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कभी किसी क्षेत्रीय भाषा पर हिंदी थोपने की बात नहीं की: अमित शाह

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Updated: September 19, 2019, 6:00 AM IST
कभी किसी क्षेत्रीय भाषा पर हिंदी थोपने की बात नहीं की: अमित शाह
दरअसल गृहमंत्री ने हिंदी दिवस पर कहा था कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है लेकिन पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है. (फाइल फोटो)

'एक देश, एक भाषा' दिए अपने बयान पर राजनीतिक बवाल मचने के बाद गृहमंत्री (Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने साफ कर दिया है उन्होंने कभी हिंदी (Hindi) थोपने की बात नहीं कही है.

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  • Last Updated: September 19, 2019, 6:00 AM IST
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नई दिल्ली. 'एक देश, एक भाषा' दिए अपने बयान पर राजनीतिक बवाल मचने के बाद गृहमंत्री (Home Minister) अमित शाह (Amit Shah) ने साफ कर दिया है उन्होंने कभी हिंदी (Hindi) थोपने की बात नहीं कही है. दरअसल गृहमंत्री ने हिंदी दिवस पर कहा था कि भारत विभिन्न भाषाओं का देश है और हर भाषा का अपना महत्व है लेकिन पूरे देश की एक भाषा होना अत्यंत आवश्यक है जो विश्व में भारत की पहचान बने. आज देश को एकता की डोर में बाँधने का काम अगर कोई एक भाषा कर सकती है तो वो सर्वाधिक बोले जाने वाली हिंदी भाषा ही है.

'मैं खुद गैर हिंदी भाषी प्रदेश से हूं'
अब अमित शाह ने कहा है कि मैंने कभी हिंदी को क्षेत्रीय भाषाओं पर थोपने की बात नहीं की. मैंने सिर्फ हिंदी को दूसरी भाषा के तौर पर पढ़ने की वकालत की है. मैं खुद एक गैरहिंदी भाषी प्रदेश गुजरात से हूं. लेकिन अगर कुछ लोग राजनीति करना चाहते हैं तो ये उनकी इच्छा है.

गौरतलब है कि अमित शाह के बयान के बाद कर्नाटक के सीएम युदियुरप्पा ने कन्नड़ भाषा के समर्थन में बयान दिया था. उन्होंने कहा कि 'हमारे देश में सभी आधिकारिक भाषाएं समान हैं. जहां तक कर्नाटक का संबंध है कन्नड़ प्रमुख भाषा है. हम कभी भी इसके महत्व से समझौता नहीं करेंगे और कन्नड़ और हमारे राज्य की संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं.'



वहीं साउथ फिल्म इंडस्ट्री के सुपरस्टार और राजनीति में एंट्री कर चुके रजनीकांत (Rajinikanth) ने सरकार के 'एक राष्ट्र एक भाषा' (Common Language) के प्रस्ताव का विरोध किया है. रजनीकांत का कहना है कि एक भाषा देश के लिए अच्छी बात हो सकती है, मगर भारत जैसे विविधता वाले देश में इसे लागू करना संभव नहीं है. अगर ऐसा हुआ, तो दक्षिण राज्यों के साथ-साथ काफी हद तक उत्तरी राज्य भी इसका पुरजोर विरोध करेंगे.

ये नेता भी कर चुके हैं विरोध
बता दें कि रजनीकांत से पहले शरद पवार, ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भी 'एक राष्ट्र-एक भाषा' का विरोध कर चुके हैं. ममता बनर्जी ने कहा था कि हमें अपनी मातृभाषा को नहीं भुलाना चाहिए. ममता बनर्जी ने ट्वीट करके कहा, 'सभी को हिंदी दिवस की बधाई. हमें सभी भाषा और संस्कृति का सम्मान करना चाहिए. हम कई नई भाषाएं सीख सकते हैं, लेकिन हमें अपनी मातृभाषा को नहीं भूलना चाहिए.'

वहीं, डीएमके के एमके स्टालिन ने भी कहा था कि गृहमंत्री अमित शाह को अपना बयान वापस लेना चाहिए. स्टालिन ने कहा कि हम हमेशा से हिंदी को थोपे जाने का विरोध करते रहे हैं. ये देश की एकता को प्रभावित करेगा. उधर, एनसीपी नेता शरद पवार भी एक राष्ट्र एक भाषा के खिलाफ हैं.
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First published: September 19, 2019, 5:41 AM IST
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