वायु प्रदूषण रोकने की मशीनरी पर 50 फीसदी देगी सरकार, 1700 करोड़ रुपये का इंतजाम

इन दिनों आम हो जाती हैं पराली जलाने की घटनाएं (File Photo)
इन दिनों आम हो जाती हैं पराली जलाने की घटनाएं (File Photo)

मोदी सरकार ने माना प्रदूषण का कारण सिर्फ पराली नहीं, दिल्ली-एनसीआर में तैनात होंगी सीपीसीबी (CPCB) की 50 टीमें

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 16, 2020, 9:19 AM IST
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नई दिल्ली. हरियाणा, पंजाब, यूपी और राजस्थान के कुछ हिस्सों में धान की कटाई चल रही है. ऐसे में पराली जलनी (Stubble burning) भी शुरू हो गई है. मोदी सरकार ने पराली प्रबंधन के लिए राज्‍यों को 1700 करोड़ रुपये की धनराशि आवंटित की है. सहकारी समितियों को 80% और पराली जलाने के कारण होने वाले वायु प्रदूषण (Air Pollution) को रोकने के लिए मशीनरी पर लोगों को 50 फीसदी सब्सिडी दी जाएगी. इन चारों राज्यों में हॉटस्पॉट की पहचान की गई है. जिन पर राज्य सरकारों को अधिक ध्यान देने के निर्देश दिए गए हैं.

दिल्ली में 13 हॉटस्पॉट पर अधिक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि राजधानी में वायु प्रदूषण को कम किया जा सके. दिल्ली-एनसीआर में सीपीसीबी (CPCB) की 50 टीमों को तैनात किया जाएगा. पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावडेकर ने बताया कि पूसा माइक्रोबियल डिकम्पोजर कैप्सूल का परीक्षण दिल्ली-एनसीआर में चल रहा है. उत्तर प्रदेश में इस साल 10,000 हेक्टेयर क्षेत्र में इस तकनीक का उपयोग किया जाएगा. दिल्ली में 800 हेक्टेयर के लिए इसका उपयोग किया जाएगा.

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पराली प्रबंधन करने वाली एक मशीन (File Photo)




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प्रदूषण के और भी हैं कारण

जावडेकर ने इस बात पर जोर दिया कि पराली जलाने के अलावा वायु प्रदूषण में योगदान करने वाले कई कारक हैं. जिसमें निर्माण और इमारत का मलबा, खराब अपशिष्ट प्रबंधन, कच्‍ची सड़कें और धूल प्रबंधन, बायो मास को जलाना आदि शामिल हैं.

प्रदूषण रोकने के लिए क्या किया?

मंत्री ने बताया कि केंद्र ने प्रदूषण रोकने के लिए बीएस-VI मानदंड शुरू किए हैं. बदरपुर के बिजली संयंत्र को बंद कर दिया गया है. पूर्वी और पश्चिमी पेरीफेरल एक्सप्रेसवे ने दिल्ली में वाहनों के वायु प्रदूषण को कम करने में बड़े पैमाने पर मदद की है. लगभग 60,000 वाहनों को दिल्ली से डायवर्ट किया गया है, जो पहले दिल्ली से गुजरते थे.

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सबसे पहले हरियाणा ने शुरू किया काम

हरियाणा सरकार ने अगस्त के पहले सप्ताह में ही राज्य में पराली प्रबंधन के लिए 1,304.95 करोड़ रुपये की एक बड़ी योजना को स्वीकृति प्रदान की थी. हरियाणा (Haryana) और पंजाब (Punjab) सबसे ज्यादा पराली जलाने वाले सूबों में शामिल हैं. क्योंकि यहां धान की बड़े पैमाने पर खेती होती है और उसकी मशीनों से कटाई होती है. चूंकि प्रदूषण की वजह से पराली एक सियासी मुद्दा भी बन चुका है, इसलिए सीएम मनोहर लाल ने धान कटाई से काफी पहले ही इसके प्रबंधन के लिए काम शुरू कर दिया था.
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