहम भूमिका होगी.  नियमों के मुताबिक दिल्ली नगर निगम के कमिश्नर चीफ सेकरेट्री के जरिए उपराज्यपाल को बैठक आहूत करने और मेयर के चुनाव के लिए प्रिसाइडिंग ऑफिसर नियुक्त करने को लिखेंगे. ये भी बताया जा रहा है कि परंपरा के मुताबिक उप राज्यपाल गृहमंत्रालय से हरी झंडी मिलने के बाद इसकी स्वीकृति देंगे.

राज्य सभा और लोक सभा सदस्य भी मतदाता हैं

मेयर के चुनाव में लोक सभा और राज्य सभा सदस्य भी वोट देतें हैं. इस तरह से 7 लोक सभा सदस्यों के वोट बीजेपी के पक्ष में उसके कुल पार्षदों की संख्या में जुड़ जाएंगे. यानी पार्टी के जितने भी पार्षद जीतेंगे उसमें ये सात की संख्या मेयर के चुनाव के लिहाज से बढ़ जाएगी.

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एमसीडी के नियमानुसार, एमसीडी का पहला मेयर महिला ही होती है. इसलिए आम आदमी पार्टी और बीजेपी अपने-अपने दलों में मेयर के लिए महिला उम्मीदवारों को तलाश रहे हैं.

चूंकि एमसीडी चुनावों में आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच जीत का अंतर बहुत बड़ा नहीं है. इसलिए दोनों ही दल, बीजेपी और आप, अपने-अपने मेयर को जीतने में हर संभव कोशिश करेंगे.

राजनीतिक विश्लेषक एके मिश्रा के मुताबिक दिल्ली नगर चुनाव में दल-बदल कानून लागू नहीं होता है. इसलिए पार्षदों का इधर-उधर हो जाना कोई बड़ी बात नहीं है. कुछ लोग यहां तक दावा कर रहे हैं कि बीजेपी ने अन्य दलों के जीते हुए पार्षदों से संपर्क बनाना भी शुरू कर दिया है. सात सांसदों की संख्या बीजेपी के वोटर तो है ही.

बीजेपी सांसद मनोज तिवारी शुरू से ही दावा कर रहे हैं कि नगर निगम में मेयर बीजेपी का ही होगा. सूत्रों का कहना है कि बीजेपी के वरिष्ठ नेता उन पार्षदों की तलाश में निकल पड़े हैं जो दल बदल सकते हैं.

Tags: AAP, BJP, Delhi, Delhi MCD Election 2022, Delhi MCD Elections

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