आंदोलन ने डाला नरेला की फैक्ट्रियों में ताला: किसानों से आधी सड़क मांगेंगे व्यापारी, सरकार से भी होगी बात

किसान आंदोलन की वजह से कई महीनों से नरेला औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियां बंद हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

किसान आंदोलन की वजह से कई महीनों से नरेला औद्योगिक क्षेत्र की फैक्ट्रियां बंद हैं. (सांकेतिक तस्वीर)

किसान आंदोलन से नुकसान उठा रहे नरेला इंडस्ट्रियल एरिया के कारोबारी सरकार के साथ-साथ किसानों से भी अनुरोध करेंगे कि वह उन्हें एक तरफ की सड़क दे दें, ताकि उनकी गाड़ियों का आवागमन शुरू हो जाए.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 29, 2021, 9:19 PM IST
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नई दिल्ली. नरेला इंडस्ट्रियल एरिया को किसान आंदोलन ने बुरी तरह से प्रभावित किया है. यहां के व्यापारियों को पहले उम्मीद थी कि किसानों की सरकार से हो रही बातचीत के बाद आंदोलन खत्म हो जाएगा, लकिन इसके बाद भी आंदोलन जारी है. 26 जनवरी के बवाल के बाद भी यदि आंदोलन चल रहा है तो ये यहां के कारोबारियों के लिए मुश्किल बढ़ाने वाला है. इसी को लेकर अब नरेला इंडस्ट्रियल एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने सरकार को पत्र लिखने की बात कही है। सरकार के साथ वह किसानों से भी अनुरोध करेंगे कि वह उन्हें एक तरफ की सड़क दे दें, ताकि उनकी गाड़ियों का आवागमन शुरू हो जाए.

दिल्ली के नरेला इंडस्ट्रियल एरिया और बवाना को मिलाया जाए तो यहां करीब 20,000 फैक्ट्रियां हैं. इन फैक्ट्रियों में लाखों की संख्या में मजदूर भी काम करते हैं. दो महीने से ज्यादा चल रहे किसान आंदोलन से दिल्ली की सीमाएं बंद हैं. खासकर इन फैक्ट्रियों के पास का रास्ता सिंघु बॉर्डर का था और वह 2 महीने से बंद है. इन फैक्ट्रियों में ज्यादातर बड़े-बड़े ट्रक आते हैं , जो छोटे वैकल्पिक रास्तों से नहीं आ पाते. फिलहाल वे बड़े ट्रक यहां नहीं आ पा रहे हैं . छोटी गाड़ियों को भी दिल्ली के दूसरे रास्तों से नरेला में आना पड़ता है. इस वजह से यह लोग काफी परेशान है.

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नरेला इंडस्ट्रियल एरिया की एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि पहले उन्हें आशा थी कि सरकार से बातचीत चल रही है. समाधान निकल जाएगा. इसके बाद लगा कि 26 जनवरी के बाद यह रास्ते खुल जाएंगे लेकिन अभी भी रास्ते नहीं खुले हैं. अब वह सरकार को भी पत्र लिखकर अपनी समस्या से अवगत करवाएंगे. एसोसियेशन के लोगों ने किसानों से भी अनुरोध किया है कि वह हाईवे पर एक तरफ की सड़क इन्हें दे दें ताकि इनकी गाड़ियों का आवागमन शुरू हो सके. हम भी किसानों के भाई हैं.
आंदोलन से प्रभावित लोगों ने कहा कि या तो उन्हें एक तरफ का हाईवे पर रास्ता मिल जाए या आंदोलनकारियों को रामलीला ग्राउंड या फिर दूसरी कोई जगह दे दी जाए. वहां इनका भी आंदोलन चलता रहे और हमारा काम भी ना रुके. फिलहाल किसान आंदोलन की वजह से आसपास के उद्योग क्षेत्र पर काफी प्रभाव पड़ा है.

नोटबंदी और कोरोना के बाद यह तीसरी चोट



इंडस्ट्रियल क्षेत्र के लोगों की मानें तो पहले तो नोटबंदी के कारण इनके यहां मंदी आई और फिर कोरोना काल के दौरान इनके काम बंद रहे. अब किसान आंदोलन के दौरान भी इनके काम बंद पड़े हैं. बड़ी संख्या में लेबर सिंघु बॉर्डर की दूसरी तरफ से इन फैक्ट्रियों में आती है. अब पैदल रास्ते भी सिंघु बॉर्डर पर बंद कर दिए गए हैं. अब लेबर भी यहां नहीं आ पाएगी. व्यापारियों से डील करने वाले दूसरे व्यापारी जो दूसरे राज्यों से आते थे वह सिंघु बॉर्डर पर इस बवाल के कारण दिल्ली में नहीं आ रहे हैं. इस कारण भारी नुकसान हो रहा है. (अनिल अत्री के इनपुट के साथ)
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