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नोएडा से दिल्ली कूच पर निकले किसान, पुलिस ने रोका तो सड़क पर बैठकर विरोध करने लगे प्रदर्शनकारी

केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन रविवार को 11वें दिन भी जारी है.
केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन रविवार को 11वें दिन भी जारी है.

दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए भारतीय किसान संघ लोक शक्ति के सदस्यों ने नोएडा में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल से दिल्ली की ओर कूच शुरू कर दिया है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 6, 2020, 4:37 PM IST
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नोएडा. केंद्र के तीन नए कृषि कानूनों (Farm Laws) के खिलाफ किसानों का आंदोलन (Farmers Protest) रविवार को 11वें दिन भी जारी है. दिल्ली की विभिन्न सीमाओं पर धरना दे रहे किसानों को समर्थन देने के लिए भारतीय किसान संघ लोक शक्ति के सदस्यों ने नोएडा में राष्ट्रीय प्रेरणा स्थल से दिल्ली की ओर कूच शुरू कर दिया है. ये किसान कालिंदी कुंज के रास्ते दिल्ली की ओर बढ़ रहे हैं, जिसे देखते हुए वहां भारी संख्या में पुलिस बल तैनात करके बैरिकेडिंग लगा दी गई है. हालांकि पुलिस उन्‍हें बैरिकेडिंग से आगे नहीं बढ़ने दिया तो वह सड़क पर बैठकर विरोध कर रहे हैं. इस दौरान वह मोदी और योगी सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी कर रहे हैं.

वहीं साउथ दिल्ली के डीसीपी राजेश एस ने कहा कि डीएनडी और कालिंदी कुज पर हमारी गाड़ियां खड़ी है और भारी फोर्स तैनात है, लेकिन हम अपील करेंगे कि ये आगे न बढ़ें.


वहीं भारतीय किसान यूनियन के बैनर तले दिल्ली जा रहे किसान फरीदाबाद के अजरौंदा चौक बसंत वाटिका में रात्रि विश्राम के बाद दिल्ली-फरीदाबाद बॉर्डर के लिए निकले थे, लेकिन फरीदाबाद पुलिस ने उनको बदरपुर फ्लाईओवर से कई किलोमीटर पहले ही रोक दिया. इसके बाद किसान नेताओ ने चेतावनी देते हुए कहा कि वह प्रशासन की हर बात मानते हुए पैदल ही चल रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बेवजह ही रोक दिया लेकिन वह हर हालत में फरीदाबाद बॉर्डर पर जाकर रहेंगे.



विपक्ष के बहकावे में न आएं किसान- कृषि राज्यमंत्री
कृषि राज्‍य मंत्री कैलाश चौधरी (kailash choudhary) ने कहा कि विपक्ष किसानों को भड़काने का काम कर रहा है. कुछ राजनीतिक लोग आग में घी डालने का काम कर रहे हैं. इस बिल के माध्यम से किसानों को आज़ादी मिली है.  इसके साथ ही उन्होंने कहा कि एमएसपी आगे जारी रहेगी और सरकार इस बारे में लिखकर भी दे सकती है. इसके साथ ही उन्होंने कहा, 'मुझे नहीं लगता कि खेतों में काम कर रहे असली किसानों को इससे (कृषि कानूनों से) आपत्ति है.
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