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Covid Effect: मायोपिया बन रहा बड़ा खतरा, विशेषज्ञ बोले, बच्‍चों की आंखों को बचाना जरूरी

कोरोना के बाद ऑनलाइन पढ़ाई और एक्टिविटी बढ़ने के बाद बच्‍चों की आंखों में मायोपिया की शिकायत बढ़ रही है.

कोरोना के बाद ऑनलाइन पढ़ाई और एक्टिविटी बढ़ने के बाद बच्‍चों की आंखों में मायोपिया की शिकायत बढ़ रही है.

Myopia: एक ही चीज पर फोकस करके देखते रहने से आंखों में मायोपिया की शिकायत पैदा हो जाती है. धीरे-धीरे द्रष्टि इतनी संकुचित हो जाती है कि बेहद पास की चीजें ही साफ दिखाई देती हैं. यह सिर्फ विजन तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके साइड इफेक्‍ट इतने हैं कि आंखों से खून आने के अलावा आखिर में आंखों की रोशनी तक जा सकती है.

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नई दिल्‍ली. कोरोना महामारी (Corona Pandemic) के बाद नई-नई बीमारियां लोगों को घेर रही हैं. कोराना से कमजोर हुई इम्‍यूनिटी के बाद पैदा हुए कई सिंड्रोम और ब्‍लैक फंगस (Black Fungus) आदि से अलग कुछ ऐसी भी बीमारियां हैं जो कोरोना से बचने या इस दौर में सुरक्षित रहने के लिए उठाए गए कदमों के बाद पैदा हुई हैं. आंखों की बीमारी मायोपिया (Myopia) उन्‍हीं में से एक है.

एक रिपोर्ट के मुताबिक कोरोना के बाद चीन और नीदरलैंड में बड़ी संख्‍या में लोगों की आंखों में मायोपिया की शिकायत मिली है. वहीं अब भारत में भी लोगों की आंखें इस बीमारी मायोपिया यानि निकटदर्शिता की चपेट में आ रही हैं. विशेषज्ञों की मानें तो कोविड (Covid) के इस दौर में बड़ों के साथ-साथ बच्‍चों की आंखें बचाना सबसे ज्‍यादा जरूरी है. अगर समय रहते ध्‍यान नहीं दिया गया तो बड़े स्‍तर पर नजर की परेशानी पैदा हो जाएगी.

ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज के डॉ. राजेंद्र प्रसाद सेंटर फॉर ऑप्‍थेल्मिक साइंसेज में प्रोफेसर डॉ. अतुल कुमार कहते हैं कि भारत के लोगों में कोरोना से पहले के समय के मुकाबले अब मायोपिया की शिकायत बढ़ी है. इसकी एक वजह कोरोना आने के बाद लोगों का घरों में रहना और डिजिटल डिवाइसेज (Digital Devices) और वर्चुअल गतिविधि का बहुत लंबे समय तक इस्‍तेमाल करना है.

coronavirus eyes redness
कोरोना के दौरान लोगों में आंखों से जुड़ी समस्‍या तेजी से बढ़ी है. (फाइल फोटो)


प्रोफेसर अतुल कहते हैं कि लगातार और लंबे समय तक एक ही चीज पर फोकस करके देखते रहने से आंखों में मायोपिया की शिकायत पैदा हो जाती है. धीरे-धीरे द्रष्टि इतनी संकुचित हो जाती है कि बेहद पास की चीजें ही साफ दिखाई देती हैं. यह सिर्फ विजन (Vision) तक ही सीमित नहीं है बल्कि इसके साइड इफेक्‍ट इतने हैं कि आंखों से खून आने के अलावा आखिर में आंखों की रोशनी तक जा सकती है. लिहाजा बहुत सावधान होने की जरूरत है.

अगर कोरोना के बाद देखा जाए तो बच्‍चों की आंखों को खासा नुकसान हो रहा है. घर पर रहकर कई-कई घंटों तक ऑनलाइन पढ़ाई करने और बाहर न जा पाने के कारण इनडोर एक्टिविटीज में सिर्फ मोबाइल फोन, लैपटॉप या टेबलेट आदि चलाते रहने से आंखों में दिक्‍कतें पैदा हो रही हैं.  मायोपिया एक तरह से दूर देखने की क्षमता का प्रभावित कर देता है. इसमें पास की चीजें अच्‍छे से दिखाई देती हैं लेकिन दूर की द्रष्टि धीरे-धीरे धुंधली होती चली जाती है.

आंखों में मायोपिया के लक्षण, ये हो सकती हैं परेशानियां

. आंखों में सूखापन

. आंखों से खून आना.

. नजर धुंधला जाना.

. आंखों में दर्द.

. दूर की चीजें साफ न दिखाई देना.

. नींद न आना.

ब्‍लू लाइट उड़ा रही नींद

इलेक्‍ट्रोनिक डिवाइसों के ज्‍यादा से ज्‍यादा इस्‍तेमाल से आंखों पर खराब असर पड़ रहा है. मोबाइल फोन, टैबलेट, टीवी या अन्‍य किसी उपकरण से निकलने वाली नीली लाइट आंखों की नजर पर असर डालने के साथ ही आंखों में सूखापन पैदा करती है. इसके साथ ही बच्‍चों की नींद को भी प्रभावित कर रही है. यहां तक कि अगर कोई बच्‍चा या बड़ा शाम को या रात तक फोन चलाता है तो उसको नींद आने में समस्‍या होगी. स्‍लीप डिसऑर्डर के साथ ही यह विजन को धुंधला भी कर देती है. लिहाजा इसका कम से कम आंखों पर प्रभाव पड़ने दें.

ऐसे बचाएं बच्‍चों  की आंखें

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