निजी अस्पतालों के रवैये को लेकर केंद्र सख्त, कोरोना काल में मरीजों से वसूले एक-एक पैसे का देना होगा हिसाब

छोटे-बड़े निजी अस्पतालों पैथेलॉजी लैब और प्राइवेट एंबुलेंस प्रोवाइडर द्वारा अवैध वसूली पर मोदी सरकार एक्शन की तैयारी में है.

छोटे-बड़े निजी अस्पतालों पैथेलॉजी लैब और प्राइवेट एंबुलेंस प्रोवाइडर द्वारा अवैध वसूली पर मोदी सरकार एक्शन की तैयारी में है.

देश में कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौरान सभी छोटे-बड़े निजी अस्पतालों (Private Hospitals), पैथेलॉजी लैब (Pathology Labs) और प्राइवेट एंबुलेंस प्रोवाइडर के द्वारा अवैध वसूली पर मोदी सरकार (Modi Government) जबरदस्त एक्शन की तैयारी में है. केंद्र सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि आपदा के इस घड़ी में तकरीबन सभी छोटे-बड़े अस्पतालों ने जबरदस्त तरीके से मरीजों (Patients) से पैसे लूटे हैं.

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नई दिल्ली. देश में कोरोना संकट (Corona Crisis) के दौरान सभी छोटे-बड़े निजी अस्पतालों (Private Hospitals), पैथेलॉजी लैब (Pathology Labs) और प्राइवेट एंबुलेंस प्रोवाइडर के द्वारा अवैध वसूली पर मोदी सरकार (Modi Government) जबरदस्त एक्शन की तैयारी में है. केंद्र सरकार को शिकायतें मिल रही हैं कि आपदा के इस घड़ी में तकरीबन सभी छोटे-बड़े अस्पतालों ने जबरदस्त तरीके से मरीजों (Patients) से पैसे लूटे हैं. उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार और दिल्ली में इस पर एक्शन भी शुरू हो गया है. बीते दिनों हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने भी केंद्र सरकार और राज्य सरकारों से सख्त एक्शन लेने को कहा था. ऐसे में महामारी के समय आपदा में अवसर तलाशने वाले मुनाफाखोरों पर मोदी सरकार लगाम कसने की तैयारी शुरू कर दी है. सूत्र बताते हैं कि केंद्र सरकार सभी छोटे-बड़े निजी अस्पतालों, केमिस्ट शॉप, ऑक्सीजन सप्लायर और एंबुलेंस प्रोवाइडर के बिलों की जांच कराएगी.

आपदा को अवसर के रूप भुनाना पड़ेगा महंगा

बता दें कि कोरोना महामारी के इस संकट में देश के कई छोटे-बड़े निजी अस्पताल आपदा को अवसर के रूप में देख रहे हैं. इस संकट काल में भी इन लालची अस्पतालों ने मानवता को शर्मसार करने का काम किया है. केंद्र सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी कहते हैं, 'निजी अस्पताल, प्राइवेट लैब और अन्य स्वास्थ्य से जुड़ी प्राइवेट संस्थानों पर केंद्र सरकार की नजर है. क्योंकि, अभी महामारी ने पूरे देश को अपने जद में ले रखा है, इसलिए सरकार अभी कोई सख्त एक्शन नहीं ले सकती है,  लेकिन जैसे ही स्थितियां सामान्य होंगी इन निजी स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े संस्थानों को बख्शा नहीं जाएगा.

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कोरोना महामारी के इस संकट में देश के कई छोटे-बड़े निजी अस्पताल आपदा को अवसर के रूप में देख रहे हैं. Image-shutterstock.com

केंद्र सरकार लेगी पूरा लेखा-जोखा

वरिष्ठ अधिकारी ने साफ कर दिया है कि कोरोना से स्थिति सुधरते ही राज्य सरकारों के सहयोग से बड़े ऐक्शन की रूपरेखा तैयार की जाएगी. अधिकारी ने न्यूज 18 हिंदी के साथ बातचीत में कहा है कि स्वास्थ्य विभाग कोरोना काल में भर्ती सभी मरीजों का पूरा लेखा-जोखा निजी अस्पतालों और प्राइवटे लैब से हासिल करेगी. इसके साथ ही आम लोगों के लिए हेल्पलाइन नंबर और वेबसाइट भी लॉन्च किए जाएंगे. इस हेल्पलाइन नंबर और वेबसाइट पर कोरोना काल में अस्पतालों के रवैये से परेशान लोग अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं.

कैश लेन-देन की भी होगी जांच



कोरोना महामारी के दौरान अस्पतालों से उसके अकाउंट में आए पैसे और कैश लेन-देन के बारे में भी सवाल जवाब किए जाएंगे. सामान्य बेड्स, आईसीयू बेड्स और वेंटिलेटर के मरीजों से वसूले गए पैसे का पूरा हिसाब इन अस्पतालों को देना होगा. अस्पताल 24 घंटे बेड का चार्ज पहले कितना वसूला करता था और कोरोना काल में इन बेड्स के चार्ज कितने वसूले गए, इसकी भी जांच की जाएगी. इसके साथ ही पैथेलॉजी लैब में आरटीपीसीआर टेस्ट के साथ-साथ एक्सरे, एचआरसीटी और सीटी स्केन के रेट का भी हिसाब-किताब देना होगा.

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अस्पतालों से उसके अकाउंट में आए पैसे और कैश लेन-देन के बारे में भी सवाल जवाब किए जाएंगे. (फाइल फोटो)

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सूत्र बताते हैं कि अगर एक अस्पताल के बारे 10 से ज्यादा शिकायतें आती हैं तो उस अस्पताल पर सख्त कर्रवाई की जाएगी. इसके लिए मरीजों का पूरा डाटा बेस तैयार किया जाएगा, जिसमें मरीजों का पूरा ब्यौरा दर्ज होगा. केंद्र सरकार इसके लिए कई एक्सपर्ट्स की टीम बनाने पर विचार कर रही है, जिसमें आईआईटी दिल्ली, आईआईटी कानपुर, आईआईएम लखनऊ और आईआईटी बीएचयू सहित देश के कई संस्थानों के काबिल लोगों को रखा जाएगा. मॉनीटरिंग और ऑडिट के बाद अगर अस्पताल की गलती सामने आती है तो रासुका सहित कई धाराओं में मामला दर्ज तो होगा ही साथ-साथ अस्पताल का रजिस्ट्रेशन भी रद्द होगा.

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