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अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्ष ने कहा- हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद तोड़ी, अब जमीन मांग रहे

अयोध्या मामला: मुस्लिम पक्ष ने कहा- हिंदुओं ने बाबरी मस्जिद तोड़ी, अब जमीन मांग रहे

हालांकि पीठ ने मुस्लिम पक्ष से कहा, ‘कृपया इस सबमें मत जाइए. आपकी दलीलें मुद्दों से संबंधित होनी चाहिए.’  (File Photo)

हालांकि पीठ ने मुस्लिम पक्ष से कहा, ‘कृपया इस सबमें मत जाइए. आपकी दलीलें मुद्दों से संबंधित होनी चाहिए.’ (File Photo)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद (Ram Janmabhoomi- Babri Masjid) विवाद मामले में सोमवार को भी सुनवाई हुई.

    सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद (Ram Janmabhoomi- Babri Masjid) विवाद मामले में सोमवार को भी सुनवाई हुई. मामले में मुस्लिम पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट में कहा, 'हिंदुओं ने 1934 में बाबरी मस्जिद पर हमला किया, फिर 1949 में अवैध घुसपैठ की और 1992 में इसे तोड़ दिया. अब कह रहे हैं कि संबंधित जमीन पर उनके अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए.'

    प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने महत्वपूर्ण कार्यवाही के 17वें दिन मुस्लिम पक्ष की दलीलें सुननी शुरू कीं. अधिवक्ता राजीव धवन ने पीठ को बताया कि कानूनी मामलों में ऐतिहासिक बातों और तथ्यों पर पूरी तरह भरोसा नहीं किया जा सकता.

    सुन्नी वक्फ बोर्ड और वास्तविक याचिकाकर्ताओं में से एक एम सिद्दीक की ओर से पेश धवन ने कहा, ‘1934 में आपने (हिंदुओं) मस्जिद को तोड़ दिया और 1949 में अवैध घुसपैठ की. 1992 में आपने मस्जिद को पूरी तरह नष्ट कर दिया और सभी तबाही के बाद आप कह रहे हैं कि ब्रिटिश लोगों ने हिंदुओं के खिलाफ काम किया और अब आप कह रहे हो कि हमारे अधिकार की रक्षा की जानी चाहिए.’

    हालांकि पीठ ने उनसे कहा, ‘कृपया इस सबमें मत जाइए. आपकी दलीलें मुद्दों से संबंधित होनी चाहिए.’ धवन ने कहा कि ये सभी मुद्दे दूसरे पक्ष द्वारा उठाए गए हैं और उन्हें जवाब देने की अनुमति मिलनी चाहिए क्योंकि यह सुनवाई ‘देश के भविष्य’ से जुड़ी है.

    इस पर देवता (रामलला विराजमान) पक्ष के वरिष्ठ अधिवक्ता सी एस वैद्यनाथन खड़े हुए और कहा कि धवन को मुद्दई (मुस्लिम पक्षों) के मामले के बारे में चर्चा करनी चाहिए. इस पर प्रधान न्यायाधीश ने कहा, ‘वह अपने मामले को जिस तरह से रखना चाहें, उसके लिए वह स्वतंत्र हैं.’

    धवन ने पीठ से कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन न्यायाधीशों में से एक ने उल्लेख किया था कि ऐतिहासिक तथ्य स्वामित्व पर फैसला करने के लिए पर्याप्त आधार नहीं हो सकता. उन्होंने कहा कि तुलसीदास द्वारा लिखी गई रामायण एक काव्य है और उसे इतिहास का हिस्सा नहीं कहा जा सकता. इस पर, पीठ ने कहा, ‘तुलसीदास समकालीन थे और काव्य में भी तथ्य हो सकते हैं.’

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    Tags: Ayodhya, Ayodhya Land Dispute, Babri Masjid Demolition Case, Babri mosque demolition, Ram Mandir Dispute, Supreme Court

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