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  • अब जातियों के नाम पर नहीं बनेगी कोई रेजीमेंट, अखिलेश यादव-चंद्रशेखर कर रहे थे मांग

अब जातियों के नाम पर नहीं बनेगी कोई रेजीमेंट, अखिलेश यादव-चंद्रशेखर कर रहे थे मांग

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में अहीर बख्तरबंद रेजीमेंट बनाने का वादा किया था तो भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने चमार रेजीमेंट बहाल करने की मांग की थी. लेकिन मोदी सरकार ने संसद में कहा कि आजादी के बाद सरकार की नीति किसी विशेष वर्ग, समुदाय, धर्म या क्षेत्र के लिए कोई नई रेजीमेंट गठित करने की नहीं रही है.

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में अहीर बख्तरबंद रेजीमेंट बनाने का वादा किया था तो भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने चमार रेजीमेंट बहाल करने की मांग की थी. लेकिन मोदी सरकार ने संसद में कहा कि आजादी के बाद सरकार की नीति किसी विशेष वर्ग, समुदाय, धर्म या क्षेत्र के लिए कोई नई रेजीमेंट गठित करने की नहीं रही है.

समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव के अपने घोषणापत्र में अहीर बख्तरबंद रेजीमेंट बनाने का वादा किया था तो भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने चमार रेजीमेंट बहाल करने की मांग की थी. लेकिन मोदी सरकार ने संसद में कहा कि आजादी के बाद सरकार की नीति किसी विशेष वर्ग, समुदाय, धर्म या क्षेत्र के लिए कोई नई रेजीमेंट गठित करने की नहीं रही है.

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नई दिल्ली. मोदी सरकार (Modi Government) ने साफ किया है कि अब किसी जाति या धर्म के नाम पर सेना में कोई रेजीमेंट नहीं बनेगी. इसके बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) और भीम आर्मी के इस सपने पर पानी फिर गया है. दोनों वर्ग विशेष को लेकर सेना में रेजीमेंट बनाने की मांग कर रहे थे. अखिलेश यादव ने अहीर रेजीमेंट (Ahir Regiment) बनाने की मांग उठाई थी तो चंद्रशेखर ने अंग्रेजों के समय रही चमार रेजीमेंट को बहाल करने की. चमार रेजीमेंट (Chamar Regiment) के लिए कुछ दलित नेताओं ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग का भी दरवाजा खटखटाया था, जबकि अहीर रेजीमेंट के लिए दक्षिण हरियाणा में कई बार प्रदर्शन हो चुके हैं.

अहीर रेजीमेंट-साल 2019 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने अपने घोषणापत्र में 'अहीर बख्तरबंद रेजिमेंट' बनाने का वादा किया था. यादव समाज में यह मांग इतनी बड़ी है कि तब आजमगढ़ से अखिलेश यादव के सामने खड़े बीजेपी कैंडीडेट रहे दिनेश लाल यादव उर्फ 'निरहुआ' को भी इसका समर्थन करना पड़ा था. कोशिश थी यादव वोटरों को रिझाने की.

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अखिलेश यादव ने अहीर रेजीमेंट बनाने की मांग उठाई थी (प्रतीकात्मक फोटो)


इसके पीछे सेना में यादव समाज के लोगों की अच्छी खासी संख्या का तर्क दिया जाता है. अहीर रेजीमेंट की मांग को लेकर रेजांगला शहीद फाउंडेशन कई बार आंदोलन कर चुका है. यादव समाज के लोग 18 नवंबर, 1962 को हुए रेजांगला युद्ध की याद दिलाते हैं जब एक साथ 114 सैनिक शहीद हो गए थे. जिसमें से 112 सैनिकों के यादव समाज से होने का दावा किया जाता है. इन जवानों ने युद्ध में चीन के करीब 13 सौ सैनिकों को मारा था.

चमार रेजीमेंट-भीम आर्मी के अध्यक्ष चंद्रशेखर ने चमार रेजीमेंट बनाने की मांग उठाई. उन्होंने लोकसभा चुनाव के दौरान सपा के घोषणापत्र पर एक ट्वीट किया. जिसमें लिखा, 'अखिलेश यादव जी आपको अहीर रेजीमेंट तो याद रही परंतु चमार रेजीमेंट को भूल गए, जबकि हम काफी समय से चमार रेजीमेंट को बहाल करने की मांग कर रहे हैं. अभी से हमारे समाज की अनदेखी करना शुरू कर दिया है...'



हालांकि, दलित एक्टिविस्ट ओपी धामा ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर अपील की है कि अगर देश में जातिवाद खत्म करना है तो योद्धाओं के नाम पर रेजीमेंट बनाई जाएं. आर्मी में भर्ती किए जाते समय एप्लीकेशन में जाति और धर्म का कॉलम समाप्त कर दिया जाए.

नई रेजीमेंट पर सरकार ने कहा- सांसद पुष्पेंद्र सिंह चंदेल के एक सवाल पर रक्षा राज्य मंत्री श्रीपाद नाईक ने 11 मार्च को एक लिखित जवाब में कहा कि नई रेजीमेंट स्थापित करने को लेकर संसद में कई अवसरों पर चर्चा की जा चुकी है. सरकारी नीति के मुताबिक सभी नागरिक चाहे वे किसी वर्ग, पंत, क्षेत्र या धर्म के हों, भारतीय सेना में भर्ती होने के लिए पात्र हैं. आजादी के बाद सरकार की नीति किसी विशेष वर्ग, समुदाय, धर्म या क्षेत्र के लिए कोई नई रेजीमेंट गठित करने की नहीं रही है.

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इंडियन आर्मी में रेजीमेंट (स्रोत: आरटीआई)


सेना में कितनी रेजीमेंट-इस समय सेना में 23 रेजीमेंट हैं. जिनमें से कई जातियों और इलाकों के नाम पर भी हैं. इनमें मुख्य तौर पर जाट रेजीमेंट, राजपूत रेजीमेंट, गोरखा रेजीमेंट, सिख रेजीमेंट, डोगरा रेजीमेंट, पंजाब रेजीमेंट, बिहार रेजीमेंट और असम रेजीमेंट आदि शामिल हैं.

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