आर्मी इंटेलीजेंस और IB के जाल में कैसे फंसे पाकिस्तानी दूतावास के जासूस, जानें पूरी कहानी
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आर्मी इंटेलीजेंस और IB के जाल में कैसे फंसे पाकिस्तानी दूतावास के जासूस, जानें पूरी कहानी
दिल्ली पुलिस के अधिकारी और जवान लगातार कोरोना पॉजिटिव होते जा रहे हैं. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

दिल्ली में स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन (Pakistan High Commission) के 3 कर्मचारियों के बारे में MI को इनपुट मिला था. आर्मी इंटेलीजेंस ने IB और स्पेशल सेल की मदद से इन जासूसों को धर दबोचा.

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नई दिल्ली. मिलिट्री इंटेलिजेंस (MI) यानी देश की सुरक्षा, आतंकी गतिविधियों पर नजर रखने के लिए सबसे विश्वनीय समझी जाने वाली देश की सुरक्षा यूनिट को साल 2017 में एक खास इनपुट हासिल हुआ था. पता चला था कि दिल्ली स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन के कुछ कर्मचारी दूतावास की आड़ में जासूसी कर रहे है. देश और खासकर भारतीय सेना से जुड़ी गोपनीय जानकारी हासिल करने में जुटे हैंं. इसके बाद MI ने एक ऑपरेशन प्लान किया, जिसमें इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) और स्पेशल सेल के अधिकारियों को भी शामिल किया गया.

खुफिया एजेंसियों को पाकिस्तानी हाईकमीशन में तैनात 3 कर्मचारियों के बारे में इनपुट मिला था. हाई कमीशन के वीजा सेक्शन में तैनात तीन कर्मचारी इस्लामाबाद के मोहम्म्द ताहिर उम्र 44 साल पद UDC, अब्दुल हुसैन उम्र 42 शेखपुरा पाकिस्तान, पद ASS  और पाकिस्तान के मियांवली का रहने वाला ड्राइवर जावेद अख्तर थे. ये तीनों MI, IB और स्पेशल सेल के रडार पर ले लिए गए. इन तीनों पर आर्मी के ऑपरेशन के तहत तीनों ही खुफिया एजेंसियों ने निगाह रखना शुरू कर दिया. जानकारी के मुताबिक ताहिर और आबिद 2017 से ही पाकिस्तान हाई कमीशन के वीजा सेक्शन मे काम करने की आड़ में पाकिस्तान खुफिया एजेंसी ISI के पेरोल पर काम भी कर रहे थे.

MI ने जासूसों को पकड़ने के लिए ऐसे बिछाया जाल



खुफिया एजेंसियों के मुताबिक ISI के कहने पर ये तीनों जासूस पाकिस्तानी हाई कमीशन में लगने वाले वीजा के तमाम डॉक्युमेंट जैसे भारतीय आधार कार्ड और दूसरे दस्तावेज के जरिये फर्जी नाम से SIM कार्ड जारी कराते थे. फिर भारतीय सेना के छोटे रेंक के कर्मचारियों अधिकारियों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश भी करते थे.



MI और स्पेशल सेल ने लगातार पाकिस्तान हाई कमीशन के इन दोनों कर्मचारियों और उनके ड्राइवर पर नजर रखना शुरू कर दिया. इसके बाद रविवार की शाम करोलबाग इलाके में सुरक्षा एजेंसियों के एक अधिकारी ने भारतीय सेना का एक कर्मचारी बनकर आबिद और ताहिर से मीटिंग फिक्स की.

मीटिंग के लिए पहुंचे और पकड़े गए

प्लान के तहत भारतीय सेना के डमी कर्मचारी ने अपने लिए एक स्मार्ट फोन औऱ 15 हजार कैश की डिमांड की. पैसे देने के लिए पाकिस्तान हाई कमीशन का ड्राइवर जावेद, ताहिर और आबिद को लेकर जैसे ही करोलबाग में हाई कमीशन की कार से पहुंचा, स्पेशल सेल ने तीनों को मौके से धर दबोचा. तीनों को मोबाइल फोन और कैश के साथ रंगे हाथ हिरासत में ले लिया गया. सेना के डमी कर्मचारी से तीनों पाकिस्तान नागरिकों ने भारतीय सेना के हथियारों की खेप की जानकारी और सेना की तैनाती की जानकारी हासिल करने की डील की थी. लेकिन देश की खुफिया एजेंसियों की बदौलत पाकिस्तानी जासूसों का मंसूबा धरा का धरा रह गया.

PNG संधि के तहत वापस भेजे जाएंगे पाकिस्तान

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल के मुताबिक पाक हाई कमीशन के वीजा सेक्शन में काम करने वाले 2 लोगों मोहम्मद ताहिर, आबिद हुसैन को हिरासत में लिया गया है. इन दोनों पर जासूसी करने का आरोप है. पुलिस के मुताबिक दोनों ISI के एजेंट हैं. ये लोग दिल्ली में फर्जी आधार कार्ड के जरिये घूम रहे थे. मिलिट्री इंटेलिजेंस की काफी दिनों से इन लोगों पर नजर थी. पाकिस्तान हाई कमीशन के सीनियर अधिकारियों को इस मामले की सूचना दे दी गई है. नियम के मुताबिक किसी भी हाई कमीशन के कर्मचारी अधिकारी को हिरासत में लेने की कार्यवाही में उसे  PNG संधि के तहत वापस उसके देश भेज दिया जाता है. इन लोगों के साथ भी यही कार्रवाई की जा रही है.

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First published: June 1, 2020, 10:23 AM IST
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