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भारत में बढ़े स्‍ट्रोक, अल्‍जाइमर और ब्रेन कैंसर के मामले, महिलाएं सबसे ज्‍यादा शिकार  

भारत में पार्किंसन से लेकर अल्‍जाइमर, स्‍ट्रोक जैसे नयूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के मामले बढ़ रहे हैं. सांकेतिक तस्‍वीर.

भारत में पार्किंसन से लेकर अल्‍जाइमर, स्‍ट्रोक जैसे नयूरोलॉजिकल डिसऑर्डर के मामले बढ़ रहे हैं. सांकेतिक तस्‍वीर.

Neurological Disorders in India: मेडिकल जर्नल द लेंसेट ग्‍लोबल हेल्‍थ में छपी स्‍टडी के मुताबिक 1990 के बाद से 2019 तक भारत में स्‍ट्रोक, अल्‍जाइमर, ब्रेन कैंसर या चोट लगने के बाद पैदा होने वाले न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर काफी बढ़े हैं या लगभग दोगुने हो गए हैं.

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नई दिल्‍ली. भारत सहित पूरे विश्‍व को कोरोना महामारी ने हिलाकर रख दिया है लेकिन इसके साथ-साथ ऐसी भी बीमारियां हैं जो खामोशी से लोगों के अंदर जगह बनाती जा रही हैं. न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स (Neurological Disorders) उन्‍हीं में से एक है. लोगों की दिनचर्या, लाइफस्‍टाइल, हाइजीन और स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति बरती गई लापरवाही से यह बीमारी भारत (India) में लगातार बढ़ रही है.

न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर पर हाल ही में द लेंसेट ग्‍लोबल हेल्‍थ (The Lancet Global Health) जर्नल में छपे अध्‍ययन में स्‍वास्‍थ्‍य विशेषज्ञों ने इस पर चिंता जाहिर की है साथ ही राज्‍यों में बढ़ती इस बीमारी के प्रति सतर्क रहने की भी बात कही है. देश में पाए जाने वाले तीन तरह के न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स में से दो तरह के डिसऑर्डर का ग्राफ 1990 से लेकर 2019 तक लगभग दोगुना हो गया है.

अध्‍ययन में कहा गया है कि न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर्स का इस तरह बढ़ना हेल्‍थ सिस्‍टम (Health System) के लिए एक चुनौती है साथ ही निम्‍न आय और मध्यम आय वर्ग वाले देश के लिए चिंता की बात है. यहां तक कि इन डिसऑर्डर्स को लेकर अभी तक लोगों के पास न तो पूरी जानकारी है और न ही इसके इलाज के लिए सुविधा है.

इस स्‍टडी की सह लेखिका और दिल्‍ली ऑल इंडिया इंस्‍टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) के डिपार्टमेंट ऑफ न्‍यूरोलॉजी में प्रोफेसर डॉ. मंजरी त्रिपाठी न्‍यूज 18 हिंदी को बताती हैं कि 1990 के बाद से 2019 तक भारत में स्‍ट्रोक (Stroke), अल्‍जाइमर, हेडएक डिसऑर्डर (Headache Disorder), ब्रेन कैंसर (Brain Cancer) या चोट लगने के बाद पैदा होने वाले न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर काफी बढ़े हैं या लगभग दोगुने हो गए हैं. जहां तक राज्‍यों की बात है तो अलग-अलग राज्‍यों में अलग-अलग डिसऑर्डर के मामले बढ़े हैं.

नॉर्थ ईस्‍ट और केरल में स्‍ट्रोक व अल्‍जाइमर के मामले दोगुने

स्‍टडी बताती है कि छत्‍तीसगढ़, ओड़ीसा, असम, पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में सबसे ज्‍यादा स्‍ट्रोक के मामले सामने आए हैं. वहीं केरल में अल्‍जाइमर के मरीज सबसे ज्‍यादा बढ़े हैं. 1990 के मुकाबले देखा जाए तो 2019 तक यहां ये मामले दोगुने से ज्‍यादा हो गए हैं.

वहीं चोट के बाद पैदा होने वाले न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर सबसे ज्‍यादा तमिलनाडू, जम्‍मू कश्‍मीर, लद्दाख, केरल और गोवा में सामने आए हैं.

यूपी और मध्‍य प्रदेश में कम्‍यूनिकेबल डिसऑर्डर

भारत के उत्‍तर प्रदेश, बिहार, मध्‍य प्रदेश, झारखंड, राजस्‍थान, छत्‍तीसगढ़, मणिपुर, नगालैंड, उत्‍तराखंड और ओड़ीसा में टिटनेस के बाद न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर (Neurological Disorder) बढ़ा है. वहीं मध्‍य प्रदेश और उत्‍तर प्रदेश में मैनिंग्‍जाइटिस के बाद यह बीमारी पनपी है. हालांकि अगर 30 सालों की तुलना करें तो कम्‍यूनिकेबल डिसऑर्डर कुछ कम हुए हैं.

इस वजह से बढ़े हैं मामले

डॉ. मंजरी त्रिपाठी कहती हैं कि कुछ राज्‍यों मेंके मामले दोगुने हुए हैं इसके पीछे बदली हुई लाइफस्‍टाइल (Life Style) एक वजह है. वहीं लोगों के खानपान और स्‍वास्‍थ्‍य के प्रति बरती जा रही लापरवाही के कारण स्‍ट्रोक और अल्‍जाइमर जैसी बीमारियां पनप रही हैं. ज्‍यादा देर तक टीवी के सामने या मोबाइल फोन पर रहना, घूमना फिरना कम होना, तनाव और अवसाद के कारण भी ये डिसऑर्डर बढ़ रहे हैं. लोगों को जीवनशैली में बदलाव करने की जरूरत है.

भारत में तीन तरह के  न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर

स्‍टडी के मुताबिक भारत के लोगों में तीन तरह के न्‍यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर पाए गए हैं. अगर राज्‍यों के हिसाब से देखें तो इनके मरीजों की संख्‍या कहीं ज्‍यादा तो कहीं बिल्‍कुल कम है.

नॉन कम्‍यूनिकेबल डिसऑर्डर

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