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ऑनलाइन मंगाया मोबाइल, गर्म होने लगा तो कंपनी पर ठोक दिया 743 करोड़ का मुकदमा

ऑनलाइन मंगाया मोबाइल, गर्म होने लगा तो कंपनी पर ठोक दिया 743 करोड़ का मुकदमा

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में मामले में सुनवाई करते हुए दंडात्मक हर्जाने की मांग करने वाली शिकायती याचिका को खारिज कर दिया है.

राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में मामले में सुनवाई करते हुए दंडात्मक हर्जाने की मांग करने वाली शिकायती याचिका को खारिज कर दिया है.

NCDRC News: ऑनलाइन मोबाइल खरीदने के बाद खराबी दिखी तो उपभोक्ता ने ई-कॉमर्स कंपनी पर भ्रामक प्रचार करने का लगाया आरोप. मगर उपभोक्ता निवारण आयोग ने खारिज कर दी याचिका.

    नई दिल्ली. एक बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी से एक शख्स ने ऑनलाइन मोबाइल फोन खरीदा, लेकिन कुछ दिन बाद ही मोबाइल की डिवाइस गर्म होने लगी, इस पर व्यक्ति ने कंपनी पर भ्रामक प्रचार करने का आरोप लगाते हुए 743 करोड़ रुपये का मुकदमा उपभोक्ता निवारण आयोग में ठोंक दिया. राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC) में इस मामले में सुनवाई करते हुए दंडात्मक हर्जाने की मांग करने वाली शिकायती याचिका को खारिज कर दिया है.

    दिल्ली के शिकायतकर्ता ने दावा किया था कि उसने 23 फरवरी, 2016 को कंपनी की वेबसाइट से एक मोबाइल फोन खरीदा था, लेकिन कुछ दिनों के बाद डिवाइस गर्म होने लगा, जिससे उसे मजबूर होकर कंपनी को फोन रिटर्न करना पड़ा.  हालांकि, शिकायतकर्ता को कंपनी ने सूचित किया था कि कंपनी ने फोन का ऑर्डर आने से 16 दिन पहले ही रिटर्न पॉलिसी बदल दी है, ऐसे में वह फोन को फ्री रिप्लेसमेंट कर सकते हैं. उनका रुपया वापस नहीं होगा. मोबाइल खरीदने वाले शख्स ने इसके बाद ही कंपनी पर आरोप लगाते हुए उपभोक्ता अदालत का रुख किया।

    शिकायतकर्ता ने कहा कि चालान बिल में उसे फोन वापस करने का विकल्प दिया गया था और आदेश सूची में भी दिखाई दे रहा था. उन्होंने आरोप लगाया कि कंपनी ने रिटर्न पॉलिसी नीति का भ्रामक विज्ञापन और व्यापार के अनुचित नियम अपनाकर असंख्य कस्टमर्स को धोखा दिया गया. शिकायतकर्ता ने खरीदे गये फोन के लिए 9,119 रुपये के मुआवजे के साथ-साथ मुकदमेबाजी और परिवहन लागत 1 लाख रुपये और 743 करोड़ रुपये के दंडात्मक हर्जाने की मांग की, जिससे उन्हें कानूनी चोट और वित्तीय नुकसान हुआ. शिकायतकर्ता ने बड़े पैमाने पर कई उपभोक्ताओं का प्रतिनिधित्व करने के लिए अदालत की अनुमति भी मांगी.

    शिकायतकर्ता ने आगे कहा कि कंपनी ने बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं को धोखा देने के लिए आसान रिटर्न के भ्रामक विज्ञापन पर 743.9 करोड़ रुपये का खर्च किया और इस प्रकार, उस पर दंडात्मक हर्जाना लगाया जाना चाहिये. शिकायत को खारिज करते हुए NCDRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति आरके अग्रवाल और सदस्य एसएम कांतिकर ने कहा, “हमारा विचार है कि शिकायतकर्ता द्वारा समान रूप से स्थित उपभोक्ताओं की ओर से एक संयुक्त शिकायत के रूप में शिकायत विचारणीय नहीं है और खारिज करने योग्य है।”

    आयोग ने आगे कहा कि ई-कॉमर्स कंपनी ने अपनी वापसी नीति में बदलाव के बारे में समाचार पत्रों और ऑनलाइन पोर्टलों में अंग्रेजी के साथ-साथ स्थानीय भाषाओं में प्रकाशित किया था. “जहां तक ​​रिफंड के संबंध में फोन के चालान बिल में दिखाई देने वाले विकल्प का संबंध है, हमारा विचार है कि चूंकि पॉलिसी बदलने की तारीख से केवल 16 दिनों का अंतर था, इसलिए यह संभव नहीं था. उक्त गलती को सुधारें या चालान बिल का फिर से प्रकाशन करें,” पीठ ने 22 सितंबर के एक आदेश में कहा, “इन परिस्थितियों में यह अनुकरणीय दंडात्मक हर्जाना देने के लिए उपयुक्त मामला नहीं है. नतीजतन, शिकायत को आर्थिक क्षेत्राधिकार के अभाव में अनुरक्षणीय नहीं होने के कारण खारिज किया जाता है.”

    Tags: Consumer Commission, Delhi news, E-commerce industry, Online Mobile Phone Shopping, Online Order

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