मिशन चंद्रयान-2: पीएम मोदी और इसरो की इस कोशिश से स्पेस साइंस में बढ़ी दिलचस्पी!
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मिशन चंद्रयान-2: पीएम मोदी और इसरो की इस कोशिश से स्पेस साइंस में बढ़ी दिलचस्पी!
चंद्रयान -2 को 22 जुलाई को लॉन्च किया गया था.

स्कूलों में दी रही है इसरो (ISRO) के मिशन चंद्रयान-2 (Chandrayan-2 Mission) की जानकारी, ताकि बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान (Space Science) को लेकर विकसित हो सके समझ, आगे चलकर बनें वैज्ञानिक!

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  • Last Updated: September 9, 2019, 9:59 PM IST
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नई दिल्ली. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-2 मिशन (Chandrayan-2 Mission) के बाद स्कूली बच्चों में इसकी दिलचस्पी बढ़ गई है. कुछ स्कूलों के ऑडिटोरियम में तो बाकायदा इसरो का कार्यक्रम लाइव दिखाया गया, ताकि बच्चों में अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर समझ विकसित हो और वे इस दिशा में आगे बढ़ सकें. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद बच्चों और युवाओं में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति जागरूकता और दिलचस्पी पैदा करने के लिए एक क्विज प्रतियोगिता का ऐलान किया था. यह स्पेस क्विज कम्पटीशन जीतकर 60 बच्चे यह कार्यक्रम देखने इसरो पहुंचे थे. जहां पीएम ने उनसे बातचीत भी की थी. चंद्रयान-2 की लैडिंग को लेकर देश में जिस तरह का माहौल और कौतूहल था उसमें बच्चे और स्कूल भला कैसे पीछे रहते.

बच्चों में थी दिलचस्पी
पाइनवुड इंटनेशनल बोर्डिंग स्कूल के प्रिंसिपल नरेंद्र परमार ने बताया कि उनके स्कूल के ऑडिटोरियम में इसरो के कार्यक्रम को लाइव दिखाया गया था. कुछ बच्चों ने पूछा कि लैंडर का नाम विक्रम ही क्यों रखा गया? इसी तरह रोवर का नाम प्रज्ञान क्यों है. हम जल्द ही बच्चों को तारामंडल घुमाने ले जाएंगे. अंतरिक्ष कार्यक्रमों के प्रति सरकार की जो दिलचस्पी बढ़ी है उसका असर स्कूल, कॉलेज में तो दिखाई देगा ही. पीएम ने खुद ही बच्चों को स्पेस क्विज कम्पटीशन में शिरकत करने की अपील की थी.

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लैंडर 'विक्रम' का ग्राउंड स्टेशन से संपर्क तीसरे चरण के दौरान टूटा था




स्कूल बनवाएंगे इससे जुड़े मॉडल


आशा ज्योति विद्यापीठ के संचालक सतवीर डागर का कहना है कि चंद्रयान के बारे में तो पूरे देश में चर्चा है. भला बच्चों के बीच क्यों नहीं होगी. आज के छात्र ही कल इसरो में वैज्ञानिक बनेंगे और नासा भी जाएंगे. हमारे स्कूल में पहले से ही बच्चों को अंतरीक्ष विज्ञान के बारे में बताया जा रहा है, अब बच्चों की दिलचस्पी बढ़ रही है तो आगे उनसे इससे जुड़े मॉडल बनवाए जाएंगे.

कुछ स्कूलों में बच्चों को बताया जा रहा है कि रॉकेट प्रक्षेपित करने के लिए क्या-क्या करना होता है. सेटेलाइट को कैसे कक्षा में स्थापित किया जाता है. सेटेलाइट से हम क्या-क्या जानकारियां हासिल कर सकते हैं. यह लोगों का जीवन कैसे आसान कर रहा है?

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