संकटकाल में लाचार लोगों का सबसे बड़ा सहारा बने दिल्ली के गुरुद्वारे, अनलॉक में घटी खाने वालों की संख्या
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संकटकाल में लाचार लोगों का सबसे बड़ा सहारा बने दिल्ली के गुरुद्वारे, अनलॉक में घटी खाने वालों की संख्या
गुरुद्वारे में लंगर प्रसाद ग्रहण करते श्रद्धालु (प्रतीकात्मक फोटो)

लॉकडाउन में दोगुना से अधिक हो गई थी खाने की मांग, गुरुद्वारों पर निर्भर रहे लाखों लोग, लेकिन अब जैसे-जैसे जिंदगी पटरी पर लौट रही है वैसे-वैसे इनमें खाना खाने वालों की संख्या घट रही है

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नई दिल्ली. कोरोना संकट (Corona crisis) से निपटने के लिए किए गए लॉकडाउन की वजह से लोगों के कामधंधे छिन गए. करोड़ों लोग बेरोजगार (Unemployed) हो गए. लेकिन अब अनलॉक की प्रक्रिया शुरू होने के बाद जिंदगी धीरे-धीरे पटरी पर लौट रही है. काम न मिलने की वजह से लोग इतने लाचार हो गए थे कि उन्हें खाना मुश्किल से नसीब हो रहा था. ऐसे में उनके लिए गुरुद्वारे और समाजसेवी संगठन सबसे बड़ा सहारा बनकर उभरे. खासतौर पर प्रवासी श्रमिकों (Migrant workers) के लिए. दिल्ली में भी गुरुद्वारों ने बढ़-चढ़कर लोगों की सेवा की.

दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के डीजीएम (राशन-स्टोर) इकबाल सिंह ने बताया कि गुरुद्वारे में भोजन करने वालों का संख्या के रूप में हिसाब नहीं रखा जाता. न ही कोई टोकन सिस्टम है, जिससे ये पता लगाया जा सके कि कुल कितने लोगों ने खाना खाया. लेकिन भोजन बनाने के दौरान लगने वाले राशन से लोगों की संख्या का अनुमान लगाया जा सकता है.

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सिंह ने बताया कि लॉकडाउन और अब अनलॉक में लंगर में लगने वाला राशन अन्य दिनों के मुकाबले दोगुना हो गया है. मार्च से पहले तक दिल्ली के सभी गुरुद्वारों में 20-22 क्विंटल आटे की रोजाना रोटियां बनाई जाती थीं. जबकि लॉकडाउन में करीब 50 क्विंटल आटा रोजाना लगा है. इसके साथ ही करीब 30 क्विंटल चावल और 20-25 क्विंटल दाल और 20 क्विंटल सब्जी का रोजाना खर्च हुआ है. लॉकडाउन में अकेले श्री बंगला साहिब गुरुद्वारा (Sri Bangla Sahib Gurudwara) में ही 25 क्विंटल आटे की रोटियां रोजाना बनाई गईं. लेकिन अब अनलॉक में हर रोज आटे की खपत घटकर 15 से 20 क्विंटल तक की रह गई है.
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एक सामाजिक संस्था द्वारा बनाया जा रहा खाना (File Photo)


इन गुरुद्वारों में बनता है लाखों लोगों का भोजन

इकबाल सिंह बताते हैं कि एक क्विंटल आटे में करीब तीन हज़ार लोग खाना खा लेते हैं. ऐसे में 50 क्विंटल आटे में डेढ़ से दो लाख लोगों के लंगर खाने का अनुमान है. इससे पहले दिल्ली (Delhi) के नौ ऐतिहासिक गुरुद्वारों में लंगर लगाए जाते थे. सभी जगह खाना बनता था. लेकिन लॉकडाउन और अब अनलॉक में सिर्फ पांच जगह, बंगला साहिब गुरुद्वारा, करनाल रोड स्थित नानक प्याऊ गुरुद्वारा, मोतीबाग, चांदनी चौक स्थित शीश गंज और रकाब गंज में ही खाना पकाकर बाहर भेजा गया है.

वहीं लॉकडाउन में तीन और जगहों को दाल-सब्जी बनाने के लिए सेंटर बनाया गया. इनमें गुरु तेग बहादुर टेक्निकल कॉलेज राजौरी गार्डन, गुरुद्वारा बदरपुर और यमुनापार स्थित कल्याणपुरी शामिल हैं.

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पहले लंगरों में खाते थे लोग, लॉकडाउन में जगह-जगह बांटा गया खाना

सिंह ने बताया कि लॉकडाउन में गुरुद्वारों में सामान्य तौर पर खाने वाले लोग तो आए नहीं लिहाजा जगह-जगह जाकर खाना बांटा गया है. दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी के प्रमुख मनजिंदर सिंह सिरसा खुद लॉकडाउन में कई ऐसी जगहों पर गए जहां सरकारी या अन्य किसी भी स्रोत से राशन नहीं पहुंच पा रहा था. ऐसी जगहों पर लंगर का खाना बंटवाया गया. इस दौरान ट्रेनों में, कॉलोनियों में, झुग्गियों में, रास्तों में, बसों में, फुटपाथों पर लोगों को खाना खिलाया गया. साथ ही अब अनलॉक में भी खाना बांटा जा रहा है.
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