वॉटर‌ लॉगिंग से निपटने को MCD ने तैयार किया Action Plan, 20 जून से पहले पूरे होंगे ये सभी काम

मानसून में दिल्ली को वाटर लॉगिंग जैसी भीषण समस्या से बचाने काे एससीडी ने एक्शन प्लान तैयार किया है. (File Photo)

मानसून में दिल्ली को वाटर लॉगिंग जैसी भीषण समस्या से बचाने काे एससीडी ने एक्शन प्लान तैयार किया है. (File Photo)

दिल्ली में 5 एजेंसियों के अंतर्गत नाले आते हैं. इनमें से 4 एजेंसियां दिल्ली सरकार के अधीनस्थ आती हैं जिनमें PWD, DSIDC, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और DJB प्रमुख रूप से शामिल हैं. इनके अंतर्गत सभी बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट से ज्यादा गहरे नाले होते हैं. तीनों MCD के अंतर्गत कुल 683 बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट गहरे हैं. इनकी सफाई का कार्य 20 जून तक पूरा कर लिया जाएगा.

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नई दिल्ली. दिल्ली में हर साल मानसून (Monsoon) के दौरान राजधानी की सड़कें पानी से लबालब हो जाती है. लेकिन इस बार मानसून आने से पहले दिल्ली की तीनों नगर निगमों ने इससे निपटने के लिए तैयारियां शुरू कर दी है. दिल्ली को वाटर लॉगिंग (Water Logging) जैसी भीषण समस्या से किस तरह से बचाया जा सके, इसको लेकर MCDs की ओर से एक्शन प्लान (ActionPlan) तैयार किया गया है.

इस बीच देखा जाए तो दिल्ली में मानसून से पहले नालों की सफाई हो जाती है तो वाटर लॉगिंग (Water Logging) जैसी समस्या से राजधानी को निजात मिल जाएगी. इसको लेकर दिल्ली नगर निगम (Municipal Corporation of Delhi) ने अभी से कमर कस ली है. दिल्ली की तीनों नगर निगम नॉर्थ दिल्ली नगर निगम (North MCD), साउथ दिल्ली नगर निगम (South MCD), और ईस्ट दिल्ली नगर निगम (East MCD) ने अपने नालों की सफाई को लेकर पूरी रणनीति तैयार कर ली है. और इस पर तेजी से काम करना भी शुरू कर दिया है.

बताते चलें कि दिल्ली में 5 एजेंसियों के अंतर्गत नाले आते हैं. इनमें से 4 एजेंसियां दिल्ली सरकार (Delhi Government) के अधीनस्थ आती हैं जिनमें लोक निर्माण विभाग (PWD), डीएसआईडीसी (DSIDC), सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग और दिल्ली जल बोर्ड (Delhi Jal Board) प्रमुख रूप से शामिल हैं. इन एजेंसियों के अंतर्गत दिल्ली के वह सभी बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट से ज्यादा गहरे नाले होते हैं.

वहीं 4 फुट से कम गहरे और सभी छोटे नाले दिल्ली की तीनों नगर निगमों (Corporations) के अंतर्गत आते हैं. इन सभी नालों की सफाई करने की जिम्मेदारी तीनों नगर निगमों की होती है.
अहम बात यह है कि वाटर लॉगिंग से बचने के लिए दिल्ली की नगर निगम अगर अपने सभी नालों की साफ-सफाई कर लेती है तो बड़े नालों की सफाई होना भी बेहद जरूरी हो जाता है. इसके पीछे यह वजह मानी जाती है कि इन सभी छोटे नालों यानी 4 फुट से कम गहरे नालों का पानी इन सभी बड़े नालो में गिरता है. अगर बरसात से पहले इन सभी बड़े नालों की सफाई नहीं होती है तो ओवरफ्लो के चलते वॉटर लॉगिंग की समस्या पूरी राजधानी में पैदा हो सकती है.

निगम अधिकारियों के मुताबिक नॉर्थ दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत कुल 192 नाले आते हैं. वहीं, साउथ दिल्ली नगर निगम के अंतर्गत 272 और ईस्ट दिल्ली नगर निगम के अधीन 219 नाले आते हैं. तीनों नगर निगम के अंतर्गत कुल 683 बड़े नाले आते हैं जो कि 4 फुट गहरे हैं. बाकी सभी 4 फुट से बड़े नाले दिल्ली सरकार के अधीनस्थ आने वाली एजेंसियों के होते हैं. इन नालों की सफाई को लेकर अभी किसी प्रकार की सूचना नहीं मिल पाई है.

नॉर्थ दिल्ली नगर निगम के मेयर जय प्रकाश का कहना है कि दिल्ली के सभी बड़े नाले दिल्ली सरकार के अंतर्गत आते हैं. उत्तरी निगम के अंतर्गत 4 फीट गहरे 192 बड़े नाले आते हैं जिनकी लंबाई 112.25 किलोमीटर है. वहीं, 515 छोटे नाले भी आते हैं जिनकी लंबाई 492 किलोमीटर है.



वहीं, दिल्ली के तीनों नगर निगमों के छोटे नालों की निकासी दिल्ली सरकार के इन विभागों के बड़े नालों में है. यदि सभी एजेंसियां मिलकर मॉनसून से पहले कार्य करें तो दिल्ली को जल भराव की स्थिति से बचाया जा सकता है.

इन नालों से गाद निकालने का कार्य लगभग पूरा हो चुका है. गाद निकालने के कार्य में 555 नाला बेलदार, 16 सक्शन मशीन, 2 सुपर शकर मशीन और जेसीबी जैसे अत्याधुनिक मशीनों को लगाया गया है. इन नालों से 8312 मीट्रिक टन गाद निकाल कर भलस्वा लैंडफिल साइट पर भेजी गई है.

मेयर का कहना है कि लोक निर्माण विभाग अभी तक सिर्फ अपने अधीनस्थ नालों से 124.34 मीट्रिक टन गाद ही निकाल कर भलस्वा लैंडफिल साइट्स पर भेजी है.

रेल अंडर ब्रिज पर पंपिंग स्टेशन सही तरीक़े से कार्य कर रहे हैं

मेयर का कहना है कि नॉर्थ निगम के अंतर्गत आने वाले सभी रेल अंडर ब्रिज पर पंपिंग स्टेशन सही तरीक़े से कार्य कर रहे हैं. साथ ही 127 छोटे पम्पों की व्यवस्था भी की गई है ताकि जरूरत पड़ने पर इनका उपयोग किया जा सके.

सभी विभागों को पत्र लिखकर अधीनस्थ नालों से गाद निकालने का अनुरोध

निगम ने सभी विभागों को पत्र लिखकर अपने-अपने क्षेत्रों में आने वाले नालों से गाद निकालने का अनुरोध किया है ताकि मॉनसून के समय दिल्ली में जल भराव की स्थिति उत्पन्न न हो और पानी और मच्छर जनित बीमारियां पैदा न हो.

NDMC ने 6 जोनों में बनाये हैं कंट्रोल रूम

उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष जहां-जहां जल भरा हुआ था उसकी एक सूची बनाकर उन पर कार्य किया जा रहा है ताकि दोबारा जलभराव की स्थिति उन स्थानों पर न हो. स्थिति से निपटने के लिए NDMC ने सभी छह जोनों में नियंत्रण कक्ष बनाए हैं और मुख्यालय स्तर पर भी एक नियंत्रण कक्ष बनाया गया है जो 24x7 कार्य करेगा.

SDMC ने नालों से निकाली 60-65% तक गाद

साउथ दिल्ली की मेयर अनामिका मिथिलेश ने बताया कि साउथ दिल्ली नगर निगम (SDMC) ने नालों से गाद निकालने का कार्य 60-65% तक पूरा कर लिया है. उन्होंने बताया कि SDMC के अंतर्गत 272 नाले हैं जिनकी कुल लंबाई 188.38 किलोमीटर है. इन नालों से लगभग 16,000 मीट्रिक टन गाद निकाली जा चुकी है.

EDMC 20 जून तक‌ पूरा करेगी नालों की सफाई का काम

उधर, ईस्ट दिल्ली के मेयर निर्मल जैन का कहना है कि ईडीएमसी के अंतर्गत 219 नाले हैं जिनकी कुल लंबाई 121 किलोमीटर है. EDMC ने 46,000 मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य रखा है, जिसमें से 10,000 मीट्रिक टन गाद निकालने का कार्य अभी तक पूरा किया जा चुका है और शेष कार्य 20 जून तक पूरा कर लिया जाएगा. निगम ने वॉटर लॉगिंग से निपटने के लिये 180 छोटे पम्पों की व्यवस्था की है जिनका प्रयोग जरूरत पड़ने पर किया जाएगा.

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