लाइव टीवी

ओपिनियन: मज़हब में फर्क किए बिना अपनी दौलत से गरीब की मदद करना ही है सूफीवाद
Delhi-Ncr News in Hindi

News18Hindi
Updated: March 31, 2020, 4:45 PM IST
ओपिनियन: मज़हब में फर्क किए बिना अपनी दौलत से गरीब की मदद करना ही है सूफीवाद
file photo

अपनी उस दौलत से जो किसी भी शक्ल में हो गरीब (Poor)-भूखे की मदद करना ही सूफीवाद है. हर सूफी (Sufi) औलिया का भी यही पैगाम (Message) है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 31, 2020, 4:45 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. कोरोना वायरस से जूझते मौजूदा वक्त ने कई दूरियों को पाट दिया है. दो दुश्मन देश भी एक-दूसरे की मदद कर रहे हैं. सियासत की खाई भी कम होती नज़र आ रही है. मज़हबी तंजों को पीछे छोड़ लोग साथ खड़े होकर परेशान हाल लोगों की मदद कर रहे हैं. नस्ल, मज़हब, बिरादरी और रंग में फर्क किए बिना अपनी उस दौलत से जो किसी भी शक्ल में हो गरीब-भूखे की मदद करना ही सूफीवाद है. हज़रत शेख सलीम चिश्ती, हज़रत निजामुद्दीन औलिया हों या वली-ए-हिंद ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती, हर दर का यही पैगाम है. यह कहना है फतेहपुर सीकरी में हज़रत शेख सलीम चिश्ती दरगाह के खिदमतगार और उनके वंशज अरशद फरीदी का. निजामुद्दीन में मरकज़ मामले पर उन्होंने बताया-

हज़रत निजामुद्दीन औलिया ने साफ फरमाया है कि अपनी लेखनी, आवाज़, विचार और दौलत से उन गरीब और भूखों की मदद करो जिन्हें इसकी जरूरत है. यह वो लोग हैं जो किसी न किसी शक्ल में परेशान हाल हैं. वली-ए-हिंद ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने भी फरमाया है कि परेशानी के वक्त मज़लूमों की फरियाद सुनो, बेचारों की जरूरतों को पूरा करो, बिना किसी फर्क के भूखों को खाना खिलाओ. सूफीवाद की तीन पहचान होती हैं, दरिया के जैसी सखावत (उदारता), आफ़ताब की सी मोहब्बत और ज़मीन के जैसी खाकसारी.

अगर बात सूफियों की इबादत की करें तो उसमे मोहब्बत का एक बड़ा रोल है. सूफीवाद के मुताबिक मोहब्बत से ही खुदा की पनाह पा सकते हो. अबूतालिब का भी कहना है कि मोहब्बत से ही रूहानी रहस्य उजागर होते हैं और उनसे इल्म हासिल होता है. सूफीवाद के चलते ही हिन्दू और मुसलमानों मिलाया गया. मुगल बादशाह अकबर का दौर इसका बड़ा सबूत है. हज़रत अमीर ख़ुसरो के कलाम सूफी सोच और अंदाज़ का एक बड़ा ख़ज़ाना है. ख़ुसरो एक शायर के साथ-साथ इतिहासकार भी थे. इसी के चलते उनके बहुत सारे कलाम में हिन्दू-मुस्लिम एकता की झलक मिलती है. ख़ुसरो के रंग के बिना सूफियाना महफिल अधूरी मानी जाती हैं. और सबसे बड़ी बात कि यह सूफीवाद ही है जो कहता है कि गरीब और मज़लूमों की मदद ही इबादत का दूसरा नाम है.




ये भी पढ़ें-


पढ़िए, दुनियाभर के 15 करोड़ लोगों से बनी तबलीगी जमात का क्या है मकसद

निजामुद्दीन मामला: मरकज़ का दावा- 17 वाहनों के लिए मांगा था कर्फ्यू पास, नोटिस का भी दिया था जवाब

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए दिल्ली-एनसीआर से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: March 31, 2020, 4:44 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
corona virus btn
corona virus btn
Loading